अमर उजाला एक्सक्लूसिव: जर्मनी की तर्ज पर माइक्रो पौधरोपण कर आग से बचाए जाएंगे हिमाचल के जंगल
राज्य का वन विभाग माइक्रो गेप प्लांटेशन के पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। राज्य में चीड़ के जंगलों की समस्या से निजात दिलाने में यह प्रोजेक्ट अहम भूमिका निभाएगा।
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जर्मनी की तर्ज पर माइक्रो पौधरोपण कर हिमाचल के जंगलों को आग से बचाया जाएगा। प्रदेश में चीड़ के जंगलों में हर साल सबसे ज्यादा आग की घटनाएं होती हैं। चीड़ के जंगलों को फैलने से रोकने में मदद भी मिलेगी और भूमि कटाव की समस्या भी दूर होगी। पशुपालकों को पशुओं की जरूरत का चारा घरों के पास मिलेगा और प्राकृतिक जल स्रोत पुनर्जीवित होने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ेगी। इस बार गर्मियों में हिमाचल के जंगलों में 3,000 से अधिक आग की घटनाएं हो चुकी हैं और करोड़ों की वन संपदा को नुकसान हुआ है। राज्य का वन विभाग माइक्रो गेप प्लांटेशन के पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। राज्य में चीड़ के जंगलों की समस्या से निजात दिलाने में यह प्रोजेक्ट अहम भूमिका निभाएगा। राज्य के जिला सोलन वन मंडल में बीस हेक्टेयर वन भूमि में चीड़ के जंगलों के साथ लगती खाली भूमि में प्रोजेक्ट पर काम किया गया है। चीड़ के पेड़ों को काटने पर राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने भी पूरी तरह से रोक लगाई है।
चीड़ के जंगलों के साथ रोपे ये पौधे
पायलट प्रोजेक्ट के तहत चीड़ के जंगलों के साथ जामुन, कैंथ, बान, दाड़ू, कचनार, आंवला आदि प्रजाति के पैधों को रोपा गया है। ये पेड़ करीब छह फुट लंबे हैं, जिससे उन्हे पशु अपना भोजन न बना सकें। ये पौधे चीड़ के जंगलों के साथ लगती खाली जमीन में लगाए गए हैं।
चीड़ के पेड़ों से ये है समस्या
वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि चीड़ के जंगलों में सबसे ज्यादा आग लगती है। चीड़ के बीच थोड़े जलने के बाद आसानी से उग जाते हैं। यही कारण है कि चीड़ के पेड़ ज्यादा पनपते हैं। जिस भूमि में चीड़ का पेड़ होता है, वहां पानी सूख जाता है। चीड़ के जंगलों में भूमि कटाव ज्यादा तेजी से होता है।
चीड़ के जंगलों में चौड़ी पत्ती के पेड़ भूमि कटाव रोकेंगे
वन विभाग के प्रोजेक्ट से चौड़ी पत्तियों वाले पेड़ चीड़ के जंगलों के पास खाली भूमि पर चौड़ी पत्तियों के पेड़ लगाकर भूमि कटाव रुकेगा और वनों को आग से बचा सकेंगे। चीड़ के जंगलों की भूमि में पानी की मात्रा बढ़ेगी।
क्या कहते हैं कंजरवेटर
प्रोजेक्ट से जुड़े विभाग के कंजरवेटर वन ई. विक्रम कहते हैं कि चीड़ के जंगलों के साथ पायलट प्रोजेक्ट में चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष रोपे गए हैं। यह प्रोजेक्ट 20 हेक्टेयर में चलाया जा रहा है। इस क्षेत्र की घेराबंदी की गई है। यहां पर ग्रामीण पशुओं के लिए चारा काट सकते हैं। इस क्षेत्र में पशुओ को चराने पर रोक लगाई है।