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छात्रवृत्ति घोटाला: अधीक्षक, संस्थान संचालक और बैंक कैशियर गिरफ्तार

Sat, 04 Jan 2020 11:40 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 04 Jan 2020 11:40 AM IST
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CBI arrested three people in scholarship scam in himachal pradesh
scholarship scam in Himachal Pradesh

हिमाचल में 250 करोड़ के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में जुटी सीबीआई ने पहली बार तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधीक्षक अरविंद राज्टा, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की नवांशहर शाखा का हेड कैशियर और ऊना के केसी ग्रुप आफ इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी है। तीनों शनिवार को सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा। बताया जा रहा है कि तीनों के खिलाफ घोटाले में पक्के सुबूत होने के बाद सीबीआई ने कार्रवाई की है। जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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सूत्रों ने बताया कि अभी तक की जांच में राज्टा की भूमिका संदिग्ध मिली है। वह घोटाले वाले समय के दौरान शिक्षा मुख्यालय में उस सीट पर तैनात रहा है जहां से छात्रवृत्ति वितरण का काम संचालित होता है। पिछले कुछ समय में सीबीआई ने ऊना के केसी इंस्टीट्यूट पर छापा मारकर भी दस्तावेज सीज किए थे। वहीं, बैंक के हेड कैशियर के लिए कहा जा रहा है कि वह बैंक खातों में मोबाइल नंबर व अन्य जानकारियों को लेकर फर्जीवाड़े में शामिल था।

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9 मई को हुई थी एफआईआर

हिमाचल सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने 9 मई 2019 को एफआईआर दर्ज की थी। पांच दिन बाद ही हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 22 शैक्षणिक संस्थानों के ठिकानों पर छापे मारे गए। यह कार्रवाई हिमाचल में शिमला, सिरमौर, ऊना, बिलासपुर, चंबा और कांगड़ा के अलावा करनाल, मोहाली, नवांशहर, अंबाला और गुरदासपुर स्थित कई शैक्षणिक संस्थानों पर की गई। साथ ही बैंकों में भी छापा मारा था।

यह है मामला
मंत्री रामलाल मारकंडा की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच की तो साल 2013-14 से 2016-17 तक 2.38 लाख एससी, एसटी और ओबीसी के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जारी करने के दौरान हुई गड़बड़ी की बात सामने आई। इसी दौरान 2772 शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति बंटी, जिसमें 266 निजी शिक्षण संस्थान शामिल थे।

निजी संस्थानों को 210 करोड़ और सरकारी संस्थानों को 56 करोड़ की राशि दी गई। 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19915 को चार मोबाइल फोन नंबरों से जुड़े बैंक खातों में राशि जारी की गई। मामला बड़े शिक्षण संस्थानों व दूसरे राज्यों से भी जुड़ा था, ऐसे में सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी।

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