अमर उजाला संवादः फेक न्यूज के दौर में अखबार पढ़ने की आदत डालना जरूरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ने प्रदेश के एकमात्र सेंटर ऑफ एक्सिलेंस कॉलेज संजौली में प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया विषय पर संवाद का आयोजन किया। संवाद में राज्यपाल के सलाहकार एवं हिमाचल प्रदेश विवि के पत्रकारिता विभाग के प्रो. शशिकांत शर्मा ने न्यूज की प्रासंगिकता तथा विश्वसनीयता को लेकर बारीकी से बताया।
उन्होंने कहा कि आज भी प्रिंट मीडिया पर सिर्फ इसलिए आम पाठक का विश्वास बना है कि क्योंकि प्रिंट मीडिया में प्रकाशित होने वाली हर खबर की जवाबदेही है। सोशल मीडिया के जरिये परोसी जा रही फेक न्यूज के चलते हर युवा के लिए अखबार पढ़ने की आदत को डालना जरूरी है।
अखबार में पाठकों तक सही और स्टीक तथ्यपरक जानकारी तथा सूचनाएं परोसने के लिए एक बड़ी टीम काम करती है। सोशल मीडिया में इसके विपरीत जिसका जो मन चाहे खबर या सूचना डाल देता है, जरूरी नहीं की वो सही हो।
प्रिंट मीडिया का मकसद सिर्फ अपना उत्पाद बेचने नहीं होता, वह राष्ट्र निर्माण, समाज के लिए क्या सही है क्या गलत, सब समझकर जिम्मेदारी के साथ अपना कार्य करता है। उन्होंने अमर उजाला की एक जांची परखी तथ्य से भरपूर खबर और फेक न्यूज के अंतर को समझाने को शुरू किए संवाद की सराहना की।
प्रो. शशिकांत ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो मिल रहा है, वह आपके लिए कितना लाभकारी है, यह उसे पढ़ने वाले को सोचना होगा। इंटरनेट सोशल मीडिया में आपकी आदतों आपके व्यवहार का रिकार्ड रखा जा रहा है, आप जाने अनजाने किसी के डाटा बैंक का हिस्सा बन रहे हैं। ऐसा कर आपको इस्तेमाल करने का प्रयास होता है।
वहां आपको आपकी रुचि के मुताबिक सूचनाएं परोसी जाती है। आज भी समाचार पत्रों पर लोगों का विश्वास बना हुआ है, इसे सोशल मीडिया से कोई चुनौति नहीं है। बस पाठक को तय करना है कि वह विश्वसनीय मीडिया को ही अपनाएं। इस आयोजन में संजौली कॉलेज के प्राचार्य सीबी मेहता, प्रवक्ता डॉ. इंद्र सिंह ठाकुर ने भरपूर सहयोग किया।
प्रिंट मीडिया में कई हाथों से गुजरने वाली खबरें ही विश्वसनीय
प्रो. शशिकांत ने कहा कि अखबार हजारों लोगों की मेहनत से तैयार होता है। एक खबर रिपोर्टर के प्रारंभिक सूचना एकत्र करने से लेकर संपादन और प्रकाशन तक कई हाथों से होकर गुजरती है। अखबार सिर्फ खबर प्रकाशित नहीं करते बल्कि उसकी पूरी जिम्मेदारी भी लेते हैं।
गलत खबर प्रकाशित होने पर कानूनी सुरक्षा भी पाठक को उपलब्ध है। अखबारों में उठाए मुद्दों का प्रभाव होता है। सोशल मीडिया में चलने वाली खबरों में यह सब नहीं होता। इसकी विश्वसनीयता कम होती है। कल कॉलेज में छुट्टी रहेगी यह खबर अखबार में प्रकाशित होती है तो उसकी सत्यता जांचने की जरूरत नहीं। फेस बुक या व्हॉट्सए पर यह मैसेज हो तो इसे जांचना जरूरी हो जाता है।
समाचारपत्रों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, प्रादेशिक खबरें और स्थानीय खबरों के साथ ही मौजूदा हलचल और फिल्मी, खेल सहित हर तरह के समाचार उपलब्ध रहते हैं। सोशल मीडिया में जो मर्जी वह डाल दिया जाता है, जो भले ही आपके काम का है या नहीं। प्रतिष्ठित अखबारों ने अपने डिजिटल संस्करण भी शुरू किए हैं जिन समाचार पत्रों की विश्वसनीयता है उनके डिजीटल संस्करणों को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।
अखबारों ने ही उजागर किए बड़े घोटाले
बड़े घोटाले और स्कैंडल भी अखबारों ने ही उजागर किए हैं। बाद में वह न्यूज चैनल पर बड़ी खबरें बनी हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ऐसे कई मुद्दों हैं जो अखबारों में उठे और बाद में इनका समाधान किया गया। यही नहीं कई मामले संसद तक गूंजे।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया पर आज भी आम आदमी को पूरा भरोसा है कि वह सबको न्याय दिलवा सकता है। इसी कारण थक हार कर परेशान आदमी अखबारों के कार्यालय में न्याय की उम्मीद से जाता है।
छात्रों ने वक्ता से पूछे ये सवाल
प्रश्न : सर सिलेबस इतना अधिक होता है कि अखबार पढ़ने को समय ही नहीं मिलता---- प्रियंका बीए प्रथम वर्ष
जवाब: आप समाचार पत्र पढ़ने के लिए रुचि पैदा करें, फिर कोशिश करें कि सबसे पहले पसंदीदा समाचारों को पढ़ें, कम से कम प्रथम पृष्ट की खबरों और हेडलाइन जरूर जरूर पढ़ने का प्रयास करें। धीरे-धीरे आपको समाचार पत्र पढ़ने की आदत हो जाएगी।
प्रश्न : सर समाचारपत्रों में रिज पर टलहती युवतियों का फोटो क्यों लगता है-----अंजलि भंडारी
जवाब : समाचारों में बढ़ते अपराध और उसकी खबरों के कारण पाठक में नकारात्मक हावी न हो, उसकी जिंदगी के प्रति सकारात्मक सोच बनाए रखने को घूमने फिरने के चित्र लगाए जाते है। इसमें कई मर्तबा शिमला के खुशनुमा मौसम को बताना भी मकसद रहता है।
प्रश्न: समाचार पत्रों के विज्ञापनों पर कितना भरोसा करें लोग--- अंजलि बीए छात्रा
जवाब : हालांकि समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाली खबरों के लिए संपादक जिम्मेदार होता है, लेकिन विज्ञापन में भी यदि भ्रमित करने वाली कोई सामग्री छप जाती है, तो एक जागरूक पाठक को इसकी जानकारी संबंधित समाचारपत्र के संपादक तक पहुंचानी चाहिए।
सवाल : कुछ विज्ञापन भ्रमित करते हैं----- राहुल प्रेमी
जवाब : खबर की जिम्मेदारी अखबार की रहती है लेकिन विज्ञापन में यदि दस दिनों में गोरा होने की बात की जा रही है, तो पाठक को स्वयं इसका आकलन करना होगा। समाचारपत्रों के पास ऐसी कोई लैब नहीं कि वह उत्पाद की गुणवत्ता जांच सके।