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इतनी बड़ी लापरवाही कि चली गई 'बेजुबान' की जान

Sun, 19 Apr 2015 09:13 PM IST
Updated Sun, 19 Apr 2015 09:13 PM IST
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blue ship died due to negligency at chamba.

वन विभाग की लापरवाही से अति दुर्लभ प्रजाति की घोरल (ब्लू शीप) की जान चली गई। थोड़ी देर पहले विभाग के कर्मचारियों ने ही इसे शिकारी कुत्तों से बचाकर नई जिंदगी दी थी। मगर फिर बड़ी लापरवाही बरत ली। घटना हिमाचल के चंबा की है।

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जानकारी के अनुसार रविवार सुबह वन विभाग को सूचना मिली कि बालू क्षेत्र में इस घोरल के पीछे कुछ कुत्ते पड़े हैं। विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और उसे सुरक्षित बचा लिया। मामूली खरोंचें होने पर उसका चिकित्सालय में उपचार किया।
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पिंजरे में डालकर उसे बन्नू फाट के पास रावी के किनारे छोड़ दिया। मगर इसके बाद इसकी जान चली गई।

बरती बड़ी लापरवाही

blue ship died due to negligency at chamba.

जैसे ही घोरल पिंजरे से बाहर निकली वह बचने और डर के कारण रावी नदी में घुस गई और तेज बहाव में एक किलोमीटर दूरी तक बह गई। उसे मरा हुआ पाया गया। पोस्टमार्टम और उपचार करने वाले पशु चिकित्सक डॉ. चमन सिंह ने घोरल की दम घुटने से मरने की पुष्टि की है।

उन्होंने बताया कि घोरल के फेफड़ों में पानी भर गया था जिससे साफ पता चल रहा है कि रावी में गिरने से पूर्व तक जिंदा थी और सांस लेने के दौरान ही पानी उसके फेफड़ों तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान उसमें ऐसे कोई लक्षण नहीं थे जिससे उसकी मौत हो सकती थी। घोरल रावी के तट पर कैसे पहुंची, इसकी जांच होनी चाहिए।

वन रेंज अधिकारी वकील भारद्वाज का कहना है कि उपचार के बाद घोरल ठीक लग रही थी, जिस वजह से उसे छोड़ा गया था। उसकी पानी में गिरने और बह जाने से मौत हुई है। पोस्टमार्टम करवाया गया है।

3000 मीटर की ऊंचाई पर पाई जाती है घोरल

blue ship died due to negligency at chamba.

अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उसे जंगल में छोड़ने की बजाए नदी किनारे ही क्यों छोड़ा गया। इस लापरवाही से अब अफसर भी पल्ला झाड़ रहे हैं। यदि उसे जंगल में छोड़ा जाता तो वह सुरक्षित रहती।

घोरल (जंगली बकरी) समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई पर मिलती है। अक्सर पानी की तलाश में यह जानवर निचले इलाकों का रुख करता है। यह प्रजाति शेड्यूल वन का प्राणी है, जोकि अति दुर्लभ प्रजाति है। ट्रांस हिमालय में घोरल पाई जाती है। हिमाचल के स्पीति में इनकी संख्या सबसे अधिक है। इनकी कुल संख्या 600 के आसपास है।

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