सीबीआई अदालत में वीरभद्र के खिलाफ जांच का रिकॉर्ड तलब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ सीबीआई की प्रारंभिक जांच का रिकॉर्ड सीबीआई अदालत ने तलब किया है। अदालत ने यह निर्देश वीरभद्र सिंह के आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिया है। इस आवेदन पर फैसला सुनाने के लिये 2 दिसंबर की तारीख तय की है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आवेदन दायर कर सीबीआई पर उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में दर्ज एफआईआर की पूरी कॉपी कोर्ट में जमा न करवाने का आरोप लगाया है। उन्होंने एफआईआर की पूरी कॉपी जमा करवाने का निर्देश देने की मांग की थी।
पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार के समक्ष इस मामले में सीबीआई के जवाब पर मामूली बहस हुई। वीरभद्र सिंह के वकील ने कहा कि एजेंसी ने उन्हें एफआईआर की पूरी कॉपी नहीं दी है। यह एफआईआर व प्रारंभिक जांच के बीच काफी विलंब है। यह एफआईआर किस आधार पर दर्ज की गई यह जानने के प्रारंभिक जांच का रिकॉर्ड मंगाया जाए।
6.1 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का है मामला
अदालत ने पीड़ित पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सीबीआई को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 2 दिसंबर से पहले पेश करने का निर्देश दिया है ताकि उसका अध्ययन किया जा सके। मुख्यमंत्री व उनके परिजनों के खिलाफ जांच एजेंसी ने प्रारंभिक जांच पंजीकृत की थी जिसे बाद में रेगुलर केस में तब्दील कर दिया गया। एजेंसी का आरोप है कि 6.1 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति अर्जित की है। यह संपत्ति 2009-11 की अवधि में उनकी घोषित आय से अधिक है।
इस अवधि में वीरभद्र यूपीए सरकार में इस्पात मंत्री थे। सीबीआई ने वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान व चुन्नी लाल चौहान के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत नामजद एफआईआर की है। एजेंसी का दावा है कि केंद्रीय मंत्री रहते हुए वीरभद्र ने अपने व अपने परिवार के लोगों के नाम पर चौहान के जरिये एलआईसी पॉलिसी में 6.1 करोड़ रुपये निवेश किए।