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हिमाचल विधानसभा: CM वीरभद्र चार्जशीट पर सदन में हंगामा, वॉकआउट

Wed, 24 Aug 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 24 Aug 2016 12:01 AM IST
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BJP Walkout On CM Virbhadra Singh CBI Case at Himachal Vidhansabha.
मुख्यमंत्री वक्तव्य दे रहे थे कि भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए वाकआट कर गए। - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को प्रश्नकाल के बाद खूब हंगामा हुआ। आय से अधिक संपत्ति मामले में सीएम वीरभद्र सिंह के खिलाफ सीबीआई की ओर से चार्जशीट तैयार करने पर भाजपा विधायक महेश्वर सिंह की ओर से चर्चा की मांग के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक हुई।

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महेश्वर सिंह ने ‘अमर उजाला’ में छपी खबर को लहराते हुए चर्चा मांगी थी। इस पर मुख्यमंत्री वक्तव्य दे रहे थे कि भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए वाकआट कर गए। थोड़ी देर बाद उनके वापस आने पर फिर हंगामा शुरू हो गया। इसी बीच भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि ने मेज थपथपाया तो माइक टूट गया।
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इस पर स्पीकर बुटेल ने चेतावनी दी कि ये सदन की अवमानना है। ऐसा करना गलत है। मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हुई सदन की कार्यवाही में एक घंटे तक प्रश्नकाल निर्बाध तरीके से चला। इसके  समाप्त होते ही हाल ही में भाजपा में शामिल हुए महेश्वर सिंह अपनी सीट पर अचानक खड़े हो गए। स्पीकर ने उन्हें बैठने को कहा।
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सत्ता पक्ष और विपक्ष की नजरें महेश्वर सिंह पर थीं। महेश्वर सिंह ने अखबार में छपी एक खबर को दिखाते हुए कहा कि नई दिल्ली में सीबीआई ने सीएम वीरभद्र सिंह के खिलाफ चार्जशीट तैयार की है। यह बहुत ही गंभीर मामला है। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री मुकेश लगातार हस्तक्षेप करते रहे कि इस तरह की चर्चा सदन में सही नहीं है।

सीएम ने कहा उन पर दो बार हुए केस, दोनों बार बरी

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी कहा कि धूमल की दो बार सरकार थी तो उनके खिलाफ पहले भी दो मुकदमे बनाए गए। वे कोर्ट से दोनों बार बरी हुए। ये मामला भी राजनीति से प्रेरित है। वीरभद्र के वक्तव्य के बीच विपक्ष के सदस्य सदन से वाकआउट कर गए। सीएम अपनी बात कहते रहे।

लगभग सवा 12 बजे भाजपा विधायक सदन में लौट आए। वे सीएम के वक्तव्य के बीच नारेबाजी करते रहे। इसी बीच मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायकों को बाहर जाने के लिए इशारा किया तो वे भड़क उठे। पहले तो वे स्पीकर की चेयर के पास जाकर नारेबाजी करते रहे।

फिर सीएम वीरभद्र सिंह की सीट के पास वेल तक नारेबाजी करते हुए पहुंच गए। सदन की कार्यवाही शोरशराबे के बीच चलती रही। सदन के पटल पर कागजात रखने के अलावा युग गुप्ता मामले की जानकारी भी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शोर-शराबे के बीच ही दी।

धर्मपुर के भाजपा विधायक महेंद्र सिंह ने फोरलेन के मुआवजे पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाना था। शोर-शराबे के बीच ये भी नहीं लाया जा सका। इसके बाद लगभग साढ़े 12 बजे सदन की कार्यवाही बुधवार 11 बजे के लिए स्थगित कर दी गई।

नशे पर और सख्त बनेगा कानून, जानवरों के हमले पर ज्यादा मुआवजे की तैयारी

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल में मादक पदार्थों की तस्करी गंभीर समस्या है। - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल में मादक पदार्थों की तस्करी गंभीर समस्या है। इससे निपटने को सरकार नियमों में संशोधन कर सख्त कानून बनाएगी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ‌हिमाचल विधानसभा में भाजपा विधायक रविंद्र रवि के प्रश्न के उत्तर में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि भांग उखड़ाने और नशे पर रोकथाम को सरकार हिमाचल में अभियान छेड़े हुए है। प्रदेश में भांग को नष्ट करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है। इसे सफल बनाने के लिए सत्ता पक्ष, विपक्ष और जनता को एकजुट होकर होने की जरूरत है। जब तक भांग की खेती नष्ट नहीं होती, तब तक मुहिम जारी रहेगी।

मल्याणा में भांग की जगह उगाए जाएंगी सब्जियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि मल्याणा और अन्य क्षेत्रों में भांग नष्ट कर लोगों को आजीविका कमाने के लिए फल, सब्जियां और फूल उगाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। विधायक रविंद्र रवि ने मामला उठाया था कि बॉर्डर एरिया में मादक द्रव्यों की तस्करी बढ़ रही है।

बॉर्डर एरिया में चिट्टा, भुक्की सहित अन्य मादक पदार्थ बिक रहे है। स्कूलों, मंदिरों और पर्यटक स्थलों के आसपास भी पुलिस को चौकसी बरतने की आवश्यकता है। विधायक महेश्वर सिंह ने कहा कि सरकार केवल 5 जिलों में भांग की खेती उखाड़ रही है। यह सड़कों के किनारों से लेकर थानों के आसपास सरकारी जंगलों में भी उगी हुई है।

जानवरों के नुकसान का मुआवजा बढ़ा सकती है सरकार

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वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश सरकार जंगली जानवरों के हमले से घायल को मिलने वाले मुआवजे की राशि बढ़ा सकती है। वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने सदन में इसको रिव्यू करने की बात कही। कहा कि सरकार राज्य में सभी प्रकार के जानवरों के काटने या घायल करने पर मुआवजा देती है।

हिमाचल में 1 अगस्त 2015 से 7 नवंबर 2015 के दौरान 8 हजार 883 लोग जंगली जानवरों, आवारा पशुओं और कुत्तों के हमलों से चोटिल हुए, जबकि चार लोगों की मौत हुई। वन मंत्री ने यह जानकारी विधायक महेश्वर सिंह के प्रश्न के उत्तर में दी।

कहा कि 1 अगस्त 2015 से 7 नवंबर 2015 के दौरान जंगली जानवरों, आवारा पशुओं और कुत्तों के हमलों के 67 मामले वन विभाग में दर्ज किए गए। इनमें 2 लोगों की मृत्यु हुई। 14 गंभीर और 51 साधारण रूप से घायल हुए हैं। स्वास्थ्य एवं अन्य विभागों में 8816 मामले दर्ज किए गए।

2 लोगों की मौत हुई है तथा 18 लोग गंभीर रूप से घायल और 8796 लोग साधारण रूप से घायल हुए। वन विभाग में दर्ज मामलों में जंगली जानवरों की ओर से घायलों तथा मृतकों के आश्रितों को 13 लाख 27 हजार 266 रुपये की राहत राशि दी गई।

विधायक महेश्वर सिंह ने कहा था कि राजस्व विभाग आपदा के समय मरने पर 4 लाख की राहत राशि देता है। जंगली जानवरों के हमले से मरने पर वन विभाग एक लाख से डेढ़ लाख तक की राशि प्रदान करता है। उन्होंने इस विसंगति को दूर करने की मांग की। विधायक रविंद्र सिंह रवि ने भी अनुपूरक सवाल पूछा।

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