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एचपीयू शिमला में पढ़ रहे अफगानी विद्यार्थियों को सता रही परिवार, देश की चिंता
Mon, 16 Aug 2021 07:46 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 16 Aug 2021 07:46 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में पढ़ रहे 17 अफगानी छात्र-छात्राएं बेहद दुखी हैं। उन्हें अपने परिवार, सगे संबंधियों और देश की चिंता सता रही है। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भी एचपीयू के छात्र रहे चुके हैं।
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छात्र वहीद जहीर, मिस्बाउदीन व छात्रा समीरा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अफगानिस्तान में बिगड़े हालात के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में पढ़ रहे 17 अफगानी छात्र-छात्राएं बेहद दुखी हैं। उन्हें अपने परिवार, सगे संबंधियों और देश की चिंता सता रही है।
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यहां एमबीए, एमए राजनीति शास्त्र, लोक प्रशासन जैसे विभागों में डिग्री कर रहे इन विद्यार्थियों का कहना है कि उनके देश में तख्ता पलट होने से अब उनकी मुश्किलें बढ़ गई। उन्हें अपने परिवार की चिंता सता रही है। अब आगे क्या होगा, कब हालात सामान्य होंगे, उनके भविष्य का क्या होगा, यह सोचकर वे परेशान हैं। डिग्री पूरी कर चुके विद्यार्थियों ने भारत सरकार से मांग उठाई कि वे उनका एजूकेशन वीजा बढ़ाएं। बता दें कि अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भी एचपीयू के छात्र रहे चुके हैं। उनका हिमाचल से विशेष लगाव रहा है।
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वीडियो कॉल पर होती है घरवालों से बात
- एमबीए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा समीरा ने कहा कि वह खबरें सुनकर अपने देश के हालात जानने का प्रयास कर रही हैं। परिवार की चिंता है। जीवन में पहली बार ऐसी परिस्थितियां देखी हैं। रोज घरवालों से वीडियो कॉल से बात होती है। अब अफगानिस्तान का भविष्य क्या होगा। बच्चों, महिलाओं और युवाओं की चिंता है। भविष्य को लेकर डर है। उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि हालात सामान्य होने पर ही वापस जाएंगी। तब तक उनके वीजा की अवधि बढ़ाई जाए। कहा कि तालिबानी हमारे ही देश के लोग हैं। उम्मीद है कि वे भी हमारे लोगों के साथ गलत नहीं करेंगे। समीरा ने कहा कि यहां दो छात्राएं और 15 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
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वह हुआ, जो कभी सोचा भी नहीं था: मिस्बाउदीन
छात्र मिस्बाउदीन ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई (जलालाबाद) को आदर्श मानकर सेल्फ फाइनांसिंग सीट पर पढ़ाई करने आया था। अफगानिस्तान में जो हुआ, ऐसा कभी सोचा भी नहीं था। पूरे देश के लोग टेंशन में हैं। कर्फ्यू लग रहा है। जो स्थिति देश में बनी है, पूरे शहर खामोश हैं। हर घंटे घर वालों से बात हो रही है। पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। 25 सालों में भी अमन कायम नहीं हो सका। अब सब बदल गया, कुछ नहीं कहा जा सकता है। अब आगे क्या होगा। विश्वविद्यालय में पढ़ रहे सभी अफगानी छात्र परेशान हैं। पढ़ाई कर लौटेंगे तो वहां जॉब नहीं होगी। भारत सरकार से मांग है कि वीजा की अवधि हालात सामान्य होने तक बढ़ाई जाए।
बहुत समय से लड़ाई को झेल रहे अफगानिस्तान के लोग
पत्रकारिता विभाग दूसरा सेमेस्टर के छात्र वहीद जहीर ने कहा कि घर परिवार, देश की चिंता है, आगे क्या होगा इसका कोई पता नहीं है। भारत सबसे बड़ा धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। हम यही चाहते हैं कि तालिबानी भी लोगों की भावनाओं का ख्याल रखें। इससे तालिबानियों और अफगानिस्तान के लोगों के बीच तालमेल बढ़ेगा, सब सामान्य हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को आगे लेकर जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पर्धा में आना है, शिक्षा में आगे बढ़ना है, इस सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होगी। तालिबानियों ने लंबे समय में जंग को देखा, वहां के लोग भावनात्मक तौर पर मजबूत हैं। इस समस्या से भी बाहर निकल आएंगे।