लीक हो गई थी वीरभद्र के घर CBI छापे की सूचना
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के घर पर कभी भी सीबीआई के छापे पड़ सकते हैं, यह सूचना दो दिन पहले ही लीक हो गई थी। राज्य सरकार ने अपनी तरफ से तैयारी भी शुरू कर दी थी। वीरवार को कैबिनेट की बैठक के तुरंत बाद ही सरकार ने एक दस्तावेज तैयार करवाया, जिसमें इस बात की आशंका जताई गई थी कि मोदी सरकार कभी भी सीबीआई केस दर्ज कर सकती है और छापामारी कर सकती है।
इस दस्तावेज पर सभी मंत्रियों के दस्तख्त कराकर शुक्रवार को मीडिया को जारी कर दिया गया था, जिसे शनिवार को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से छापा। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने वीरभद्र सिंह और उनके परिवार पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप में मामला दर्ज करने की सारी औपचारिकता वीरवार को ही पूरी कर ली थी।
मंत्रियों ने तैयार कर ली थी रणनीति
ये काम सीबीआई ने गुपचुप तरीके से किया। इसी दिन ही छापे की भूमिका भी बन गई थी। लेकिन ये सूचना शाम तक वीरभद्र सरकार तक पहुंच गई। कैबिनेट बैठक के बाद देर शाम सभी मंत्रियों ने आगे की रणनीति तैयार कर ली थी। वीरभद्र की बड़ी बेटी की शादी की तारीख हालांकि पहले से ही तय थी।
मगर इसे स्थगित नहीं किया गया, क्योंकि आमंत्रण पत्र बंट चुके थे। इस सारे प्रकरण में सीबीआई की गोपनीयता पर भी सवाल खडे़ हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि विभिन्न ठिकानों पर संपत्ति के नाम पर कोई बड़ी बरामदगी नहीं हुई है। हालांकि, कुछ दस्तावेज मिले हैं, जिनका सीबीआई बारीकी से अध्ययन कर रही है।
वसुंधरा और शिवराज पर हमले का बदला वीरभद्र से लिया
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सीबीआई जांच की मांग करना कांग्रेस को महंगा पड़ा। भाजपा ने कांग्रेस के ही मुख्यमंत्री को सीबीआई जांच के लपेटे में ले लिया। भाजपा हाईकमान को यह आइडिया देने वाले हिमाचल भाजपा के कई वरिष्ठ नेता ही हैं।
इन्होंने इस मामले से जुडे़ दस्तावेज अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद जैसे नेताओं को मुहैया कराए। इन नेताओं ने दिल्ली में बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर वीरभद्र के खिलाफ देश भर में माहौल बनाया। वीरभद्र सिंह के केंद्रीय मंत्री रहते ही आयकर विभाग की छापामारी के हाथ एक डायरी लगने से उठे गलत लेनदेन के आरोपों से चार साल पहले यह घमासान शुरू हुआ।
भाजपा के नेताओं ने बनाया सीबीआई जांच का दबाव
अगर यह घमासान आज सीबीआई में मामला दर्ज होने और छापामारी की स्टेज तक पहुंच गया है तो इसके लिए कांग्रेस और भाजपा की राष्ट्रीय स्तर पर चलने वाली धींगामुश्ती ही ज्यादा जिम्मेवार मानी जा रही है। हिमाचल भाजपा के कुछ वरिष्ठ और तेजतर्रार नेता सीबीआई जांच को तेज करने के लिए लगातार दबाव बनाते रहे।
यह दबाव हिमाचल प्रदेश के विधानसभा सत्रों में गतिरोध से लेकर दिल्ली के रण तक लगातार नजर आता रहा। हाल ही में तो भाजपा और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता वीरभद्र सिंह को इस मुद्दे पर लपेटते और बचाव में नजर आए। कुछ भी हो, राष्ट्रीय राजनीतिक हालात में हिमाचल भाजपा के कुछ नेताओं को सीएम पर केस दर्ज करवाना और सीबीआई की छापामारी एक बड़ी सफलता नजर आ रही है।
क्या कुछ नया निकाल पाऐगी सीबीआई
सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करने के बाद मुख्यमंत्री और इस मामले से जुड़े आरोपियों के ठिकाने पर दबिश दी लेकिन इस छानबीन में नया कुछ नहीं मिला। सीबीआई मुख्यमंत्री की ओर से डिक्लेयरड संपत्ति की जांच कर रही है। आयकर महकमा भी इस मामले की छानबीन कर चुका है। इस मामले से जुड़े कई दस्तावेज इनके कब्जे में हैं। सीबीआई के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा अपने कार्यकाल के दौरान पहले ही अदालत को बता चुके हैं कि इसमें सीबीआई की ओर से कोई मुकदमा नहीं बनता।
सीबीआई ने प्रारंभिक जांच शुरू की। अदालत ने इस मामले में स्ट्टेस रिपोर्ट सीबीआई से मांगी। अदालत की ओर से कोई आदेश मिलने से पहले ही सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर दिया। अब देखना यह है कि सीबीआई की इंक्वायरी में इस केस में क्या अलग मिलता है। सीबीआई मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके परिवार पर कितना शिकंजा कस पाते हैं यह भविष्य के गर्भ में है।