Himachal: 46 दिनों बाद मनाली-लेह मार्ग पर बर्फ की कई फीट ऊंची दीवारों के बीच से दाैड़े पर्यटक वाहन, वीडियो
मनाली-लेह सड़क के दोनों तक बर्फ की कई फीट ऊंची दीवारों के बीच से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। अब पर्यटक भी इसी मार्ग पर दारचा से बारालाचा व सरचू होकर लेह व लद्दाख जा सकेंगे।
विस्तार
मनाली-लेह सामरिक मार्ग खुलने के पहले ही दिन 291 वाहन लेह की तरफ रवाना हुए। जबकि शिंकुला दर्रा होकर भी लगभग 90 छोटे वाहन लद्दाख की तरफ निकले हैं। सीमा सड़क संगठन के दीपक और हिमांक प्रोजेक्ट ने बीते मंगलवार को मनाली-लेह सड़क मार्ग छोटे वाहनों के लिए बहाल किया है। मंगलवार से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। हालांकि दोपहर बाद बारालाचा दर्रा के आसपास ताजा हिमपात हुआ है।
बावजूद वाहनों की आवाजाही जारी रही। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से लद्दाख क्षेत्र में फंसे सैलानियों को वहां के टैक्सियों से वाया शिंकुला दर्रा होकर मनाली पहुंचाया था। वे गाड़ियां अब सरचू और शिंकुला होकर लद्दाख के लिए वापस निकल रही हैं। डीएसपी केलांग राज कुमार ने बताया कि बुधवार को सरचू होकर 291 लेह और शिंकुला दर्रा होकर करीब 90 वाहन लद्दाख की तरफ निकले हैं। बीआरओ ने अभी बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए एनओसी जारी नहीं किया है। लिहाजा इस मार्ग पर फिलहाल छोटे वाहनों को आवाजाही शुरू हुई है। बारालाचा दर्रा के आसपास सड़क के दोनों किनारों पर बर्फ की ऊंची दीवारें होने से बड़े वाहनों की आवाजाही में दिक्कत हो रही है। बीआरओ के मशीनें इन दीवारों को काट कर सड़क को चौड़ा करने में जुट गई है। हालात सामान्य होते ही बारालाचा सरचू होकर जल्द बड़े वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बीच दुनिया के सबसे ऊंचे दर्रे से होकर गुजरने वाली मनाली-लेह सड़क को खोलने के लिए सीमा सड़क संगठन पर लगातार दबाव बना हुआ था। ऑपरेशन को देखते हुए इस सड़क से जल्द भारतीय सेना के वाहनों को लद्दाख की तरफ भेजना जरूरी हो गया था। लिहाजा सीमा सड़क संगठन ने समुद्रतल से 16,000 कीट से भी अधिक की ऊंचाई से गुजरने वाली इस सड़क को सोमवार को बहाल कर दिया था। लेकिन मार्ग मंगलवार से सभी तरह के वाहनों की आवाजाही के लिए खोला गया। सीमा सड़क संगठन ने 431 किमी लंबी मनाली-लेह एनएच-03 को मंगलवार से आधिकारिक तौर पर ट्रैफिक के लिए खोलने की घोषणा की थी। बीआरओ को अटल टनल नॉर्थ पोर्टल से हिमाचल की अंतिम सीमा सरचू तक सड़क बहाल करने में लगभग 46 दिन का समय लगा। इस दौरान बीआरओ को 30 से 50 फीट तक ऊंचे हिमखंड का मलबा सड़क से हटाना पड़ा। जबकि इस पूरे इलाके में 5 से 8 फीट तक बर्फ हटाने में संगठन को खूब पसीना बहाना पड़ा। बीआरओ के एक अधिकारी ने बताया कि इस बार देरी से सड़क बर्फ हटाने का मुहिम शुरू हुआ, क्योंकि इस बार बर्फबारी ही देरी से हुई।
इस बार 19 दिन देरी से खुला मार्ग
मिशन में करीब 12 मशीनों को तैनात किया गया। रास्ते में 50 फीट तक ऊंची बर्फ की दीवारें से जूझना पड़ा। बर्फ के नीचे दबी सड़क को ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती थी। मेजर रैंक के एक अधिकारी ने बताया कि बर्फ हटाने के मिशन के बीच अचानक हिमपात होने से उन्हें फिर 10 किमी पीछे दारचा से अभियान शुरू करना पड़ा। इस पूरे अभियान की बीआरओ 70 आरसीसी के कैप्टन संजय कृष्णन ने लीड किया था। पिछले साल सामरिक महत्व का मार्ग 23 अप्रैल को खुल गया था। इस बार 19 दिन देरी से खुला है। प्रशासन ने अधिकारिक तौर से इसे 15 नवंबर के बाद बंद कर दिया था, मगर मौसम साफ रहने से दिसंबर तक वाहनों का आवाजाही रही। कारगिल युद्ध के हीरो रहे ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने कहा कि 1999 के कारगिल युद्ध में मनाली-लेह मार्ग ने अहम भूमिका निभाई थी। कहा कि मनाली-लेह मार्ग भारत-पाकिस्तान सीमा तक जोड़ने वाला महत्पूर्ण मार्ग है।
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