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खेती: कृषि विशेषज्ञों की किसानों को सलाह, लहसुन की निराई का सही वक्त, खाद भी डालें

Thu, 09 Feb 2023 02:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू/खराहल
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू/खराहल Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 09 Feb 2023 02:04 PM IST
सार

कृषि विभाग के उपनिदेशक पंजवीर ठाकुर ने कहा कि खरपतवार उगने से फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। किसानों को दो-तीन बार फसल की निराई करनी जरूरी है।

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agriculture experts suggestions to farmers for garlic cultivation
क़ुल्लू की लगघाटी में लहसुन की निराई में जुटीं महिलाएं। - फोटो : संवाद

विस्तार

कुल्लू जिले में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। किसान इससे अच्छी आमदनी भी अर्जित कर रहे हैं। लहसुन उत्पादकों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि लहसुन के पौधों की बढ़ोतरी के लिए निराई कार्य के साथ नत्रजन खाद को डालें। इससे लहसुन की फसल में बढ़ोतरी होगी और गुणवता भी बेहतर होगी। लिहाजा समय रहते लहसुन की निराई करनी चाहिए। खेतों में बारिश के बाद पर्याप्त नमी है।

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समय पर निराई करने से लहसुन की पैदावार अच्छी होगी। जिला कुल्लू में करीब 1500 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की पैदावार हो रही है। इन दिनों पौधों की वृद्धि तेजी से होनी शुरू हो रही है। खरपतवार की वजह से फसल के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इससे निजात पाने के लिए किसान को दो या तीन निराई करनी चाहिए। 40 दिन के बाद गांठ बनने और पौधे बड़े होने की दिशा में मिट्टी चढ़ाएं। सूखे की स्थिति में सिंचाई का विशेष ध्यान रखें।
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लहसुन उत्पादक अमित, अनूप, ज्ञान ठाकुर, देवराज, सुशील और यश ने कहा कि वे इन दिनों लहसुन की दूसरी निराई कर रहे है। समय पर बारिश होने के कारण लहसुन पौधों का विकास बेहतर हो रहा है। जिला कुल्लू के लहसुन की मांग दक्षिण भारत में अधिक रहती है और जिले से लहसुन का करोड़ों रुपये का कारोबार होता है।
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कृषि विशेषज्ञों से कर सकते हैं संपर्क
कृषि विभाग के उपनिदेशक पंजवीर ठाकुर ने कहा कि खरपतवार उगने से फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। किसानों को दो-तीन बार फसल की निराई करनी जरूरी है। इससे पौधों का विकास और गुणवता भी अच्छी होती है। किसान समय-समय पर निराई और खाद का डालते रहे। अधिक जानकारी के लिए विभाग के कृषि विशेषज्ञों से संपर्क किया जा सकता है।

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