HP High Court: रिवर राफ्टिंग हादसे पर मुख्य सचिव सहित छह अधिकारियों से तलब जवाब
प्रदेश हाईकोर्ट ने ब्यास नदी में रिवर राफ्टिंग हादसे पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने मुख्य सचिव समेत छह अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ब्यास नदी में रिवर राफ्टिंग हादसे पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने मुख्य सचिव समेत छह अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंदर सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 26 मई को निर्धारित की है। अदालत ने दैनिक समाचार पत्र में छपी खबर पर जनहित में याचिका दर्ज की है। खबर प्रकाशित की गई थी कि बबेली में आईटीबीपी कैंप के समीप ब्यास नदी में पर्यटकों की एक राफ्ट पलट गई। राफ्ट पलटने से महाराष्ट्र की एक महिला पर्यटक की मौत हो गई थी। इसी राफ्ट में बैठे चार अन्य पर्यटकों को रेस्क्यू कर लिया गया।
पिछले 22 दिनों में ब्यास नदी में पर्यटकों के साथ यह दूसरा हादसा पेश आया है। इससे पहले 29 अप्रैल को भी छरूडू के समीप एक राफ्ट पलट गई थी। इसमें एक पर्यटक की मौत हुई थी और एक महिला घायल हो गई थी। शनिवार सुबह करीब नौ बजे बबेली से एक ही परिवार के पांच पर्यटकों को लेकर एक राफ्ट वैष्णो माता मंदिर तक आ रही थी। राफ्ट को गाइड चला रहा था। यह राफ्ट आईटीबीपी कैंप के समीप पहुंचते ही पलट गई। राफ्ट पलटने से सभी नदी में जा गिरे, हालांकि पायलट और अन्य लोगों की सहायता से अन्य पर्यटकों को बचा लिया गया, लेकिन महिला पर्यटक शालिनी प्रभाकर कोल्हे (65) पत्नी निलेश कोल्हे निवासी पुणे सिटी, महाराष्ट्र की मौत हो गई।
प्रस्तावित पंप हाउस भूमि की निशानदेही से हाईकोर्ट नाखुश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन में प्रस्तावित पंप हाउस निर्माण के लिए भूमि की निशानदेही पर नाराजगी जताई है। अदालत ने मामले में पूर्व की गई सभी निशानदेहियों को खारिज कर दिया है। साथ ही जिला राजस्व अधिकारी को निशानदेही करने के आदेश देते हुए रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने को कहा है कि यदि किसी ने सरकारी भूमि पर कब्जा किया है तो उसका नाम अदालत को बताया जाए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने मामले की सुनवाई 26 जून को निर्धारित की है।
स्थानीय निवासी ज्ञान चंद ने जनहित में याचिका दायर की है। इसके अलावा याची ने आरोप लगाया है कि प्रतिवादी शोभा राम और सुंदर सिंह आम रास्ते पर अतिक्रमण कर रहे हैं। इस रास्ते पर अवैध रूप से शेड निर्माण के लिए उन्होंने टाइल उखाड़ की है। इस बारे में जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक सोलन के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई गई। इन अधिकारियों ने अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं। अदालत ने इस मामले में निशानदेही करने के आदेश दिए थे। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि प्रतिवादी शोभा राम और सुंदर सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
जंगी-थोपन प्रोजेक्ट मामले की सुनवाई अब 20 जून को
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जंगी-थोपन प्रोजेक्ट मामले की सुनवाई 20 जून को निर्धारित की है। मंगलवार को मामले पर बहस पूरी न होने के कारण अदालत ने अदानी समूह और राज्य सरकार की दोनों अपीलों की सुनवाई एक साथ निर्धारित की है। बता दें कि किन्नौर जिले की जंगी-थोपन-पोवारी जल विद्युत परियोजना शुरू से ही विवादों में रही है। विदेशी कंपनी ब्रेकल के बाद अदानी समूह भी इस परियोजना को नहीं बनाना चाहता है। 960 मेगावाट के महत्वपूर्ण हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट ब्रेकल को वर्ष 2007 में आवंटित किया गया था। कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया और अपफ्रंट राशि जमा नहीं करवाई।
इसके बाद यह प्रोजेक्ट अदानी कंपनी को दिया गया। समूह ने प्रीमियम के तौर पर 280.06 करोड़ जमा करवाए। बाद में परियोजना के टेंडर को रद्द कर दिया। ब्रेकल कंपनी ने हिमाचल सरकार से पत्राचार किया और अगस्त 2013 को अदानी समूह के पार्टनर के तौर पर 280.06 करोड़ को ब्याज सहित वापस करने के लिए आग्रह किया। अक्तूबर 2017 में कैबिनेट मीटिंग में वीरभद्र सिंह सरकार ने फैसला लिया था कि अदानी समूह को पावर प्रोजेक्ट की 280 करोड़ की अपफ्रंट मनी वापस की जाएगी, लेकिन 5 दिसंबर, 2017 को सरकार ने अदानी ग्रुप पर दिखाई गई 280 करोड़ रुपये की मेहरबानी वाला फैसला वापस ले लिया।