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शिमला: डीसी दफ्तर के पास दबोचा ‘ब्लैकमेलर’ बंदर, पढ़ें पूरा मामला

Tue, 30 Mar 2021 11:37 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 30 Mar 2021 11:37 AM IST
सार

  •  शातिर बंदर सैलानियों और स्थानीय लोगों के चश्मे छीनकर ले जाता था
  • बंदर उपायुक्त कार्यालय के पास जमाए हुए था डेरा 
  • लोगों के कंधे पर चढ़ जाता और चश्मा उतारकर भाग जाता

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Blackmailer monkey Caught near DC office shimla
शिमला में ‘ब्लैकमेलर’ बंदर पकड़ा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव विंग ने एक ऐसे बंदर को पकड़ा है, जो आए दिन लोगों को ‘ब्लैकमेल’ करता था। यह बात अटपटी लगेगी, लेकिन सच है। शातिर बंदर आए दिन सैलानियों और स्थानीय लोगों के चश्मे छीनकर ले जाता था। जब कोई उसे खाने-पीने का सामान देता था, तभी लौटाता था। खैर, अब इस उत्पाती बंदर को विभाग ने पकड़ लिया है। इससे लोगों को राहत मिलेगी। यह बंदर उपायुक्त कार्यालय के पास डेरा जमाए हुए था। यहां से गुजरने वाले लोगों के कंधे पर चढ़ जाता और चश्मा उतारकर भाग जाता।जब तक इसे खाने-पीने की चीजें न दी जातीं, यह तब तक चश्मा नहीं छोड़ता था।

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लोगों ने वन्य जीव विभाग को इसकी शिकायत की। रेंज अफसर प्रमोद गुप्ता की अगुवाई वाली टीम जब मौके पर पहुंची तो इस बंदर को पकड़ने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। कई घंटे तक कर्मचारी इसे आइसक्रीम से लेकर नमकीन, बिस्किट तक के पैकेट खाने के लिए देते रहे, लेकिन यह छत से नहीं उतरा। अंत में विभाग ने ट्रैंक्यूलाइजर गन से इसे बेहोश कर पकड़ा। अब इसे टूटीकंडी स्थित चिड़ियाघर में रखा है। नसबंदी और कुछ दिन निगरानी के बाद इसे वापस छोड़ा जाएगा। वन्यजीव विभाग के डीएफओ कृष्ण कुमार ने बताया कि लोगों की शिकायत पर इसे पकड़ा है। वन्यजीव विभाग का मानना है कि यह बंदर जाखू मंदिर क्षेत्र से यहां पहुंचा था।
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बता दें राजधानी शिमला के नटखट बंदर हरपस बी वायरस से मुक्त हैं। रेससमकैक प्रजाति के ये बंदर भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहना पसंद करते हैं। ये बंदर ज्यादातर पर्यटकों के मुंह पर भी हमले करते हैं और चश्मे तक निकाल लेते हैं। हर साल आईजीएमसी में करीब 6 सौ मामले बंदरों के काटने के आते हैं। इनमें 35 फीसदी पर्यटक शामिल होते हैं। इसके अलावा हर साल करीब 1326 लोग बंदरों के काटने के बाद शिमला के अस्पतालों में इलाज करवाने आते हैं। यानी रोजाना 3 से ज्यादा लोग इलाज कराते हैं। आईजीएमसी और मेडिकल कॉलेज नाहन के डाक्टरों के संयुक्त शोध में यह खुलासा हुआ है।

  


 

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