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Shimla News: दुष्कर्म मामले में भवन मालिक और आरोपी महिला मित्र बरी

Mon, 15 Jun 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jun 2026 11:59 PM IST
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Building owner and accused female friend acquitted in rape case
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक का फैसला
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अभियोजन पक्ष सही उम्र नहीं कर पाया साबित, रिपोर्ट भी निगेटिव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के फास्ट ट्रैक (रेप/पॉक्सो) कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी और उसकी महिला मित्र को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक (रेप/पोक्सो) कोर्ट शिमला विवेक शर्मा की अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष कानूनी रूप से यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। यह मामला मार्च 2020 का है। शिमला जिले की रहने वाली 15 वर्षीय पीड़िता की आरोपी सहेली, आरोपी चरण सिंह के भवन में किरायेदार के रूप में रहती थी। आरोप था कि 2 मार्च 2020 को चरण सिंह ने पीड़िता को अपनी सह-आरोपी महिला के कमरे में बुलाया। महिला आरोपी के बाहर जाते ही नाबालिग के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। बाद में पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई थी कि सह आरोपी महिला ने इस घटना का अपने मोबाइल से वीडियो बनाया और उसे किसी अन्य व्यक्ति को फॉरवर्ड कर दिया। इस आधार पर पुलिस ने आरोपी पर दुष्कर्म और पॉक्सो और सह-आरोपी महिला के खिलाफ आईटी एक्ट और पॉक्सो की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि पॉक्सो एक्ट लागू करने के लिए पीड़िता की उम्र का निर्धारण सबसे पहले उसके स्कूल के रिकॉर्ड से होना चाहिए जहां उसने पहली बार शिक्षा प्राप्त की हो। इस मामले में पेश किया प्रमाण पत्र उस स्कूल का था जहां पीड़िता ने तीसरी कक्षा में दाखिला लिया था, इसलिए कानूनी तौर पर पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम साबित नहीं हो सकी। इसके बाद एसएफएल जुन्गा की रिपोर्ट के अनुसार डीएनए रिपोर्ट भी निगेटिव पाई गई जिससे अभियोजन पक्ष के दावे को बेहद कमजोर पाया गया। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। है।
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