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‘बंक’ मारने में बच्चों से आगे गुरु जी, रिपोर्ट में खुलासा

Wed, 18 Feb 2015 11:25 AM IST
Updated Wed, 18 Feb 2015 11:25 AM IST
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Annual Status of Education Report -2014

प्रदेश के सरकारी स्कूलों के मास्टर ‘बंक’ मारने में बच्चों से आगे निकल गए हैं। एनुअल स्टेटस ऑफ एजूकेशन रिपोर्ट -2014 के ग्रामीण स्कूलों में हुए सर्वे में यह खुलासा हुआ है।

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इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में बच्चों की उपस्थिति (सर्वे के दिन) जहां 86.3 मिली तो बच्चों के मुकाबले 76.7 प्रतिशत शिक्षक ही स्कूलों में उपस्थिति मिले, जो पिछले वर्ष 85.4 फीसदी था। 2013 में बच्चों की उपस्थिति 86.2 थी, जो इस बार 86.3 पाई गई।
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बच्चों की उपस्थिति में एक अंक का इजाफा हुआ तो मास्टरों की अनुपस्थिति 8 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। स्थिति साफ है कि गांव के स्कूलों में या तो मास्टर बच्चों को पढ़ाने में गंभीर नहीं है या फिर उन पर किसी तरह की कोई जिम्मेवारी तय नहीं की है।

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8 फीसदी कम हुई शिक्षकों की हाजिरी

Annual Status of Education Report -2014

इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रदेश में पढ़ाई का स्तर घटा है। सरकार और विभाग सिलेबस बदलने में लगे हुए हैं, जबकि शिक्षकों की जिम्मेवारी तय करने की आवश्यकता है।

हिमाचल शिक्षा सुधार एवं विकास मंच पीआर सांख्यान ने बताया कि यह भी सत्य है कि अब शिक्षकों का एक बड़ा तबका पहले के मुकाबले कम गंभीरता से बच्चों को पढ़ाते हैं। स्कूलों में सबसे पहले तो मोबाइल पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए।

उधर, संस्था के पदाधिकारी जोगिंदर शर्मा और गुरमीत सिंह ने कहा कि प्रदेश में गुणात्मक शिक्षा में सुधार की आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षकों की जिम्मेवारी भी तय करने की आवश्यकता है। संस्था ने जब सर्वे किया उस दिन स्कूलों में कुल शिक्षकों में से 76.7 प्रतिशत शिक्षक ही उपस्थित मिले।

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