सीबीएसई पेपर लीक: पीएचडी है ये मास्टरमाइंड, सिर्फ इस चक्कर में लीक कर दिया पेपर
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सीबीएसई के 12वीं कक्षा के अर्थशास्त्र के पेपर लीक मामले में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के संतोषगढ़ निवासी मास्टरमाइंड राकेश शर्मा ने अपनी रिश्तेदार के एक बच्चे को पास कराने के चक्कर में पेपर लीक कर दिया।
उसने सबसे पहले इसी महिला रिश्तेदार के मोबाइल पर हाथ से लिखे पेपर की एक कॉपी व्हाट्सएप पर भेजी थी। उस महिला ने ही इसे आगे फार्वर्ड कर दिया। इसके एक दिन बाद ही यह पेपर देश भर में तेजी से वायरल होकर सीबीएसई के दिल्ली मुख्यालय तक पहुंच गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार राकेश ने पहले तो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर से चुपके से अर्थशास्त्र के पांच पेपरों का छोटा बंडल उड़ा लिया। बाद में इस पेपर को अपने यहां ट्यूशन पढ़ने वाली एक छात्रा को दे दिया। उस छात्रा ने इस पेपर को अपने हाथ से कॉपी किया और राकेश को दे दिया। इसके बाद राकेश ने कॉपी किए हुए हाथ से लिखे पेपर के फोटो खींचे और महिला रिश्तेदार को व्हट्सएप कर दिए।
इसी महिला ने इसे आगे औरों को भेज दिया जो पूरे देश भर में वायरल हो गया। राकेश ने यह पेपर परीक्षा से तीन दिन पहले 23 मार्च को लीक कर दिया था। क्राइम ब्रांच दिल्ली की टीम ने जैसे ही व्हट्सएप मैसेज की जांच की तो पता चल गया कि हाथ से लिखा यह पेपर राकेश के मोबाइल से ही सबसे पहले भेजा गया।
चुपके से खिसका लिया बंडल
पुलिस के मुताबिक 23 मार्च को डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में बतौर पीजीटी तैनात राकेश कुमार इसी स्कूल के ऑफिस क्लर्क अमित शर्मा और चपरासी अशोक कुमार को साथ लेकर कंप्यूटर साइंस और आईपी के पेपर लेने गया।
उसी दौरान राकेश शर्मा ने बैंक के लॉकर से 26 मार्च को होने वाली जमा दो कक्षा की अर्थशास्त्र परीक्षा के पेपर का एक बंडल चुपके से खिसका लिया। राकेश शर्मा ने यह बंडल उसके साथ आए अमित शर्मा और अशोक कुमार को थमा दिया। इन दोनों ने रास्ते में कार में ही इस पेपर को खोला और अपने मोबाइल से इसकी एक कॉपी राकेश को दे दी।
पैसों का नहीं हुआ कोई लेन-देन
सीबीएसई के पेपर लीक होने के पीछे पैसों के लेन-देन की कोई भूमिका नहीं है। मास्टरमाइंड का इरादा इसे आगे औरों को बेचने का नहीं था। उसे तो यह तक अंदेशा नहीं था उसका भेजा एक मैसेज पूरे देश में वायरल हो जाएगा। पुलिस के सूत्र बता रहे हैं कि अभी तक की जांच और आरोपी से हुई पूछताछ में पैसों के लेन-देन का कोई मामला सामने नहीं आया है।
व्हाट्स ऐप कर डाला
मास्टरमाइंड राकेश ने पेपर चुराया और आगे भेज दिया- जिला ऊना का संतोषगढ़ निवासी राकेश 12वीं कक्षा के अर्थशास्त्र के पेपर को लीक करने का मास्टरमाइंड है। उसने पीएचडी की हुई है। वह ऊना स्थित डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल में दस वर्ष से कॉमर्स व अर्थशास्त्र पढ़ाता है। सीबीएसई ने उसे जवाहर नवोदय स्कूल का परीक्षा केंद्र अधीक्षक नियुक्त किया था। वह पिछले तीन वर्ष से यह जिम्मेदारी संभाल रहा था। उसने ही पेपर चुराया और अपनी भाभी को मोबाइल पर भेज दिया। यहीं से पेपर वायरल हो गया।
अमित ने पेपर का बंडल खोला और राकेश को व्हाट्स ऐप किया- ऊना के जखेड़ा निवासी अमित शर्मा पिछले 16 वर्ष से डीएवी स्कूल में क्लर्क है। वह राकेश कुमार के साथ बैंक के स्ट्रांग रूम में पेपर लेने जाता था। अमित ने ही बंडल से अर्थशास्त्र के पेपर को निकाला था और फोटो खींचकर राकेश को व्हाट्स ऐप किया था। संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने बताया कि अब तक की पूछताछ में अमित शर्मा ने पैसे लेने से इनकार किया है। उसका कहना है कि राकेश कुमार उसका सीनियर है। इस कारण उसने बात मान ली थी। वह दस वर्ष से राकेश कुमार के साथ काम कर रहा है।
चपरासी अशोक ने भी दोनों आरोपियों का दिया साथ- ऊना के जखेड़ा निवासी अशोक कुमार वर्ष 2003 से डीएवी स्कूल में चपरासी है। वह राकेश कुमार की सहायता करता था। अशोक कुमार ने भी पेपर लीक मामले में पैसे लेने की बात से इनकार किया है। अशोक का कहना है कि उसने सीनियर राकेश कुमार के कहने पर साथ दिया था। अशोक भी अमित के साथ पेपर लेने बैंक गया था। राकेश से पेपर लेने के बाद अमित और अशोक ने कार में पेपर का बंडल खोला और उसकी एक कॉपी उसे भेज दी।
स्ट्रांग रूम से गायब कर दिया बंडल, नहीं चेता बैंक प्रबंधन
पेपर लीक होने के पीछे बैंक प्रबंधन की बड़ी लापरवाही का भी हाथ है। बैंक के स्ट्रांग रूम से सीबीएसई अर्थशास्त्र के पेपर का एक बंडल गायब हो गया और प्रबंधन को भनक तक नहीं लगी। बड़ा सवाल यह है कि कंप्यूटर साइंस और आईपी का पेपर निकालते समय किसी बैंक अधिकारी या सुरक्षा कर्मी ने यह चेक क्यों नहीं किया कि शिक्षक दो बंडल लेकर जा रहा है या तीन।
अगर स्ट्रांग रूम से बाहर निकलने से पहले ठीक से चेक किया जाता तो अर्थशास्त्र का पेपर न बाहर जाता और न ही लीक होता। दूसरा पेपर निकालते समय कोई वीडियोग्राफी की गई या नहीं। सीबीएसई पेपर लीक प्रकरण में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ऊना शाखा की सुरक्षा प्रणाली पर भी सवालिया निशान लग गया है।
गौर हो कि इस प्रकरण के मुख्य आरोपी मास्टरमाइंड राकेश शर्मा अपने दो साथियों अमित और अशोक के साथ 23 मार्च 2018 को यूनियन बैंक की ब्रांच में जमा दो कंप्यूटर साइंस और आईपी के पेपर लेने गया। सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा की दृष्टि से कैश और पेपर के आहरण और वितरण को लेकर वीडियोग्राफी आदि करने के निर्देश हैं।
बाकायदा एग्जाम सुपरिंटेंडेंट के अलावा बैंक की ओर से गठित एक टीम इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखती है। उसके बाद ही सील बंद लिफाफे अधिकृत व्यक्ति को दिए जाते हैं। लेकिन इस मामले में बैंक की ओर से भी चूक देखी जा रही है। राकेश ने कंप्यूटर साइंस और आईपी का पेपर निकालने के बहाने चुपके से जमा दो कक्षा का अर्थशास्त्र पेपर का बंडल भी स्ट्रांग रूम के लॉकर से खिसका लिया। सवाल यह उठता है कि बैंक प्रबंधन की नजर में यह लापरवाही क्यों नहीं आई।
या इसके पीछे कुछ और भी था। इस पूरे प्रकरण में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच की सुई बैंक की ओर भी घूम सकती है। दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर अलोक कुमार ने अपने आधिकारिक ब्यान में स्पष्ट किया है कि इस मामले में तीन मास्टर माइंड आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ-साथ मामले की अगली कड़ियों की जांच भी की जा रही है।
कार में खोला गया पेपर का बंडल
सीबीएसई पेपर लीक मामले में धरे गए मुख्य आरोपी राकेश कुमार ने उसी के स्कूल में तैनात क्लर्क अमित शर्मा और चपरासी अशोक कुमार की मदद से इस काम को अंजाम दिया। दोनों ही सहायक आरोपियों ने इस मामले में राकेश के मंसूबे को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा एसआई दिनेश कुमार की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने इस पूरे मामले का परत-दर-परत पर्दाफाश किया है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक 23 मार्च की सुबह जब मुख्य आरोपी पीजीटी राकेश कुमार क्लर्क अमित शर्मा और चपरासी अशोक कुमार को अपने साथ यूनियन बैंक ले गया। उसी वक्त राकेश कुमार ने स्ट्रांग रूम से निकाले गए अर्थशास्त्र के पांच पेपर के बंडल को अमित और अशोक को थमा दिया। उसके बाद दोपहर बाद दोनों ने कार में बैठकर पेपर के बंडल को तरीके से खोला और उसमें से एक पेपर के स्नैप शॉट राकेश कुमार के मोबाइल पर भेजे।
उसके बाद ही राकेश कुमार ने इसकी हस्त लिखित कॉपी तैयार कर इसे आगे प्रसारित किया। दिल्ली पुलिस की जांच टीम ने राकेश शर्मा के अलावा दोनों आरोपियों को इस प्रकरण में बराबर का भागीदार तय करते हुए अपनी जांच को आगे बढ़ाया है। माना जा रहा है कि इस मामले में व्हाट्सऐप किए गए संदेशों की जांच होने के बाद कई और लोग भी पुलिस जांच की जद में आ सकते हैं। पुलिस ने इस दिशा में जांच आगे बढ़ा दी है।
राकेश की छात्रा से थी दोस्ती, चल रही जांच
मास्टरमांइड राकेश ने 23 मार्च को अर्थशास्त्र के पेपर का बंडल चुराया और लीक कर दिया। जब 26 मार्च को बैंक में अर्थशास्त्र का पेपर लेने गया तो उसने बंडल को अन्य बंडलों में मिला दिया था। राकेश ने अपने मोबाइल से ओरिजनल पेपर की कॉपी डिलीट कर दी थी और छात्रा के हाथ से लिखे गए पेपर की मोबाइल से फोटो खींच ली थी।
इसके बाद उसने पेपर चंडीगढ़ में रहने वाली महिला रिश्तेदार के पास भेज दिया। महिला रिश्तेदार का बेटा भी 12वीं कक्षा के पेपर दे रहा है। महिला रिश्तेदार ने इस पेपर को आगे अपने रिश्तेदारों के पास भेज दिया। इस तरह यह पेपर वाट्सएप के जरिए पूरे देश में फैल गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राकेश कुमार ने शुरुआती पूछताछ में बताया है कि उसकी छात्रा अर्थशास्त्र में कमजोर थी। इस कारण उसने अर्थशास्त्र के पेपर को बंडल से निकाला था। हालांकि पुलिस छात्रा को अर्थशास्त्र के पेपर देने को लेकर राकेश कुमार व छात्रा की दोस्ती के बिंदु से भी जांच कर रही है। शुरुआती जांच में राकेश कुमार ने पैसे के लिए पेपर देने की बात से इनकार किया है।
दिल्ली की पूजा के जरिये सुलझी गुत्थी
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने दिल्ली के रोहिणी में रहने वाली पूजा नाम की महिला के जरिये 12वीं कक्षा के अर्थशास्त्र के पेपर के लीक होने की गुत्थी को सुलझाया है। जिन छात्रों व लोगों के पास व्हाट्स एप पर 12वीं कक्षा का अर्थशास्त्र का पेपर आया था, पुलिस उन सभी से पूछताछ कर रही थी। इस कड़ी में रोहिणी में रहने वाली पूजा का नंबर 33वां था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, करीब 40 व्हाट्स एप ग्रुप में यह लीक पेपर पहुंचा।
एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूजा ने यह पेपर दिल्ली में अपने कई रिश्तेदारों को भेजा था। पूजा ने बताया कि उसके पास पेपर चंडीगढ़ में रहने वाले 12वीं कक्षा के छात्र शुभाशीष (बदला नाम) ने भेजा था। शुभाशीष ने पुलिस को बताया कि उसे व्हाटस एप पर पेपर उसकी मां अंजू ने भेजा था। अंजू फिरोजाबाद में लाइब्रेरियन है।
पुलिस ने अंजू को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया तो उसने कहा कि ऊना से राकेश शर्मा ने उसे पेपर भेजा था। राकेश उसका रिश्ते में देवर है। इस तरह पुलिस ऊना में राकेश तक पहुंच गई और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि साबइर एक्सपर्ट की सहायता ली गई थी।
पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट तकनीक से व्हाट्स एप की जांच की थी। इस तकनीक से ही पेपर के व्हाट्स एप पर लीक होने की गुत्थी सुलझी है। एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि व्हाट्स एप पर पेपर लीक होने से 12वीं कक्षा के 40 से ज्यादा छात्रों को फायदा हुआ था।
पकड़े जाने के डर से हाथ से लिखवाया था
दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त आरपी उपाध्याय ने बताया कि मास्टरमाइंड राकेश कुमार को डर था कि वह अर्थशास्त्र के पेपर की ओरिजनल कॉपी व्हाट्स एप पर भेजेगा तो पकड़ा जाएगा। इसलिए उसने ट्यूशन पढ़ने वाली छात्रा को पेपर की ओरिजनल कॉपी हाथ से लिखने के लिए दे दी थी।
जब्त स्मार्ट फोन खोलेंगे कई राज
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आरोपियों से दो स्मार्ट फोन भी जब्त किए हैं, जो पेपर लीक करने में प्रयोग किए गए। बताया जा रहा है कि अब इन मोबाइल फोन की तकनीकी जांच के बाद मामले में कई और राज खुल सकते हैं।
पुलिस इस दिशा में जांच कर रही है कि आखिर कितने लोगों को किस-किस नंबर पर यह पेपर भेजा गया। इसके चलते पेपर दो दिन पूर्व ही पूरे देश में वायरल हो गया। हालांकि, दिल्ली पुलिस शनिवार को सभी आरोपियों की तैनाती वाले स्कूल से उनसे संबंधित तमाम दस्तावेज भी साथ ले गई है।
पूछताछ को बुलाए जा सकते हैं बैंक कर्मी
सूत्रों के अनुसार बैंक के कर्मचारियों को भी दिल्ली की क्राइम ब्रांच पूछताछ को बुला सकती है। इस स्तर की लापरवाही की गाज बैंक कर्मियों पर भी गिर सकती है। पुलिस सीसीटीवी की फुटेज भी ले सकती है ताकि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत है या नहीं इसका खुलासा हो सके।
बैंक कर्मियों की भूमिका की भी होगी जांच
12वीं कक्षा का अर्थशास्त्र का पेपर लीक होने के मामले में हमीरपुर, ऊना स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। दिल्ली पुलिस की एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बैंकों में पेपर आठ-दस दिन पहले पहुंच जाता है और उसे लॉकर में रखा जाता है।
पेपर वाले दिन केंद्र अधीक्षक पर्चा लेने आता है तो बैंक मैनेजर या फिर वरिष्ठ अधिकारी उसके साथ होता है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि राकेश कुमार ने अर्थशास्त्र का एक बंडल निकाल लिया था तो बैंक अधिकारी कहां थे और उन्हें बंडल निकालने का पता क्यों नहीं लगा। विशेष पुलिस आयुक्त आरपी उपाध्याय ने बताया कि इस बात की भी जांच हो रही है कि इसमें बैंक अधिकारियों की मिलीभगत तो नहीं है।
पुलिस बैंक के सीसीटीवी फुटेज को भी खंगालेगी। संयुक्त पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने बताया कि दिल्ली पुलिस तीनों आरोपियों को ऊना लेकर जाएगी। वहां बैंक अधिकारियों व स्कूल के अन्य लोगों से आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी। इसलिए आरोपियों को पांच दिन के रिमांड पर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, मास्टरमाइंड राकेश कुमार का कहना है कि उसने पहली बार पेपर लीक किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस बात की भी जांच हो रही है कि राकेश कुमार ने पहले तो कोई और पेपर लीक नहीं किया।
विशेष पुलिस आयुक्त ने बताया कि इस बात की भी जांच हो रही है कि आरोपियों ने 10वीं का गणित का पेपर भी तो लीक नहीं किया था। हालांकि, अब तक आरोपियों ने गणित का पेपर लीक करने की बात से इंकार किया है। इस बात की भी पूरी आशंका है कि अमित व अशोक ने अर्थशास्त्र के पेपर को अपने जानकारों व रिश्तेदारों को भेजा हो।
12वीं के छात्र ने भेजा था सीबीएसई को पेपर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अर्थशास्त्र का पर्चा लीक होने की सीबीएसई को दो शिकायतें मिली थीं। एक शिकायत 12वीं कक्षा के छात्र ने की थी। छात्र ने लीक पेपर को अपने ई-मेल एकाउंट से सीबीएसई को भेजा था। दूसरी शिकायत में किसी अज्ञात व्यक्ति ने सीबीएसई को एक लिफाफा भेजा था। इस लिफाफे में अर्थशास्त्र के पेपर की हाथ से लिखी इमेज थे।
तफ्तीश पर उठ रहे ये सवाल
. पुलिस पेपर लीक मामले में पैसे के लेन-देन की बात कर रही है। पुलिस की थ्योरी पर विश्वास नहीं होता।
. मास्टरमाइंड राकेश कुमार का कहना है कि उसकी छात्रा अर्थशास्त्र में कमजोर थी। इस कारण उसने अर्थशास्त्र के पेपर का बंडल बैंक से निकाला था। जानकारों का कहना है कि मदद करने के लिए कोई इतना बड़ा जोखिम लेगा, यह बात विश्वास लायक नहीं है।
. अर्थशास्त्र का पेपर लीक होने के मामले में अशोक व अमित शर्मा का कोई लाभ सामने नहीं आ रहा है। ऐसा नहीं हो सकता कि कोई बिना लाभ के कोई इतना बड़ा जोखिम उठाएगा।
. राकेश कुमार का पेपर लीक करने का तरीका पूरी तरह फूलप्रूफ था। पेपर व्हाट्स एप पर नहीं आता तो शायद पेपर लीक होने का पता भी नहीं लगता। ऐसे में यह कैसे कह सकते हैं कि उसने और पेपर लीक न किए हों। हालांकि पुलिस अन्य पेपर लीक करने की बात से इनकार कर रही है।
दिनभर अंजान रही पुलिस, शाम को बोली दिल्ली में हुई गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल यूनिट की ओर से ऊना जिले के तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद हिमाचल पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। शनिवार दोपहर को दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की जानकारी मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो हिमाचल पुलिस के हाथपांव फूल गए।
हाल यह है कि एक दिन पूछताछ करने के बाद दिल्ली पुलिस ऊना से तीन लोगों को गिरफ्तार कर अपने साथ लेकर चली गई, लेकिन हिमाचल पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
शनिवार को प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय मीडिया में सीबीएसई पेपर लीक मामले में हिमाचल से तीन लोगों की गिरफ्तारी की बात पता चली तो उस समय तक भी हिमाचल पुलिस को कार्रवाई की जानकारी नहीं थी। दिनभर पुलिस मुख्यालय से लेकर ऊना पुलिस तक के अधिकारी गिरफ्तारी के संबंध में जानकारी जुटाने में लगे रहे।
शाम को हिमाचल पुलिस के डीजीपी सीताराम मरडी ने बताया कि बताया कि दिल्ली पुलिस ने आरोपियों को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया और वहीं गिरफ्तार किया है। ऐसे में गिरफ्तारी वहां होने के चलते दिल्ली पुलिस ने हिमाचल पुलिस से जानकारी साझा नहीं की।
वहीं, डीएवी ऊना के अधिकारियों का कहना था कि दिल्ली पुलिस ने तीनों को देर रात ऊना स्थित उनके घरों से ही उठाया और दिल्ली लेकर चली गई। साफ है कि प्रदेश के जिला पुलिस व सीआईडी के तंत्र की विफलता के चलते ही दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की चौबीस घंटे बाद भी हिमाचल पुलिस को जानकारी नहीं हो सकी।
आहत हैं परीक्षार्थी-शिक्षक
सीबीएसई प्रश्नपत्र लीक होने के मामले के हिमाचल से तार जुड़ने पर प्रदेश के शिक्षक और परीक्षार्थी आहत हैं। इस मामले में ऊना से हुई गिरफ्तारी के बाद से प्रदेश की साख को बड़ा धक्का लगा है। प्रदेश के जिन परीक्षार्थियों ने परीक्षा के लिए मेहनत की थी, उनमें इस प्रश्न पत्र लीक को लेकर गुस्सा भी है। परीक्षार्थियों और शिक्षकों ने देवभूमि हिमाचल को बदनाम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
परीक्षार्थी पर्ल का कहना है प्रश्न पत्र लीक होने से मेहनत करने वालों के साथ धोखा हुआ है। आज इतनी प्रतिस्पर्धा है कि एक-एक अंक के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। परीक्षार्थी देव पुरी का कहना है कि प्रश्न पत्र लीक होना तो व्यवस्था पर सवाल है। लाखों मेहनत करने वाले छात्रों के जीवन का मामला है।
शिमला में प्रश्न पत्र लीकेज जैसा कुछ नहीं था, लेकिन इसका खामियाजा हर परीक्षार्थी भुगत रहा है। परीक्षार्थी तपिश का कहना है कि हिमाचल का इस मामले में नाम आने से प्रदेश की साख खराब हुई है। परीक्षार्थी अर्जुन का कहना है कि शिमला में प्रश्न पत्र लीकेज जैसा कुछ नहीं था, अब दोबारा परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं।
किसी की गलती का खामियाजा हमें परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है। हिमाचल से गिरफ्तारी होना प्रदेश को शर्मसार करने वाली घटना है। उधर, केंद्रीय विद्यालय जाखू के प्रधानाचार्य मोहित गुप्ता और डीएवी लक्कड़ बाजार स्कूल की प्रधानाचार्य कामना बेरी का कहना है कि दिल्ली में उजागर हुए पेपर लीक मामले में हिमाचल के लोगों की संलिप्तता होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
राजधानी के सभी परीक्षा केंद्रों में दसवीं की गणित और 12वीं की अर्थशास्त्र की दोनों परीक्षाएं सीबीएसई के तय मानकों और नियमों के तहत हुई है। इसमें पूरी गोपनीयता रखी गई है। बावजूद इसके परीक्षार्थी इन मामलों के उजागर होने से आहत और चिंतित हैं।