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और फिर अंग्रेज कर्नल नौकरी छोड़कर बन गया संत

Sun, 03 May 2015 09:20 AM IST
Updated Sun, 03 May 2015 09:20 AM IST
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army commandant L.P. Farrel who turned to spirituality

भारत पर अंग्रेजों के शासनकाल में (वर्ष 1939) में असम-वर्मा की सीमा पर भारतीय कमाण्ड के भूतपूर्व सेनापति एल.पी. फैरेल व ब्रिटिश सेना के एक कर्नल हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों में तैनात थे। एक दिन वह अपनी दूरबीन से देखते हैं कि एक नंगा वृद्ध व्यक्ति आंखे बंद करके बैठा है। उन्हें उस पर संदेह हो जाता है कि संभवत: यह कोई जासूस या षड्यन्त्रकारी है।

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वो अपनी दूरबीर उस पर फोकस कर लेते हैं। थोड़ी देर में वो देखते है कि वह वृद्ध उठता है व नदी के किनारे जा पहुंचता है। नदी में, कोई लाश बहकर आ रही होती है। वह वृद्ध उस लाश को रोकता है व उसको कठिनाई से खींचकर बाहर निकालता है। इसके बाद वह उस लाश के पास बैठ जाता है वह अपने नाक को पकड़कर कुछ करता है।

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यह देखकर फटी रह गईं कर्नल की आंखें

army commandant L.P. Farrel who turned to spirituality

कुछ समय पश्चात् वह वृद्ध जमीन पर गिर जाता है लेकिन वह लाश जीवित हो उठती है। यह देखकर कर्नल भौचक्के रह जाते हैं। वे दौड़कर उस जगह पहुंचते हैं। वह व्यक्ति स्थिति भांप कर मुस्कराने लगता है। कर्नल उससे कहते हैं- पहली बार उन्हें अपने आप पर विश्वास नहीं हो पा रहा है। क्या यह सच्चाई है या उनका कोई भ्रम। वह व्यक्ति कर्नल को समझाता है कि वह योग साधना में लीन था। उसकी साधना पूरी होने में अभी समय लगना था ल‌ेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था।

यदि नया शरीर धारण करता तो बहुत समय लग जाता तथा संसार के सुखों में भटकने का भी डर रहता। अत: उसने जब देखा कि किसी पर्वतारोही की लाश बहती आ रही है तो उसने तुरन्त उस लाश का सदुपयोग करने की सोची। उसने वह वृद्ध शरीर छोड़ दिया। पर्वतारोही का युवा शरीर धारण कर लिया जिससे इस शरीर से आगे योग साधना कर सके।

गुप्त भारत की खोज में मिलेगा आपको इसका विस्तार

army commandant L.P. Farrel who turned to spirituality

कर्नल ने उससे आग्रह किया कि वह यह विद्या उसे भी सिखाए तो उसने स्पष्ट इंकार कर दिया कि यह आसान कार्य नहीं है। इसमें लंबे समय तक इन्द्रियों को वश में रखते हुए ध्यान साधना के कड़े अभ्यास करने पड़ते हैं जिसके लिए विशेष मनोभूमि की आवश्यकता होती है। वह कर्नल को कहता है कि भारत के योगियों के लिए यह बहुत सामान्य बात है। ऐसे अनेक योगी उसे हिमालय की गुफाओं में मिल जाएंगे जो जन्म-मृत्यु के अधीन नहीं हैं।

वह कर्नल भारत की इस महान विद्या के प्रति नतमस्तक हो उठता है। इंग्लैंड वापिस जाकर एक पत्राकार वार्ता बुलवाता है व इस घटना का वर्णन उसमें करता है। उस पत्राकार वार्ता में पाल ब्रण्टन नामक एक ऐसे पत्रकार आए थे जो भारतीय संस्कृति में रुचि रखते थे। पाल ब्रण्टन भारत के इन रहस्यों को जानने के लिए भारत भ्रमण की योजना बनाते हैं व भ्रमण के अनुभवों को एक पुस्तक में संकलित किया जिसका नाम हैं- ‘गुप्त भारत की खोज’। इस किताब में बहुत से हिमालय के रहस्यों का उल्लेख किया गया है।

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