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दो प्रधान सचिवों को एसीएस बनाए जाने पर फंस गया पेच, सीएम कार्यालय ने रोकी फाइल
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Updated Sat, 28 Apr 2018 01:50 PM IST
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प्रदेश सरकार की ओर से दो प्रधान सचिवों को अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) बनाने में पेच फंस गया है। हिमाचल में पहले भी एसीएस पद पर पदोन्नतियां विवादों में रहीं हैं। प्रदेश सरकार ने केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की मंजूरी के बिना ही एक दर्जन एसीएस बना दिए।
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दोनों प्रमुख सचिव पहले हुई पदोन्नतियों का हवाला देते हुए अपनी प्रमोशन का दबाव बना रहे हैं, लेकिन सरकार ने फिलहाल पदोन्नति प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
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मुख्यमंत्री कार्यालय ने कार्मिक विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर आपत्ति जता दी है। डीओपीटी से एसीएस के एक एपेक्स और दो एक्स कैडर के तीन पद ही मंजूर हैं। बावजूद इसके वर्ष 2014 में राज्य कैबिनेट ने आधा दर्जन आईएएस अफसरों को एसीएस बनाने की मंजूरी दे दी।
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इसके बाद लगभग 6 आईएएस पदोन्नत हो चुके हैं। इसी को आधार बनाकर दोनों प्रमुख सचिव भी तीस वर्ष का सेवाकाल पूरा होने पर एसीएस बनाए जाने की जुगत में लग गए। कार्मिक विभाग ने इसका प्रस्ताव भी तैयार कर दिया, लेकिन आखिरी समय में मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे रोक लिया है।
प्रधान सचिवों से अधिक हैं एसीएस- सरकार में अतिरिक्त सचिव राम सुभग सिंह, श्रीकांत बाल्दी, मनीषा नंदा, अनिल खाची, तरुण कपूर और निशा सिंह हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उपमा चौधरी, एआर सिहाग, भारती एस सिहाग, तरुण श्रीधर, अरविंद मेहता, संजीव गुप्ता और बीके अग्रवाल केंद्रीय प्रति नियुक्ति पर हैं।
इनकी अपेक्षा वर्तमान सरकार में प्रधान सचिव की संख्या कम है। प्रिंसिपल सेक्रेटरी में आरडी धीमान, संजय गुप्ता, प्रबोध सक्सेना और जेसी शर्मा और ओंकार शर्मा शामिल है।
डीओपीटी से मिलनी है मंजूरी- सरकार ने 23 फरवरी को आईएएस कैडर रिव्यू के लिए केंद्र को प्रस्ताव दिया है। सरकार ने 147 की आईएएस संख्या को 155 करने की मांग की है। साथ ही प्रदेश में एसीएस के पदों पर भी डीओपीटी को स्थिति साफ करनी है।
वर्ष 2014 के बाद एसीएस पदों की संख्या बढ़ाने की कोई मंजूरी केंद्र से नहीं मिली है। मई माह में डीओपीटी की मंजूरी प्रदेश को मिल सकती है। अगर केंद्र ने मौजूदा तीन पदों की संख्या नहीं बढ़ाई तो कई एसीएस को दोबारा प्रधान सचिव बनाना पड़ेगा।