उपचुनाव: गृह क्षेत्र में बढ़त के बावजूद मंडी की जंग हार गए मुख्यमंत्री जयराम
40 हजार 800 वोटों की लीड सीएम भाजपा प्रत्याशी बिग्रेडियर कुशाल ठाकुर को मंडी जिले से दिलवाने में कायमाब रहे, लेकिन यह रामपुर, किनौर, आनी, मनाली, कुल्लू और भरमौर की बढ़त को काटने में काफी साबित नहीं हुई।
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हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र की चुनावी जंग सीएम जयराम ठाकुर अपने गृह क्षेत्र में बढ़त के बावजूद हार गए हैं। 40 हजार 800 वोटों की लीड सीएम भाजपा प्रत्याशी बिग्रेडियर कुशाल ठाकुर को मंडी जिले से दिलवाने में कायमाब रहे, लेकिन यह रामपुर, किनौर, आनी, मनाली, कुल्लू और भरमौर की बढ़त को काटने में काफी साबित नहीं हुई। नतीजतन प्रदेश के सबसे बड़े संसदीय क्षेत्र मंडी उप चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर कांग्रेस की प्रतिभा सिंह से 7490 मतों से पराजित हो गए।
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30 अक्तूबर को मंडी संसदीय क्षेत्र के 17 विधानसभा क्षेत्रों में हुए मतदान में 7 लाख 42 हजार 771 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। जिसमें जनादेश कांग्रेस के पक्ष में 49.23 प्रतिशत और भाजपा के पक्ष में 48.05 प्रतिशत रहा। तीसरे नंबर पर नोटा 1.7 प्रतिशत से रहा। शेष चार उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई। सत्ता में रहते हुए किसी पार्टी का प्रत्याशी को उप चुनाव में हार का सामना करना पड़ा हो, ऐसा पहला मौका है। वहीं, उप चुनाव में जीत हार का अंतर भी पहली बार इतना कम रहा है। उप चुनाव में 57 फीसदी से अधिक मतदान होने से सत्तापक्ष का चुनावी गणित गड़बड़ा गया। 2014 के बाद सात साल बाद कांग्रेस ने मंडी संसदीय सीट पर वापसी की है।
उभरे नए सियासी समीकरण
कांग्रेस की इस जीत से मंडी संसदीय क्षेत्र में नए सियासी समीकरण उभरें हैं। यहां पर जहां प्रतिभा सिंह की जीत के बहाने कांग्रेस ने अपना खोया हुआ जनाधार तलाश लिया है। वहीं पर भाजपा के सामने भी यक्ष प्रश्र खड़ा कर दिया है कि मंडी का मुख्यमंत्री मंडी वासियों का दिल जीतने में आखिर कामयाब क्यों नहीं हो पाया। इस बारे अभी से मंथन करने की आवश्यक्ता है अन्यथा 2022 के चुनाव में बदलाव की बयार भाजपा के लिए आधी का रूप धारण न कर ले। बहरहाल उप चुनाव के नतीजे मुख्यमंत्री और भाजपा के लिए वेकअप कॉल साबित होंगे ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए।
चार अन्य प्रत्याशियों को इतने मिले वोट
राष्ट्रीय जन क्रांति दल की अंबिका श्याम को 3570, हिमाचल जन क्रांति दल के मुंशी राम को 1211, आजाद प्रत्याशी अनिल कुमार को 1079, सुभाष मोहन स्नेही को 1743 मत मिले। जबकि 12626 लोगों ने नोटा का बटन दबाया जिसने भाजपा के सियासी समीकरण पुरी तरह से बदल कर दिए। जहां तक मंडी जिला की बात है यहां पर नौ में से आठ में भाजपा ने बढ़त हासिल की है।
मंडी हमारी थी, हमारी है और हमारी रहेगी... के नारे को भी नकारा
राजनीतिक विश्लेषक महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे को भी भाजपा की हार मान रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में चुनावी रण में डटे सीएम की मेहनत भी काम नहीं आई। मंडी वासियों ने मंडी हमारी थी, हमारी है और हमारी रहेगी के नारे को नकारा दिया। खासकर सराज से 21659 की बढ़त तो कुछ हद तक संतोषजनक रही है। लेकिन भाजपा को मुख्य गढ़ों में निराशा हाथ लगी है। पूर्व सांसद रामस्वरूप के गृह क्षेत्र जोगिंद्रनगर में भाजपा को कुछ सम्मानजक 7100 मतों की बढ़त हासिल हुई है। लेकिन सदर, द्रंग, सुंदरनगर, करसोग, सरकाघाट और बल्ह से भाजपा उम्मीदों से कहीं कम बढ़त मिली। मंडी जिला से कांग्रेस को एकमात्र नाचन से 2571 मतों की बढ़त मिली है, जहां से पिछले विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को रिकार्ड जीत मिली है। जिसके चलते भाजपा 2019 का इतिहास दोहराने में नाकाम रही।
कांग्रेस की बढ़त वाले नौ विस क्षेत्र
विधानसभ क्षेत्र भाजपा कांग्रेस अंतर
भरमौर 15893 21150 5257
लाहल स्पिति 5588 7734 2147
मनाली 21251 23092 1841
कुल्लू 21778 25675 3897
बंजार 19713 21591 1878
आनी 20922 27965 7043
रामपुर 11552 31507 19555
किन्नौर 12566 17543 4977
नाचन 24422 26933 2511
भाजपा बढ़त वाले आठ विस क्षेत्र
करसोग 20643 19230 1413
सुंदरनगर 23761 21849 1912
सराज 38394 18735 21659
द्रंग 26352 23731 2621
जोगिंद्रनगर 27993 20849 7144
मंडी 22073 18827 3246
बल्ह 22875 21919 956
सरकाघाट 21109 19260 1849