सेना को बॉर्डर तक पहुंचने के लिए इस बार करना होगा इंतजार, ये है वजह
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चीन से सटे लद्दाख क्षेत्र तक पहुंचने के लिए इस बार सेना की कानवाई को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। कारगिल और लद्दाख तक पहुंचने के लिए भारतीय सेना का सबसे सुरक्षित मनाली-लेह सामरिक मार्ग इस बार अप्रैल माह में नहीं खुल पाएगा।
भारी बर्फबारी के कारण इस बार करीब एक माह देरी से मनाली-लेह मार्ग पर बर्फ हटाने का अभियान शुरू हुआ है। अमूमन हर साल 1 मार्च से इस मार्ग पर सीमा सड़क संगठन मिशन स्नो क्लीयरेंस का आगाज करता आया है,
लेकिन इस बार 23 मार्च को आधिकारिक तौर पर मनाली-लेह मार्ग से बर्फ हटाने का अभियान छेड़ा गया है। बीते साल 6 अप्रैल को रोहतांग दर्रा वाहनों की आवाजाही के लिए खुल गया था।
लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए आशंका जाहिर की जा रही है कि इस बार मनाली-लेह मार्ग मई माह में ही बहाल हो पाएगा। ऐसे में सेना के साथ ही सैलानियों को लद्दाख पहुंचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। बर्फ हटाने की सुस्त रफ्तार को लेकर मौजूदा और पूर्व विधायक दोनों ही संगठन के उच्च अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं।
महामहिम दलाईलामा का दौरा हो सकता है प्रभावित
बीआरओ का दावा है कि इस बार रोहतांग समेत घाटी में रिकॉर्ड बर्फबारी होने से इस स्तर पर कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बॉर्डर रोड दीपक प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता मोहन लाल के अनुसार मौसम अनुकूल होते ही मनाली-सरचू सड़क मार्ग को बहाल
करने के लिए संगठन ने मशीनरी उतार दी है। मनाली से सरचू के बीच कई स्थानों पर हिमखंड खिसकने से 40 से 50 फुट तक ऊंची बर्फ की दीवारें खड़ी हो गई हैं। इस सामरिक मार्ग को जल्द बहाल करने की कोशिश की जा रही है।
मई माह में बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा का 7 दिवसीय लाहौल स्पीति का दौरा प्रस्तावित है। मई माह तक रोहतांग दर्रा बहाल नहीं होने की सूरत में उनका यह दौरा भी प्रभावित हो सकता है।
विधायक रवि ठाकुर ने कहा कि इस धार्मिक कार्यक्रम में देश विदेश के हजारों सैलानी घाटी में आने वाले हैं। ऐसे में इसका सीधा असर लाहौल स्पीति के पर्यटन कारोबार पर भी पड़ेगा।