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Shimla News: एक और आदतन नशा तस्कर भेजा जेल, अब तक 39 सलाखों के पीछे

Tue, 12 May 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2026 11:59 PM IST
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Another habitual drug trafficker sent to jail, 39 behind bars so far
गृह विभाग की मंजूरी पर शिमला पुलिस की कार्रवाई
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एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपी के खिलाफ दर्ज हैं चार केस
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में नशा तस्करी का नेटवर्क तोड़ने के लिए शिमला पुलिस आदतन नशा तस्करों को जेल भेज रही है। इस मुहिम के तहत शिमला पुलिस ने अभी तक 39 आदतन नशा तस्करों को अब तक सलाखों के पीछे पहुंचाया है।

यही नहीं ऐसे आदतन नशा तस्करों की डिटेंशन अवधि को तीन महीने से छह महीने तक बढ़ाया जा रहा है। इस कार्रवाई का मकसद जिले में नशा तस्करी में सक्रिय आदतन अपराधियों पर कार्रवाई करना है जिससे नशे की सप्लाई चेन को तोड़ा जा सके। सलाहकार बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद अब पुलिस ने एक और आरोपी को जेल भिजवाया है। इसमें कुलदीप ठाकुर उर्फ मोनू निवासी गांव सरस्कन डाकघर बरोटी, तहसील धर्मपुर जिला मंडी हाल पता लोअर विकासनगर, तहसील शिमला के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई है। पुलिस के मुताबिक कुलदीप लंबे समय से नशा तस्करी में सक्रिय था। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत चार केस दर्ज हैं। इसके बावजूद वह नशा तस्करी में संलिप्त पाया जा रहा था। इसको देखते हुए पुलिस विभाग ने पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत उसकी फाइल बनाकर पुलिस मुख्यालय के माध्यम से गृह विभाग को भेजा। यहां से मंजूरी मिलने के बाद उसे तीन महीने के लिए जेल में डाल दिया है।
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आरोपी कुलदीप ठाकुर के खिलाफ 13 जुलाई 2023 में 14 ग्राम चिट्टा बरामद होने का मामला दर्ज है। इसके बाद पुलिस थाना ढली में 3.36 ग्राम चिट्टा और 1,50,000 रुपये, 27 जून 2025 को 22 ग्राम चिट्टा और थाना संजौली में 19 अगस्त 2025 को 5.480 ग्राम चिट्टा और 40,000 रुपये नकदी बरामद होने का मामला दर्ज है। एसएसपी गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस नशा तस्करी का नेटवर्क तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। पीआईटी एनडीपीएस एक्ट में एक और आदतन नशा तस्कर को तीन महीने के लिए जेल भेजा है।
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सलाहकार बोर्ड के न्यायाधीश होते हैं अध्यक्ष
मादक दवाओं और मनप्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार को रोकने के उद्देश्य से सरकार ने 1988 में पीआईटी एनडीपीएस अधिनियम लागू किया है। यह अधिनियम ऐसी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को हिरासत में लेने की अनुमति देता है, जो बार-बार नशा तस्करी में संलिप्त पाए जाते हैं। इस तरह के मामलों के लिए प्रदेश में सलाहकार बोर्ड का गठन किया है। सचिव गृह से किसी भी आरोपी को हिरासत में भेजने के बाद सलाहकार बोर्ड मामले की सुनवाई करता है। इसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश करते हैं। इसके साथ ही दो वरिष्ठ अधिवक्ता इसके सदस्य होते हैं। सुनवाई में पुलिस अपना पक्ष प्रस्तुत करती है जबकि आरोपी को भी पक्ष रखने का मौका मिलता है।
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