इस धंधे की आड़ में चल रहा था काले धन को सफेद करने का खेल
- मनी लॉन्ड्रिंग की इनक्वायरी पूरी, ईडी दर्ज करेगा एफआईआर
- प्रवर्तन निदेशालय को प्रारंभिक इनक्वायरी में मिले कई सुराग
- प्लांट के ठेकेदार और अफसरों पर केस दर्ज करने की तैयारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी शिमला में पीलिया फैलने की वजह बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग के कुछ सुराग मिले हैं। प्रारंभिक इनक्वायरी में प्रवर्तन निदेशालय को इन प्लांटों में काले धन के कुछ सबूत हाथ लगे हैं। तथ्य मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ट्रीटमेंट प्लांट ठेकेदार और अफसरों के खिलाफ केस दर्ज करने की तैयारी में है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए शिमला में पीलिया फैलने पर पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर को आधार बनाया है।
ईडी के शिमला स्थित सब जोनल कार्यालय ने इसी साल फरवरी में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के चलते राजधानी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की इनक्वायरी शुरू की थी। इसके लिए पुलिस से एफआईआर की प्रति भी मांगी थी। ईडी के अधिकारियों ने एफआईआर की गहन जांच की। सूत्रों के अनुसार इस संबंध में ईडी ने कुछ लोगों से पूछताछ भी की है। इसमें पता चला है कि ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का इस्तेमाल किया गया।
इसमें अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत के भी कुछ सुराग मिले हैं। मनी लॉन्ड्रिंग की एफआईआर दर्ज करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय जल्द प्लांट ठेकेदार और आईपीएच विभाग के अफसरों को पूछताछ के लिए बुला सकता है। संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है। ठेकेदार और आईपीएच अधिकारियों के अलावा इस मामले में संलिप्त अन्य लोगों पर भी केस चलाया जा सकता है।
बैंक खातों से मिले ईडी को अहम सुराग
शिमला शहर में पीलिया फैलने को जिम्मेवार मल्याणा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर शिमला पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। दूषित पानी के लिए जिम्मेवार ठेकेदार समेत कई अधिकारियों की भी गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक जिस ठेकेदार के पास पांच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट रहे हैं, उसे इनके संचालन के लिए आईपीएच विभाग की ओर से सालाना 1.35 करोड़ रुपये दिए जाते थे।
मगर प्लांटों पर इतना पैसा खर्च नहीं किया गया। जो बिल पेश किए गए हैं, वे भी फर्जी पाए गए हैं। सरकार से मिलने वाली कुल राशि में से एक करोड़ रुपये की सालाना बचत की गई। लगभग एक चौथाई पैसा ही खर्च किया जाता रहा है। सूत्रों की मानें तो ईडी को ठेकेदार एवं कुछ अन्य लोगों के बैंक खातों के साथ कनेक्शन के सुराग मिले हैं। इसी को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का आधार बनाया जा रहा है।
पीलिया पर शिमला पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर का परीक्षण किया गया है। ईडी की प्रारंभिक इनक्वायरी भी पूरी हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय जल्द ही इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करने जा रहा है। -भूपिंद्र सिंह नेगी, सहायक निदेशक, सब जोनल कार्यालय, प्रवर्तन निदेशालय, शिमला