बैंक लोन फर्जीवाड़े में अफसर समेत तीन को कारावास, सीबीआई अदालत ने सुनाया फैसला
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सीबीआई अदालत ने 22 फरवरी, 2013 को दर्ज 20 लाख के बैंक लोन फर्जीवाड़े में फैसला सुनाया। न्यायाधीश शरद कुमार लगवाल की अदालत ने स्टेट बैंक देहरा के तत्कालीन फील्ड अफसर कुलदीप सिंह भटवा को छह साल, लोन के लाभार्थी भाग सिंह राणा को 15 और एक अन्य को नौ कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। फील्ड अफसर को धोखाधड़ी व षड्यंत्र रचने पर तीन साल कठोर कारावास सहित 10 हजार जुर्माना व भ्रष्टाचार के मामले में तीन साल कठोर कारावास व दस हजार जुर्माने की सजा सुनवाई।
घोटाले में हिम एग्रो ग्राम उद्योग के मालिक भाग सिंह राणा एवं लोन लेने के लाभार्थी को षड्यंत्र रचने पर तीन साल कठोर कारावास और दस हजार जुर्माना, धोखाधड़ी के लिए तीन साल कारावास व दस हजार जुर्माने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने पर तीन साल कारावास व जुर्माने के अलावा, छल के उद्देश्य से षड्यंत्र रचने पर तीन साल कठोर कारावास सहित जुर्माने के अलावा, इलेक्ट्रॉनिक तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के जुर्म में तीन साल कठोर कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई है।
धर्मशाला शाखा की क्षेत्रीय प्रबंधक की शिकायत पर एफआईआर
तीसरे दोषी सुरेश कुमार को षड्यंत्र रचने पर तीन साल कठोर कारावास व 10 हजार जुर्माना, फर्जी दस्तावेज तैयार करने में तीन-तीन साल की सजा सहित दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। उपरोक्त मामले में पहले से जेल में काटा जा चुका समय अदालत द्वारा सुनवाई सजा में गिना जाएगा।
2007 में धर्मशाला एसबीआई में तैनात क्षेत्रीय प्रबंधक रश्मि दुग्गल ने सीबीआई को लिखित शिकायत दी थी कि देहरा ब्रांच के बैंक अधिकारी बाहरी व्यक्ति के साथ मिलकर वित्तीय फर्जीवाड़े की साजिश रच रहे हैं, जिससे 88 लाख के लोन विभिन्न लोगों को फर्जी दस्तावेज के आधार पर जारी किए गए हैं।
सीबीआई थाना शिमला ने 22 फरवरी, 2013 को मामला दर्ज किया। 27 मई 2015 को चार्जशीट पेश की और फील्ड अफसर सहित एक लोन लाभार्थी और एक अन्य के खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया। मामले में कुल 25 में से 23 गवाहों के बयान दर्ज किए।