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DalaiLama: दलाईलामा बोले- सत्य को समझने के लिए संदेह करना भी जरूरी

Fri, 16 Sep 2022 08:14 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 16 Sep 2022 08:14 PM IST
सार

दुनिया में बढ़ रहे तनाव को लेकर पूछे सवाल के उत्तर में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने बताया कि हमें अपने दृष्टिकोण को विकसित करते हुए समझना चाहिए कि जीवन में सुख और दुख दोनों साथ चलते हैं।

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Buddhist spiritual guru Dalai Lama statement on truth
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सत्य को समझने के लिए संदेह करना भी आवश्यक है। संदेह उत्पन्न होने के बाद धीरे-धीरे तर्क-वितर्क और प्रमाण की ओर बढ़ा जा सकता है। इसी से निरुद्ध सत्य यानी बुद्धत्व की प्राप्ति होगी। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने मैक्लोडगंज में मुख्य बौद्ध मंदिर में आचार्य चंद्रकीर्ति की रचना माध्यमिकावतार विषय पर प्रवचन के दौरान यह बात कही।

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दुनिया में बढ़ रहे तनाव को लेकर पूछे सवाल के उत्तर में उन्होंने बताया कि हमें अपने दृष्टिकोण को विकसित करते हुए समझना चाहिए कि जीवन में सुख और दुख दोनों साथ चलते हैं। तनाव जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए खुले विचार के साथ व्यक्तिगत सुख-दुख के बजाय सारी दुनिया के सुख-दुख के बारे में सोचना चाहिए। इससे अपना दुख कम महसूस होगा और तनाव से भी बहुत हद तक बचा जा सकता है। 
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धर्मगुरु ने बताया कि केवल तथागत बुद्ध की प्रार्थना करने से हमारी इच्छाएं पूरी नहीं होंगी। सभी प्राणियों का एक ही उद्देश्य है कि उन्हें दुख के बजाय सुख की प्राप्ति हो। इनसान के अलावा पशुओं में भी यह सहज प्रवृत्ति रही है। दुखों को दूर करने के लिए सबसे पहले उनके कारण को समझना होगा। संसार में सुख परोपकार की भावना और दुख स्वार्थ की प्रवृत्ति से पैदा होता है। 
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गुरु की दीर्घायु के लिए पूछे सवाल पर उन्होंने बताया कि गुरु के लिए शब्दों या पाठ से दीर्घायु की प्रार्थना की जाती है। उससे कुछ हद तक तो लाभ हो सकता है। मगर शिष्य जब गुरु के बताए ज्ञान को जीवन में उतारता है, तो उससे गुरु का भी लाभ होता है। गुरु के द्वारा शिष्य को दिए गए उपदेश का यदि सही ढंग से पालन किया जाए, तो उससे गुरु की दीर्घायु होगी। गुरु जो मर्जी कहते रहें और आप उसका पालन ही न करें, तो दीर्घायु कामना का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।

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