फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   ACS Prabodh Saxena got relief in the matter of putting him in the list of tainted officers

HP High Court: दागी अफसरों की सूची में डालने के मामले में एसीएस प्रबोध सक्सेना को मिली राहत

Mon, 21 Nov 2022 08:33 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 21 Nov 2022 08:33 PM IST
सार

दागी अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनात किए जाने का मामला वर्ष 2014 में उजागर हुआ था। उस समय राज्य सरकार ने संवेदनशील पदों पर तैनात 43 दागी अधिकारियों की सूची अदालत को सौंपी थी। 

विज्ञापन
ACS Prabodh Saxena got relief in the matter of putting him in the list of tainted officers
हिमाचल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त एवं कार्मिक प्रबोध सक्सेना को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। याचिकाकर्ता बलदेव शर्मा ने प्रबोध सक्सेना का नाम दागी अधिकारियों की सूची में डालने की गुहार लगाई थी। मामले पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपना आवेदन वापिस ले लिया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुख्य सचिव ने प्रबोध सक्सेना का नाम जानबूझकर दागी अधिकारियों की सूची में नहीं डाला है। हाईकोर्ट में दागी अधिकारियों की सूची दायर करते समय तत्कालीन मुख्य सचिव को पता था कि प्रबोध सक्सेना के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है। प्रबोध सक्सेना को फायदा पहुंचाने के लिए उन्हें संवेदनशील पदों पर तैनात किया गया है। दलील दी गई थी कि प्रबोध सक्सेना के खिलाफ सीबीआई अदालत दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज हैं। 350 करोड़ के इस मामले में सीबीआई ने सक्सेना के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इसके बावजूद भी उन्हें संवेदनशील पदों पर तैनात किया गया है।

विज्ञापन


वर्ष 2014 में उजागर हुआ था मामला
दागी अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनात किए जाने का मामला वर्ष 2014 में उजागर हुआ था। उस समय राज्य सरकार ने संवेदनशील पदों पर तैनात 43 दागी अधिकारियों की सूची अदालत को सौंपी थी। आठ जनवरी 2014 को राज्य सरकार ने अदालत को अवगत करवाया था कि सभी दागी अधिकारियों को संवेदनशील पदों से हटा दिया गया है। जनहित याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया था कि यदि कोई दागी अधिकारी संवेदनशील पद पर तैनात है तो यह मामला अदालत के समक्ष पूर्ण जानकारी के साथ उठाया जा सकता है।
विज्ञापन


कुमारहट्टी के समीप मल्टी स्टोरी निर्माण मामले की सुनवाई टली
वहीं, कुमारहट्टी के समीप मल्टी स्टोरी निर्माण मामले की सुनवाई 28 नवंबर को निर्धारित की गई है।  6 किलोमीटर में सड़क के दोनों तरफ बड़े पैमाने पर किए गए भवन निर्माण के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

याचिका में आरोप लगाया गया है कि खील-झलाशी गांव से कैंथरी गांव तक बड़े -बड़े भवनों का निर्माण किया गया है। इसके लिए पहाड़ी को काटा गया है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि जान-माल का खतरा भी बना रहता है। मामले पर पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी को नोटिस जारी किए जाएंगे। राज्य सरकार ने दलील दी थी कि वैसे तो टाउन एंड कंटरी प्लानिंग अधिनियम पूरे प्रदेश में लागू है। लेकिन संबंधित क्षेत्र प्लानिंग क्षेत्र में नहीं आता है। इस क्षेत्र में टीसीपी अधिनियम लागू नहीं होता है।  कुमारहट्टी क्षेत्र को नजदीकी प्लानिंग क्षेत्र में मिलाए जाने पर विचार किया जा रहा है, हालांकि इस बारे मंत्रिमंडल की ओर से निर्णय लिया जाएगा।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed