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पढ़ाई की भरपाई शिक्षकों के लिए चुनौती, नई रणनीति तैयार कर रहा विभाग
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छात्र बिलासपुर में दसवीं की परीक्षा देकर बाहर आते विद्यार्थी।
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। कोरोना के अब कम मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन कोरोना ने बच्चों की शिक्षा पर काफी बुरा असर डाला है। ऑनलाइन के बाद ऑफलाइन पढ़ाई में विद्यार्थियों में कई बदलाव देखने को मिले हैं। इसमें सबसे ज्यादा असर पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चों में देखने को मिल रहा है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई की भरपाई चुनौतीपूर्ण है। बच्चों की इस भरपाई को पूरा करने के लिए विभाग भी तैयारियों में जुट गया है। विभाग का कहना है कि अगला शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले दो माह तक पिछली कक्षाओं का रिविजन करवाया जाएगा।
शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की सीखने की क्षमता में कमी आई है। इसके कारण उन्हें किसी भी विषय के बारे में समझाने के लिए तीन गुना मेहनत करनी पड़ रही है। छोटी कक्षाएं बच्चों की पढ़ाई का आधार हैं इसलिए शिक्षकों को ज्यादा मेहनत करने की आवश्यकता है। कोरोना के कारण पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चों के लिए स्कूल पूरे दो साल बंद रहे। वहीं इन छोटे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करवा पाना काफी मुश्किल था। इसके कारण बच्चों को बेसिक शिक्षा अच्छे से नहीं मिल पाई। दो साल घर रहने के बाद पहली कक्षा का बच्चा बिना पढ़े तीसरी कक्षा में पहुंच गया। वहीं तीसरी कक्षा में स्कूल खुलते ही बोर्ड की परीक्षा देनी पड़ी।
इनसेट
शिक्षक राजेश गर्ग ने बताया कि बच्चों में सीखने की क्षमता बहुत कम हो गई है। परीक्षा में इन बच्चों के लिए बैठना भी मुश्किल हो गया था। कुछ बच्चे तो ऐसे हैं, जो पेपर में कुछ भी नहीं लिख पाए। बच्चों की शिक्षा की भरपाई करने में समय लगेगा।
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इनसेट
शिक्षक अजय कुमार ने बताया कि कोरोना काल में छोटे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने में काफी मुश्किल हुई। वहीं अब स्कूल में खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए शिक्षक पूरी मेहनत कर रहे हैं।
इनसेट
शिक्षक रूमा चंदेल ने कहा कि कोरोना के कारण बच्चे घर पर रहे। इसके कारण उनके लिखने की आदत पर असर पड़ा है। शिक्षक व्यवहारिक परिवर्तन करके और खेल-खेल में बच्चों को पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं।
कोट्स
प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कुलभूषण ने बताया कि विभाग नए सत्र से शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बैठक करेगा। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही कम से कम दो माह तक इन बच्चों को पुरानी कक्षाओं के विषयों का रिविजन करवाया जाएगा, ताकि अगले विषयों को पढ़ने में इन्हें कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।
कोट्स
मनोचिकित्सक डॉ. महेंद्र ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों को फोन की लत लग गई है। इसके कारण उनकी आंखों और दिमाग पर पड़ा है। अभिभावकों को सलाह है कि बच्चे फोन पर क्या कर रहे हैं, इस पर नजर रखें। फोन चलाने का समय भी निर्धारित करें।
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शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की सीखने की क्षमता में कमी आई है। इसके कारण उन्हें किसी भी विषय के बारे में समझाने के लिए तीन गुना मेहनत करनी पड़ रही है। छोटी कक्षाएं बच्चों की पढ़ाई का आधार हैं इसलिए शिक्षकों को ज्यादा मेहनत करने की आवश्यकता है। कोरोना के कारण पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चों के लिए स्कूल पूरे दो साल बंद रहे। वहीं इन छोटे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करवा पाना काफी मुश्किल था। इसके कारण बच्चों को बेसिक शिक्षा अच्छे से नहीं मिल पाई। दो साल घर रहने के बाद पहली कक्षा का बच्चा बिना पढ़े तीसरी कक्षा में पहुंच गया। वहीं तीसरी कक्षा में स्कूल खुलते ही बोर्ड की परीक्षा देनी पड़ी।
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शिक्षक राजेश गर्ग ने बताया कि बच्चों में सीखने की क्षमता बहुत कम हो गई है। परीक्षा में इन बच्चों के लिए बैठना भी मुश्किल हो गया था। कुछ बच्चे तो ऐसे हैं, जो पेपर में कुछ भी नहीं लिख पाए। बच्चों की शिक्षा की भरपाई करने में समय लगेगा।
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शिक्षक अजय कुमार ने बताया कि कोरोना काल में छोटे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने में काफी मुश्किल हुई। वहीं अब स्कूल में खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए शिक्षक पूरी मेहनत कर रहे हैं।
इनसेट
शिक्षक रूमा चंदेल ने कहा कि कोरोना के कारण बच्चे घर पर रहे। इसके कारण उनके लिखने की आदत पर असर पड़ा है। शिक्षक व्यवहारिक परिवर्तन करके और खेल-खेल में बच्चों को पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं।
कोट्स
प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कुलभूषण ने बताया कि विभाग नए सत्र से शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बैठक करेगा। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही कम से कम दो माह तक इन बच्चों को पुरानी कक्षाओं के विषयों का रिविजन करवाया जाएगा, ताकि अगले विषयों को पढ़ने में इन्हें कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।
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मनोचिकित्सक डॉ. महेंद्र ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चों को फोन की लत लग गई है। इसके कारण उनकी आंखों और दिमाग पर पड़ा है। अभिभावकों को सलाह है कि बच्चे फोन पर क्या कर रहे हैं, इस पर नजर रखें। फोन चलाने का समय भी निर्धारित करें।