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सरिता के तरानों का हर कोई हुआ कायल

Wed, 26 Nov 2014 01:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिलाई, नौहराधार (सिरमौर)
ब्यूरो/अमर उजाला, शिलाई, नौहराधार (सिरमौर) Updated Wed, 26 Nov 2014 01:18 PM IST
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budhi diwali celebration in sirmour.

क्षेत्र की कांडो भटनोल पंचायत के गांव भटनोल में सोमवार को बूढ़ी दिवाली  समारोह का समापन हो गया। इस मौके पर स्टार नाइट का आयोजन हुआ। जिसमें में ठाकुर स्पोर्ट्स एंड कल्चरल क्लब की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए गए। भटनोल में बूढ़ी दिवाली के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। शाम को सरिता बुशहरी, मदन झाल्टा, भूपेंद्र भोपाली ने लोगों का मनोरंजन किया।

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सरिता बुशहरी ने... तंवे त लाया मेरी बांठिणी गीत गाकर मनोरंजन किया। इसके बाद.. मानी जा मेरा कहणा..., मुजरे लाणे काछू रे मुडवाणों री जयंती रे.., कालावाशा कौआ तेरे आंगने तथा इक अधिया मांगाई जा रे नि मेरा नाचणी ख..जैसे गीत गा कर दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके अलावा राजगढ़ की ममता तथा सोलन की काजोल तथा सुन्नी ज्योति ने भी दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
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समापन समारोह के मुख्य अतिथि स्थानीय विधायक बलदेव तोमर ने उपस्थित लोगों को पर्व की शुभकामनाएं दी। भाजपा मंडल चौपाल के सचिव श्याम सिंह पवांर विशेष अतिथि रहे। बलदेव तोमर ने गांव भटनोल गांव में गली निर्माण के लिए एक लाख रुपये देने की घोषणा की। जबकि महिला मंडल भटनोल को विधायक निधि से टाट पट्टी, दरी एवं फर्नीचर के लिए 11 हजार रुपये देने की घोषणा की।
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इसके अलावा विधायक  ने ठाकुर स्पोर्ट्स एंड कल्चरल क्लब को ऐच्छिक निधि से 11 हजार की राशि प्रदान करने की घोषणा की। दूसरी ओर विशेष अतिथि चौपाल भाजपा के सचिव श्याम सिंह पंवार ने ऐच्छिक निधि से क्लब को 15 हजार रुपये देने की घोषणा।

राजाणा में बूढ़ी दिवाली पर बढ़ेचू नृत्य में झूमे ग्रामीण

प्रदेश में मनाए जाने वाले त्यौहारों एवं लोकगीतों में राज्य की संस्कृति के साक्षात दर्शन होते हैं। इस पुरातन संस्कृति को संजोए रखने के साथ इसका संरक्षण करना भी प्रदेश के हर व्यक्ति का नैतिक दायित्व बनता है। यह बात मुख्य संसदीय सचिव विनय कुमार ने सोमवार रात संगड़ाह के पास गांव रजाणा में दो दिवसीय बूढ़ी दिवाली के समापन समारोह में मौजूद जन समूह को संबोधित करते हुए कही।

कहा कि सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में पुरातन संस्कृति बदलते परिवेश के बावजूद भी समृद्ध है। इसके संरक्षण की नितांत जरूरत है। रजाणा गांव के सामाजिक कार्यकर्ता कुशल सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि रजाणा गांव में सदियों से बूढ़ी दिवाली का पर्व मनाया जाता है। बढ़ेचू नृत्य इसका विशेष आकर्षण है। इस अवसर पर स्थानीय युवाओं ने राजा हरिशचंद्र नाटक का मंचन किया।


सीपीएस ने कहा कि रजाणा गांव ने जैविक खेती के लिए जिला में अपनी अलग पहचान बनाई है। बताया कि रजाणा एवं काकोग पंचायत के लिए 6.6 करोड़ रुपये की उठाऊ सिंचाई योजना स्वीकृत करके डीपीआर तैयार की है। इसके बनने से इस क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।

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