हुड्डा बोले अमरिंदर ने वादा नहीं किया तो नहीं करूंगा प्रचार
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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने अगर उनसे पानी देने का वादा नहीं किया तो वे उनके लिए प्रचार में नहीं जाएंगे। हुड्डा ने पंजाब में होने जा रहे विधानसभा चुनाव पर सवाल पूछे जाने पर ये बात कही। हुड्डा शिमला के विकासनगर में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नोटबंदी और आरबीआई की स्वायत्तता खत्म होने के मुद्दे पर दिए गए धरने और प्रदर्शन के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे।
हुड्डा ने कहा कि उन्होंने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को इस बारे में पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। कह दिया था कि वे पंजाब में चुनाव प्रचार में नहीं जाएंगे। अगर जाएंगे तो उनकी एक यही शर्त है। उन्होंने पहले भी कहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस संधि को तोड़ा था, मगर अब अगर वे इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि वे सतलुज यमुना लिंक नहर के समझौते के अनुसार हरियाणा को पानी दिलाएंगे तो वे प्रचार में जाएंगे। उनके लिए हरियाणा के हित ही सर्वोपरि है।
शिमला में बोले भूपेंद्र सिंह हुड्डा-पंजाब में कांग्रेस की हवा और जीतेगी
पंजाब में कांग्रेस की क्या स्थिति है? इस सवाल पर हुड्डा बोले कि वे पंजाब से होकर आए हैं। वहां लोगों से मिले हैं। वहां कांग्रेस की हवा है। सरकार कांग्रेस की बनेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी यूपी में गठबंधन सरकार बनाना चाह रहे हैं। ये गठबंधन वहां चल रही बदहाली को खत्म करने के लिए ही हो रहा है।
हुड्डा बोले कि देश में किसी भी राज्य के किसान चाहे हरियाणा के हों या हिमाचल के या अन्य राज्यों के, नोटबंदी के फैसले से उन सबका नुकसान हुआ है। देश की आजादी के बाद यह फैसला घातक साबित हुआ है। इससे किसान, मजदूर और छोटा आदमी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
जीडीपी के दो से तीन प्रतिशत घटने का मतलब ये है कि अगर ये एक प्रतिशत भी घटता है तो उसका लोगों को डेढ़ लाख करोड़ का नुकसान होता है। नोटबंदी का दूरगामी असर होने वाला है। भाजपा ने आम आदमी को नोटबंदी की मार दी है। आम आदमी इन्हें वोटबंदी की मार देगा। यही स्थिति हिमाचल में भी होगी।
हरियाणा के पूर्व सीएम-मंत्री आ गए मगर अपने मंत्री-विधायक नहीं पहुंचे
आरबीआई कार्यालय शिमला के बाहर सोमवार को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के धरना-प्रदर्शन में हरियाणा के पूर्व सीएम और पूर्व मंत्री तक पहुंच गए, मगर हिमाचल के अधिकांश मंत्रियों और विधायकों ने इससे दूसरी ही बनाए रखी। प्रदेश कांग्रेस ने आलाकमान के निर्देश पर शिमला के विकासनगर स्थित आरबीआई कार्यालय के बाहर मोदी सरकार के नोटबंदी और आरबीआई की स्वायत्तता छीनने के मुद्दे पर धरना-प्रदर्शन किया।
मगर इसमें सरकार की ओर से केवल दो मंत्री और दो विधायक ही शामिल हुए। इससे कांग्रेस सरकार और संगठन के बीच तालमेल की कमी साफ नजर आई। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के आदेश पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भी सूचित किया गया था कि 18 जनवरी को आरबीआई कार्यालय के बाहर धरना दिया जाए। ऐसे ही आदेश तमाम राज्यों की प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को जारी किए गए थे।
मगर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हिमपात की वजह से इस आयोजन को 23 जनवरी के लिए टाल दिया था। सोमवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को तो पूर्व निश्चित कार्यक्रम के मुताबिक आगजनी के शिकार तांगणू गांव जाना था, मगर ये उम्मीद की जा रही थी कि इस प्रदर्शन में पार्टी पदाधिकारियों के अलावा कांग्रेस सरकार के चुने हुए प्रमुख नुमाइंदों यानी ज्यादातर मंत्रियों और विधायकों की उपस्थिति रहेगी, मगर यहां पर स्थिति कुछ और ही दिखी।
आरबीआई कार्यालय शिमला के बाहर धरने में पहुंचे केवल दो मंत्री, दो विधायक
इस प्रदर्शन में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व मंत्री निर्मल सिंह भी पहुंच गए। हालांकि, निर्मल सिंह आलाकमान ने हिमाचल के ऑब्जर्वर भी तैनात कर रखे हैं। मंत्रियों में से केवल आईपीएच एवं बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ही पहुंचे।
विधायकों में से मुख्य संसदीय सचिव विनय कुमार और स्थानीय विधायक अनिरुद्ध सिंह ही मौजूद हुए। इस पूरे धरना-प्रदर्शन में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू काफी सक्रिय नजर आए। प्रदर्शन में नई दिल्ली से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव मधुसूदन मिस्त्री को भी आना था, मगर वे भी नहीं पहुंच पाए।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि उन्हें तो कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने विशेष रूप से हिमाचल भेजा है। हालांकि, कांग्रेस के प्रदेश मीडिया विभाग के अध्यक्ष नरेश चौहान का कहना कि पार्टी की ओर से उन्हीं मंत्रियों और विधायकों को आने कहा गया था, जो आसानी से आ सकें। इसमें जबरदस्ती वाली बात नहीं थी। फिर भी इसमें सरकार के प्रतिनिधि मौजूद थे।