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Shimla News: बेदखली मामले में किरायेदार को मकान को खाली करने का आदेश
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सिविल जज कोर्ट की न्यायाधीश मनु प्रिंजा की अदालत ने सुनाया फैसला, 11 साल से अदालत में चल रहा था मामला
एक दिसंबर 2026 से पहले खाली करना होगा मकान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के सिविल जज कोर्ट की न्यायाधीश मनु प्रिंजा की अदालत ने 11 वर्ष से लंबित बेदखली याचिका पर फैसला सुनाया है। अदालत ने किरायेदार को 1 दिसंबर 2026 से पहले मकान खाली करने का आदेश दिया है।
अदालत ने माना कि मकान मालिक को अपने दिवंगत बेटे की विधवा बहू और पोती के लिए अलग मकान की वास्तविक और वाजिब जरूरत है। मामले के अनुसार संजौली निवासी मकान मालिक ने जनवरी 2015 में किरायेदार के खिलाफ बेदखली याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रतिवादी वर्ष 1993-94 से पहली मंजिल पर 500 रुपये प्रतिमाह के किराये पर रह रहा था। 29 अगस्त 2014 को याचिकाकर्ता के बड़े बेटे की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार में जगह की कमी को देखते हुए विधवा बहू और पोती को अलग एवं स्वतंत्र रूप से बसाने के लिए मकान की जरूरत बताई गई थी।
मुकदमे के दौरान किरायेदार की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनकी पत्नी और बेटे को कानूनी वारिस के तौर पर पक्षकार बनाया गया। किरायेदार पक्ष ने दलील दी कि मकान मालिक के पास पर्याप्त जगह उपलब्ध है। साथ ही, दिवंगत बेटे की पत्नी ने पुनर्विवाह कर लिया है और वह अपनी बेटी के साथ अलग रह रही है। इसलिए मकान की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं रह गई है। अदालत ने गवाहियों का विश्लेषण करते हुए स्पष्ट किया कि केवल कमरों की संख्या गिनकर किसी हिस्से को संपूर्ण और स्वतंत्र रिहायश नहीं माना जा सकता।
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अदालत के संज्ञान में यह तथ्य भी आया कि किरायेदार का बेटा चंडीगढ़ में नौकरी करता है और वहीं रहता है। इसके अलावा रिकॉर्ड पर आए बिजली बिल से यह भी सामने आया कि इस कमरे में मार्च 2024 से जुलाई 2024 के बीच बिजली की खपत शून्य दर्ज की थी। अदालत ने किरायेदार पक्ष की सभी आपत्तियों और दलीलों को खारिज करते हुए मकान मालिक की बेदखली याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वह एक दिसंबर 2026 तक विवादित रिहायशी सेट का खाली और शांतिपूर्ण कब्जा मकान मालिक को सौंप दें।
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एक दिसंबर 2026 से पहले खाली करना होगा मकान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के सिविल जज कोर्ट की न्यायाधीश मनु प्रिंजा की अदालत ने 11 वर्ष से लंबित बेदखली याचिका पर फैसला सुनाया है। अदालत ने किरायेदार को 1 दिसंबर 2026 से पहले मकान खाली करने का आदेश दिया है।
अदालत ने माना कि मकान मालिक को अपने दिवंगत बेटे की विधवा बहू और पोती के लिए अलग मकान की वास्तविक और वाजिब जरूरत है। मामले के अनुसार संजौली निवासी मकान मालिक ने जनवरी 2015 में किरायेदार के खिलाफ बेदखली याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रतिवादी वर्ष 1993-94 से पहली मंजिल पर 500 रुपये प्रतिमाह के किराये पर रह रहा था। 29 अगस्त 2014 को याचिकाकर्ता के बड़े बेटे की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार में जगह की कमी को देखते हुए विधवा बहू और पोती को अलग एवं स्वतंत्र रूप से बसाने के लिए मकान की जरूरत बताई गई थी।
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मुकदमे के दौरान किरायेदार की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनकी पत्नी और बेटे को कानूनी वारिस के तौर पर पक्षकार बनाया गया। किरायेदार पक्ष ने दलील दी कि मकान मालिक के पास पर्याप्त जगह उपलब्ध है। साथ ही, दिवंगत बेटे की पत्नी ने पुनर्विवाह कर लिया है और वह अपनी बेटी के साथ अलग रह रही है। इसलिए मकान की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं रह गई है। अदालत ने गवाहियों का विश्लेषण करते हुए स्पष्ट किया कि केवल कमरों की संख्या गिनकर किसी हिस्से को संपूर्ण और स्वतंत्र रिहायश नहीं माना जा सकता।
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अदालत के संज्ञान में यह तथ्य भी आया कि किरायेदार का बेटा चंडीगढ़ में नौकरी करता है और वहीं रहता है। इसके अलावा रिकॉर्ड पर आए बिजली बिल से यह भी सामने आया कि इस कमरे में मार्च 2024 से जुलाई 2024 के बीच बिजली की खपत शून्य दर्ज की थी। अदालत ने किरायेदार पक्ष की सभी आपत्तियों और दलीलों को खारिज करते हुए मकान मालिक की बेदखली याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वह एक दिसंबर 2026 तक विवादित रिहायशी सेट का खाली और शांतिपूर्ण कब्जा मकान मालिक को सौंप दें।