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एचपीयू ईसी का बड़ा फैसला: नई शिक्षा नीति लागू होने के चलते एमफिल कोर्स बंद
Mon, 21 Feb 2022 08:16 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 21 Feb 2022 08:16 PM IST
सार
प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद की सोमवार को कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमे विवि ने लागू नई शिक्षा नीति में शैक्षणिक सत्र 2021-22 से एमफिल कोर्स को बंद करने की स्वीकृति प्रदान की ।
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एचपीयू ईसी की बैठक।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में विद्यार्थी अब एमफिल नहीं कर सकेंगे। कुलपति की अध्यक्षता में हुई ईसी की बैठक में इस पर मुहर लग गई है। कार्यकारिणी परिषद की सोमवार को कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमे विवि ने लागू नई शिक्षा नीति में शैक्षणिक सत्र 2021-22 से एमफिल कोर्स को बंद करने की स्वीकृति प्रदान की ।कार्यकारिणी परिषद ने नई शिक्षा नीति 2020 के आधार पर अधिष्ठाता समिति और अकादमिक परिषद के निर्णय अनुसार एमफिल कोर्स के लिए 2021-22 से बंद करने की स्वीकृति प्रदान की। जिन विद्यार्थियों की एमफिल पूर्ण नहीं हुई है उन्हें इसे पूरा करने का मौका प्रदान करने के लिए भी मंजूरी दी गई।
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परिषद ने एमफिल, एलएलएम, एमटेक और पीएचडी के विद्यार्थियों के लिए अपने शोध कार्य को जमा कराने की तिथि बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बढ़ाकर 30 जून करने की स्वीकृति प्रदान की। बैठक में लिए गए अकादमिक फैसलों में कार्यकारिणी परिषद ने संकल्प संस्था से पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र से किए गए समझौता ज्ञापन के आधार पर मार्च 2023 तक एक वर्ष के विस्तार को अपनी स्वीकृति प्रदान की। कार्यकारिणी परिषद ने कैलाश शिक्षा न्यास बणी, बड़सर को स्नातकोत्तर कोर्स चलाने की स्वीकृति प्रदान करने के साथ विवि के दिव्यांग विद्यार्थियों को समान अवसर नीति 2021 में स्वीकृति प्रदान की।
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कार्यकारिणी नामवली परिवर्तन में एमएससी भूगोल को परिवर्तित करके एमए भूगोल करने की स्वीकृति दी। इसके साथ ही इस बैठक में अकादमिक परिषद की स्थायी समिति की सिफारिशों को स्वीकृति प्रदान की गई। विश्वविद्यालय के वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-20 को भी स्वीकृति दी। वहीं विवि के वार्षिक लेखे और लेखा परीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2017-18 को मंजूरी मिली। शिक्षकों और प्लेसमेंट ऑफिसर की नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान की। कृषि लागत योजना में पाल सिंह ठाकुर, क्षेत्र पर्यवेक्षक की सेवा को छह महीने का सेवा विस्तार देने की मंजूरी भी दी गई।
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