ड्रेस कोड में न होने पर ओमपुरी को अंदर जाने से रोका
मशहूर अभिनेता और पद्मश्री ओमपुरी को ड्रेस कोड की वजह से सिक्योरिटी गार्ड ने सोलन के ऐतिहासिक कसौली क्लब में अंदर जाने से रोक दिया। गार्ड का कहना था कि यहां अंग्रेजों के जमाने का रूल चलता है। अंदर वही जा सकता है जिसने चमडे़ के काले जूते पहने हो। शर्ट पेंट के अंदर हो और बेल्ट कसी हो। बिंदास ओमपुरी सकते में आ गए।
वे कुछ देर ठहरकर अपने चित परिचित अंदाज में पंजाबी में बोले.....अपां ता फक्क्ड़ ही रहे हां। पूरी उम्र इस तरह ही कट छड्डी। हुण अंग्रजा दी गल्ल मनदे हां। मेरे कोल वॉकिंग शूज हैं। सरदार साहब (दरबान) चल्लणगे। नहीं तां बाजार तों खरीद लैंदे हां। यह कहकर ओमपुरी आंखों में अचरज लिए अपने होटल की तरफ लौट गए। बाद में कपड़े बदल और जूते पहनकर लिट फेस्ट में पहुंचे
तुसी शान हो सिनेमा दी, मेरे जूते लै लो
मौका था सदी के महान लेखक खुशवंत सिंह की प्लेटिनम जुबली पर लिटफेस्ट के शुभारंभ का। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे अचानक क्लब के गेट के बाहर एक सफेद रंग की इनोवा आकर रुकी। इसमें से लिटफेस्ट के मुख्य मेहमान और भारत के चौथे सबसे बडे़ नागरिक अवार्ड पद्मश्री से सम्मानित ओमपुरी उतरे। वे ब्लू और सफेद चेकदार कमीज, ग्रे पेंट और पैरों में चप्पल पहने थे। उनकी कमीज बाहर निकली हुई थी।
जैसे ही वे क्लब के गेट के अंदर दाखिल हुए उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि क्लब के रूल के हिसाब से आपका ड्रेस कोड नहीं है। इस वक्त आयोजक भी वहां नहीं थे। ओमपुरी को होटल लौटना पड़ा। इस बात का गेट के बाहर खड़े सरदार किशी सिंह को बुरा लगा। उन्होंने ओमपुरी से कहा कि तुसी भारतीय सिनेमा की शान हो। आप मेरे जूते लै लो। यह कहते ही ओमपुरी ने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा कि दारजी मेरे कोल जूते हैगे। अपां पा के आने आं।
आजाद भारत में अंग्रेजों के रूल
कसौली क्लब का गठन 1880 में हुआ था। यह भारत के चुनिंदा क्लबों में से एक है। इसकी मेंबरशिप के लिए 15 सालों तक इंतजार करना पड़ता है। ब्रिगेडियर रैंक के अफसर इसके चेयरमैन होते हैं। क्लब के गठन के समय से ही अंग्रेजों ने यहां बिना ड्रेस कोड के एंट्री पर रोक लगाई हुई है जो आज भी जारी है। क्लब की वेबसाइट में बाकायदा इसका जिक्र है।
अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों से आजाद होने और सांप्रदायिक तनाव को रुपहले पर्दे पर तमस जैसे धारावाहिक में अमिट छाप छोड़ने वाले अभिनेता ओमपुरी को आज अंग्रेजों के जमाने के ड्रेस कोड का शिकार होना पड़ा है। खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह का कहना है की ड्रेस कोड सबके लिए लागू है। कुछेक मेहमानों को रोका है। नियम सबके लिए है।
अंग्रेजों के रूल बदले कसौली क्लब: कबीर
हिमाचल तो मेहमाननवाजी के लिए मशहूर है, लेकिन कसौली क्लब को ड्रेस कोड का रूल जरूर बदलना चाहिए। करीब डेढ़ बजे खुशवंत सिंह के लिटफेस्ट में बतौर मेहमान पहुंचे कबीर बेदी का स्वागत करने पहुंचे कर्नल देवेंद्र सिंह से उन्होंने इस तरह की शिकायत की। हुआ यूं की चाइनीज कॉलर की शर्ट पहनकर लिटफेस्ट में हिस्सा लेने पहुंचे इस अभिनेता को भी ड्रेस कोड के चलते रोक दिया गया। कहा गया कि फुल कॉलर शर्ट पहनो, तभी एंट्री मिलेगी।
कबीर बेदी ने बताया कि इस तरह के नियमों का बदलाव जरूरी है। अंग्रेजों को भारत छोड़े काफी समय हो गया है, फिर ये नियम क्यों। कहा कि खुशंवत सिंह के लिटफेस्ट में आना उनके लिए गर्व की बात है, लेकिन उन्हें गेट पर रोका जाना दुखद। कहा कि खुशंवत सिंह सादगी के कायल थे और उनकी याद में मनाए जा रहे समारोह में कपड़ों को लेकर इस तरह से रोका जाना मायूसी से कम नहीं।