18 करोड़ खर्च कर 11 साल में बनाए पुल के सिर्फ दो पिलर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल में विकास कार्य किस रफ्तार से चल रहे हैं, इसकी एक बानगी देखिए। तीन जिलों को जोड़ने वाले बागछाल पुल पर पिछले 11 सालों में 18.46 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन अभी तक मात्र दो पिल्लर ही खड़े हो सके हैं। इतने लंबे अर्से में कांग्रेस और भाजपा दोनों प्रमुख दलों की सरकारें सूबे में रहीं, लेकिन ने इस पुल के काम को सिरे चढ़ाने की जहमत नहीं उठाई।
अफसरशाही और विभाग ने तो हद ही कर दी। पुल के लिए सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दो पिल्लर खड़े कर दिए तो उन्हें पता चला कि जहां पर पुल बन रहा है वो डेंजर जोन है। यहां बने पिल्लरों को खड्ड का पानी कभी भी बहा सकता है। यहां पुल बनने पर इसके गिरने की नौबत आ सकती है।
ऐसे में जनता के पैसे से बन रहे पुल का काम बंद करना ही बेहतर समझा। दोनों दलों से गुहार लगाने के बाद थक-हारकर ग्रामीणों ने हिमाचल हाईकोर्ट की शरण ली। 29 जून, 2016 को हाईकोर्ट ने एक साल के भीतर हर हाल में पुल तैयार करने के आदेश दिए। छह माह बीत गए हैं लेकिन अभी तक पुल का काम शुरू नहीं हो सका है। अब पहले बनाए पिल्लरों पर काम शुरू होना भी मुश्किल है।
30 किमी जाने के लिए लगता है सौ किलोमीटर का चक्कर
ऐसे में सवाल यह है कि जिन पिल्लरों पर 18.46 करोड़ फूंक दिए गए उनकी भरपाई कौन करेगा। पीडब्ल्यूडी ने बिना देखे साइट कैसे फाइनल कर दी। बिलासपुर, हमीरपुर और सोलन को जोड़ने वाले इस पुल के निर्माण के लिए 23 करोड़ की राशि मंजूर हुई थी। अब
इसकी लागत कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। इस पुल का शिलान्यास 2005 में वीरभद्र सिंह ने किया था। लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन आरके शर्मा का कहना है कि पुल को लेकर जो भी सरकार के आदेश होंगे उस पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्य के लिए फिर से एग्रीमेंट किया जाएगा।
बागछाल पुल संघर्ष समिति के सदस्य राकेश कुमार, कुलदीप शर्मा, राजेश कुमार, सुरेंद्र, श्याम सिंह परमार, सुनील शर्मा और रतन लाल शर्मा का लोगों का कहना है कि पुल नहीं होने से उन्हें 100 किमी सफर करना पड़ता है। अगर पुल बन जाता है तो झंडूता से बिलासपुर की दूरी मात्र 30 किमी रह जाएगी। लोगों का कहना है कि राजनीतिक दलों को केवल चुनाव के समय पुल की याद आती है।
क्या कहना है पूर्व विधायक का
कांग्रेस के पूर्व विधायक डॉ. वीरू राम किशोर का कहना है कि सीएम ने पुल बनाने के आदेश दिए हैं। पानी कम होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। भाजपा विधायक रिखी राम कौंडल का कहना है कि यह पुल अब हाईवे में आ गया है।
पुल का निर्माण केंद्र करेगा। सरकार का काम डीपीआर देना है, लेकिन वह डीपीआर बना कर नहीं दे रही है। पुल का निर्माण कार्य कांग्रेस ने जल्दबाजी में शुरू किया था, जिसका यह परिणाम है।
50 हजार लोगों को मिलना है पुल का लाभ
पूर्व प्रधान ग्राम पंचायत सलवाड़ कांशी राम ने बताया कि इस पुल के बनने से 50 हजार लोगों को लाभ होगा। इस पुल से बिलासपुर, हमीरपुर और सोलन जाने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी।
उसी साइट पर फिर शुरू होगा काम, पिलरों को देंगे सपोर्ट
भाजपा विधायक रिखीराम कौंडल ने कहा कि यह पुल अब हाईवे में आ गया है। इसका निर्माण केंद्र सरकार करेगी। सरकार डीपीआर बनाकर नहीं दे रही है। पुल का कार्य कांग्रेस ने जल्दबाजी में शुरू किया था। इसका यह परिणाम है।
लोक निर्माण के एक्सईएन आरके शर्मा का कहना है कि पुल को लेकर जो भी सरकार के आदेश होंगे, उन पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्य के लिए फिर से एग्रीमेंट किया जाएगा।
पहले कंपनी और लोक निर्माण विभाग ने बागछाल पुल को डेंजर जोन बताकर उसका निर्माण बंद कर दिया। कंपनी रातोंरात सामान लेकर चलती बनी, लेकिन विभाग ने अब फिर उसी साइट पर काम शुरू करने की तैयारी कर ली है। पीडब्ल्यूडी का तर्क है कि पहले से बनाए गए पिलरों की फाउंडेशन को सपोर्ट दिया जाएगा।
उसी साइट पर पुल का निर्माण शुरू किया जाएगा। इसी महीने शिमला में होने वाली बैठक में अंतिम फैसला होगा। अब सवाल यह उठता है कि क्या पिलर को सपोर्ट लगाकर डेंजर जोन का खतरा कम हो जाएगा?
या फिर अपनी गलती को छिपाने के लिए हाईकोर्ट के आदेश के बाद लोनिवि ने उसी साइट को अंतिम रूप दे रहा है। हालांकि, उसी साइट पर फिर से पुल का निर्माण करने का फैसला लोनिवि विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर रहा है।