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कंडक्टर भर्ती मामला: जांच में बड़ा खुलासा, इतने लोगों को बिना इंटरव्यू ही दे दी नौकरी

Thu, 13 Jun 2019 10:58 AM IST
Krishan Singh चैतन्य ठाकुर, अमर उजाला, शिमला
चैतन्य ठाकुर, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 13 Jun 2019 10:58 AM IST
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Big disclosure during investigation in Conductor recruitment case

हिमाचल में 2003 की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान हुए बहुचर्चित कंडक्टर भर्ती मामले में 23 ऐसे अभ्यर्थियों को नौकरी दे दी गई जो इंटरव्यू देने आए ही नहीं थे। साक्षात्कार में इन अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यताओं के नंबर जोड़ दिए गए।

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इंटरव्यू कमेटी के चेयरमैन ने पंद्रह दिन बाद अन्य सदस्यों से हस्ताक्षर करवाए। एसआईटी की जांच में यह खुलासा हुआ है। धर्मशाला मंडल में कंडक्टर भर्ती में यह गड़बड़झाला सामने आया है।
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धर्मशाला डिविजन में भर्ती के लिए इंटरव्यू कमेटी के चेयरमैन वर्तमान में एचआरटीसी में बड़े ओहदे पर हैं। जांच में पता चला है कि चेयरमैन ने इंटरव्यू के करीब पंद्रह दिन  बाद पैनल में अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर करवाए थे।
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इस आधार पर अब एसआईटी अदालत से कमेटी के चेयरमैन को हिरासत में लेने की मांग रही है। एसआईटी का मानना है कि आरोपी मामले को इधर से उधर घुमा रहे हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे। 

यह है मामला 

Big disclosure during investigation in Conductor recruitment case

24 अक्तूबर, 2003 को परिवहन निगम के निदेशक मंडल की बैठक में कंडक्टरों के 300 पद भरने को मंजूरी दी गई। इनमें सामान्य वर्ग के 166, ओबीसी के 54, एससी के 66 और एसटी के 14 पद भरने थे।

इसके लिए 17 हजार 890 आवेदन आए। 20 सितंबर, 2004 को 300 की जगह 365 पद भरे गए। 12 मई, 2005 को 13 और पद भर दिए। यही नहीं, अकेले धर्मशाला डिवीजन से ही करीब 147 कंडक्टर चयनित हुए।

इनमें भी तत्कालीन परिवहन मंत्री के विधानसभा क्षेत्र नगरोटा बगवां से 73 और रोहड़ू से 35 लोग चयन सूची में थे। डिवीजन स्तर पर मेरिट भी नहीं बनी। भर्ती दस्तावेजों में कटिंग और ओवर राइटिंग थी।

इससे भर्ती विवादों में आ गई। कोर्ट के आदेश पर शिमला पुलिस ने 14 मार्च, 2017 को तत्कालीन एमडी, डीएम समेत पांच लोगों को आरोपी बनाकर सदर थाने में एफआईआर दर्ज की। इसके बाद एसआईटी का गठन हुआ।


मामले की चार्जशीट तैयार की जा रही है। अदालत से इंटरव्यू कमेटी के चेयरमैन को हिरासत में लेने का आग्रह किया जा रहा है। एसआईटी हर पहलू पर तफ्तीश कर रही है। - दिनेश शर्मा, डीएसपी सिटी शिमला

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