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जल क्रीड़ा: फाइलों में ही तैर रहे गोबिंदसागर झील में उतरने वाले शिकारे, एनओसी नहीं मिलने से लटका प्रोजेक्ट
Thu, 26 Aug 2021 02:08 AM IST
Krishan Singh
सरोज पाठक, अमर उजाला, बिलासपुर
सरोज पाठक, अमर उजाला, बिलासपुर
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 26 Aug 2021 02:08 AM IST
सार
ऊना जिले के अंदरौली में गोबिंदसागर झील में तो भाखड़ा ब्यास प्रबंधन ने एक किलोमीटर तक जलक्रीड़ाओं की अनुमति दी है, लेकिन बिलासपुर में शिकारे चलाने को मंजूरी नहीं दी जा रही है। करीब 28 साल से एनओसी का इंतजार किया जा रहा है।
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गोबिंदसागर झील(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोबिंदसागर झील में उतरने वाले शिकारे फाइलों में ही तैर रहे हैं। साहसिक जल क्रीड़ाओं के लिए भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की अनुमति न मिलने से यह प्रोजेक्ट लटक गया है। कश्मीर की डल झील की तर्ज पर पर्यटन विभाग ने सालों पहले बिलासुपर की गोबिंदसागर झील में शिकारे चलाने की योजना का खाका बनाया था।
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इस प्रोजेक्ट के लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन बीबीएमसी इसके लिए अनुमति नहीं दे रहा है। इसके लिए बीबीएमबी की दोहरी नीति सामने आई है। ऊना जिले के अंदरौली में गोबिंदसागर झील में तो भाखड़ा ब्यास प्रबंधन ने एक किलोमीटर तक जलक्रीड़ाओं की अनुमति दी है, लेकिन बिलासपुर में शिकारे चलाने को मंजूरी नहीं दी जा रही है। करीब 28 साल से एनओसी का इंतजार किया जा रहा है।
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सुरक्षा की दृष्टि से भी देखा जाए तो अंदरौली की भाखड़ा बांध से दूरी मात्र दस किलोमीटर है, जबकि बिलासपुर की भाखड़ा बांध से दूरी 65 किमी है। बिलासुपर वाटर स्पोर्ट्स और पैराग्लाइडिंग साइट करीब 25 साल पहले की है, लेकिन बीबीएमबी ने किसी भी गतिविधि के लिए साइट विकसित करने के लिए पर्यटन विभाग को सहयोग नहीं किया है।
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रोजगार के साथ पर्यटन स्थलों को मिलनी थी पहचान
पर्यटन विभाग की गोबिंदसागर झील में शिकारे और बोट चलाने की योजना से बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलने के साथ गुमनामी के अंधेरे में खो रहे पर्यटन स्थलों को भी पहचान मिलनी थी। हाल ही में केंद्रीय खेल, युवा सेवाएं एवं सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बिलासपुर को एडवेंचर स्पोर्ट्स हब बनाने की बात कही थी। साथ ही कहा था कि यहां जो साइट्स हैं, वह किसी और जिले में नहीं हैं।
गोबिंदसागर झील में एडवेंचर वाटर स्पोर्ट्स के लिए विभाग ने योजना बनाई है। इसमें जैटी स्कूटर से लेकर जल से संबंधित हर क्रीड़ा शामिल होगी। विशेष यह होगा कि कश्मीर की डल झील की तर्ज पर शिकारे और बोट चलाए जाएंगे। बीबीएमबी की एनओसी न मिलने से यह प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं उतर रहा है। विभाग ने पूरा प्लान तैयार कर लिया है, सिर्फ एनओसी का इंतजार है।
- रितेश पटियाल, सूचना अधिकारी पर्यटन विभाग
गोबिंदसागर झील में साहसिक जल क्रीड़ाओं के लिए भाखड़ा बांध और अन्य सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए एनओसी नहीं दी जा रही है। अंदरौली साइट को किन शर्तों पर अनुमति मिली है, इसकी जानकारी नहीं है। संबंधित कागजात देखकर ही कुछ कहा जा सकता है।
- कमलजीत सिंह,चीफ इंजीनियर बीबीएमबी