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एमओयू होगा साइन: हिमाचल के सहयोग से जिंदा होगी वैदिक नदी सरस्वती

Thu, 20 Jan 2022 05:56 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 20 Jan 2022 05:56 PM IST
सार

पांच दिसंबर को मुख्यमंत्री जयराम की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में एमओयू पर हस्ताक्षर करने की मंजूरी मिली। शुक्रवार को पंचकूला के सेक्टर-एक में राज्य लोक निर्माण विभाग के सभागार में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का यह कार्यक्रम ढाई बजे के बाद होगा।

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adi badri dam MOU sign in presence of cm jairam thakur at panchkula haryana
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अब सरस्वती नदी केवल वैदिक मंत्रों या पौराणिक पुस्तकों में ही नहीं, बल्कि धरातल पर नजर आएगी। देवभूमि हिमाचल के सहयोग से इसे पुनर्जीवित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर शुक्रवार को हिमाचल सरकार की ओर से पंचकूला में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेंगे। हरियाणा में आदि बद्री बांध बन रहा है। इस बांध से लुप्तप्राय सरस्वती नदी में पानी छोड़ा जाएगा। इसके लिए सिरमौर सीमा पर बांध बनाने को हिमाचल जमीन दे रहा है।  

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पांच दिसंबर को मुख्यमंत्री जयराम की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में एमओयू पर हस्ताक्षर करने की मंजूरी मिली। शुक्रवार को पंचकूला के सेक्टर-एक में राज्य लोक निर्माण विभाग के सभागार में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का यह कार्यक्रम ढाई बजे के बाद होगा। हरियाणा और हिमाचल सीमा पर बांध बनाने की योजना पर वर्ष 2018 से काम चल रहा है।
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ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बांध निर्माण से लेकर प्रभावित क्षेत्र के विकास के लिए सड़क, पुल आदि निर्माण योजनाओं पर जो भी खर्च होगा, उसे केंद्र और हरियाणा सरकार वहन करेगी। बांध निर्माण से हरियाणा और हिमाचल के कई क्षेत्रों में बाढ़ से भी निजात मिलेगी। बांध स्थल में 77 हेक्टेयर क्षेत्र हिमाचल का आ रहा है, जबकि हरियाणा में करीब 11 हेक्टेयर है। इसके बनने से प्रदेश की लगभग तीन हजार की आबादी पर असर पड़ेगा। इनके चरागाह स्थल बांध के जलक्षेत्र में आएंगे। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ  इंडिया ने बांध बनाने के लिए सर्वे का काम लगभग पूरा कर दिया है। 
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देवताओं की पूजा में भी सभी नदियों के साथ होता है सरस्वती का आह्वान 
हिमाचल प्रदेश में देवी-देवताओें की पूजा के दौरान पानी के कलश में गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, सिंधु और कावेरी नदियों के साथ सरस्वती नदी का भी आह्वान होता है। वैदिक और पौराणिक रीति की पूजा से ही नहीं, बल्कि लौकिक मंत्रों में भी इस नदी का उल्लेख आता है।

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