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अफसरशाही के आगे झुक गई वीरभद्र सरकार!

Thu, 28 Aug 2014 08:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 28 Aug 2014 08:40 PM IST
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cabinet decision on lokayukta

लोकायुक्त विधेयक अधिनियम - 2014 को लेकर हिमाचल प्रदेश की अफसरशाही के आगे सरकार झुक गई। लोकायुक्त प्रवर समिति के अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर की ओर से लोकायुक्त के फैसले को न मानना अवमानना के दायरे में लाने के प्रावधान को कैबिनेट ने हटा दिया है।

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इस प्रावधान को डालने के लिए प्रदेश की अफसरशाही शुरू से ही विरोध कर रही थी। दरअसल कौल सिंह ठाकुर ने नेशनल लोकायुक्त विधेयक से भी हटकर यह प्रावधान किया था, जिससे प्रदेश में विधेयक को सख्त किया जा सके। ताकि प्रदेश का कोई भी भ्रष्ट अफसर इससे बच न पाए।
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लेकिन अफसरों की लाबिंग के सामने कौल सिंह ठाकुर की नहीं चल पाई। हालांकि लोकायुक्त पर प्रवर समिति की अन्य सिफारिशों को कैबिनेट ने कुछ बदलाव के साथ मंजूर कर दिया। इसके लिए सरकार अध्यादेश लाएगी या नहीं। इस पर किसी प्रकार की सहमति नहीं बन पाई।
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सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि अभी प्रदेश में 1983 का लोकायुक्त अधिनियम लागू है। ऐसे में कोई जल्दी करने की जरूरत नहीं है। कैबिनेट की बैठक तय किया गया कि लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश को भी चयन समिति के सदस्य बनाया जाएगा। अवमानना के मामले में कैबिनेट के भीतर काफी देर तक चर्चा हुई।

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