दृष्टि बाधित शिक्षक को भी नहीं छोड़ा, लगा दी चुनाव में ड्यूटी
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पंचायत चुनावों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार जिला प्रशासन ने एक ऐसे शिक्षक को चुनाव ड्यूटी में लगा दिया जो 100 फीसदी दृष्टि बाधित है। शिमला के छोटा शिमला के सरकारी स्कूल में तैनात इस शिक्षक को भी चुनाव में ड्यूटी पर मौजूद रहने के फरमान जारी कर दिए गए हैं।
यही नहीं शिक्षक को 11 दिसंबर को ट्रेनिंग के लिए मशोबरा भी बुलाया गया है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि भला ये शिक्षक चुनाव में क्या ड्यूटी कर पाएगा। इससे न सिर्फ शिक्षक को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा बल्कि प्रशासन के तैनाती संबंधी प्रबंधों पर भी सवाल उठ गए हैं।
राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष विरेंद्र चौहान ने चुनाव ड्यूटी लगाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयुक्त को बताया कि छोटा शिमला स्कूल में कार्यरत सौ प्रतिशत दृष्टि बाधित शिक्षक को भी एआरओ नियुक्त कर दिया है। चुनाव आयुक्त टीजी नेगी ने शिक्षक संघ को उनकी आपत्तियों को जल्द दूर करने का आश्वासन दिया है। 50 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों की ड्यूटियां न लगें।
शिक्षकों ने जताया ऐतराज
पंचायत चुनाव में ड्यूटियां लगाने पर शिक्षक संघ भड़क गया है। मशोबरा ब्लाक की 48 पंचायतों में 92 शिक्षकों को एआरओ लगाने पर राजकीय अध्यापक संघ ने एतराज जताया है। बुधवार को संघ के प्रदेश अध्यक्ष विरेंद्र चौहान की अगुवाई में चुनाव आयुक्त टीजी नेगी से सचिवालय में मिले शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने अपना विरोध जताया।
विरेंद्र चौहान ने कहा कि पंचायतीराज चुनावों में शिक्षकों की शत प्रतिशत ड्यूटियां लगा दी गई हैं। जबकि चुनाव आयोग ने पचास प्रतिशत से अधिक शिक्षकों को ड्यूटी में लगाने से इंकार किया है। चौहान ने मशोबरा ब्लॉक का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां 48 पंचायतों में 92 एआरओ शिक्षक ही लगा दिए हैं। सभी शिक्षक स्कूल प्रवक्ता हैं। प्रदेश के अधिकांश ब्लाकों में इसी तरह की स्थिति है।
जिला प्रशासन 90 से 95 प्रतिशत तक चुनाव ड्यूटी पर शिक्षकों को ही लगा रहे हैं। इससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होगी। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री ने बीते दिनों शिक्षकों की चुनाव के दौरान सभी विभागों के कर्मचारियों के तय होने के बाद ड्यूटियां लगाने को कहा था। अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा ने कम परीक्षा परिणाम आने पर शिक्षकों की इंक्रीमेंट रोकने की बात कही थी।
बावजूद शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी में लगाया जा रहा है। 11 दिसंबर से लेकर 10 जनवरी तक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो जाएगी। विरेंद्र चौहान ने शीतकालीन छुट्टियों के दौरान दी जाने वाली चुनाव ड्यूटी की जगह विशेष अर्जित अवकाश देने की मांग भी की।