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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   AAP's bumper victory in Punjab 'sweeps' the hopes of Congress for coming back to power

सियासत: हिमाचल में भाजपा-कांग्रेस की उम्मीदों पर ‘झाडू’ चलाने अब दोगुने जोश से उतरेगी ‘आप’

Fri, 11 Mar 2022 11:35 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, शिमला
अनिमेष कौशल, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 11 Mar 2022 11:35 AM IST
सार

आप' की बंपर जीत ने हिमाचल प्रदेश के कार्यकर्ताओं का जोश हाई है। आप का पहला लक्ष्य मई-जून में होने वाले शिमला नगर निगम चुनाव है। उसके बाद इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव में एंट्री की तैयारी है। सतारूढ़ भाजपा और सत्ता वापसी के लिए जोर लगा रही कांग्रेस आप की इस जीत से चिंता में पड़ गई हैं। 

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AAP's bumper victory in Punjab 'sweeps' the hopes of Congress for coming back to power
भाजपा-कांग्रेस - फोटो : social media

विस्तार

पंजाब में आम आदमी पार्टी 'आप' की बंपर जीत ने हिमाचल प्रदेश के कार्यकर्ताओं का जोश हाई है। आप का पहला लक्ष्य मई-जून में होने वाले शिमला नगर निगम चुनाव है। उसके बाद इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव में एंट्री की तैयारी है। सतारूढ़ भाजपा और सत्ता वापसी के लिए जोर लगा रही कांग्रेस आप की इस जीत से चिंता में पड़ गई हैं। दोनों ही दलों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। खासकर घुटन महसूस कर रहे नेताओं को रोक पाना अब दोनों के लिए मुश्किल होने वाला है। वहीं, सूत्रों के अनुसार आप से जुड़ने के लिए कार्यालय के मोबाइल नंबर पर मिस्ड कॉल देने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। ऐसे लोगों से संपर्क करने के लिए आप के वॉलंटियर जुटे हुए हैं। दूसरी ओर ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद पंजाब के कार्यकर्ताओं को हिमाचल में जुट जाने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं। 

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कांग्रेस
लंबे समय तक कांग्रेस का प्रदेश में चेहरा रहे दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बिना विधानसभा चुनाव होगा। पार्टी कई गुटों में बंटी है, मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर पहले ही शीत युद्ध छिड़ा हुआ है। संगठन की सरदारी कब्जाने के लिए भी कई नेताओं ने हाईकमान के पास अपनी गोटियां फिट की हुई हैं।
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भाजपा
पार्टी प्रदेश में कई गुटों में बंटी हुई हैं। उपचुनाव में बड़े स्तर पर यह बात सामने आ चुकी है। भितरघात को रोक पाना सबसे बड़ी चुनौती है। एंटी इनकमबेंसी फैक्टर को भी रोकना होगा। आप की भाजपा के कई प्रभावशाली चेहरों पर नजर हैं। सभी को पार्टी से जोडे रख पाना मुश्किल है। 

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