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Shimla News: एचपीयू के मल्टी फैकल्टी भवन में बनेगा आपदा प्रबंधन केंद्र
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बेसमेंट पर स्थापित होंगी अत्याधुनिक लैब
पूर्व चेतावनी और निगरानी प्रणालियों पर होगा काम
एक्सक्लूसिव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के नवनिर्मित मल्टी फैकल्टी भवन को आपदा प्रबंधन अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय परिसर में 10.09 करोड़ से निर्मित छह मंजिला भवन के भूतल पर सेंटर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इन प्रयोगशालाओं का मुख्य फोकस प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी, जोखिम आकलन और निगरानी प्रणालियों के विकास पर रहेगा।
विश्वविद्यालय के विज्ञान और आपदा अध्ययन केंद्र के डॉ. महेन ने बताया कि भवन के निचले हिस्से को विशेष रूप से अनुसंधान गतिविधियों के लिए चिन्हित किया गया है। यहां आधुनिक उपकरणों और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस लैब विकसित की जाएंगी, जहां भूस्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटना और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने और विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त आंकड़ों की निगरानी पर भी कार्य होगा।
हिमालयी क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए इस केंद्र को विश्वविद्यालय की परियोजनाओं में शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि केंद्र का उद्देश्य केवल शैक्षणिक शोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे राज्य की एजेंसियों और शोध संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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हाल ही में तैयार हुए मल्टी फैकल्टी भवन को बढ़ती शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया गया है। भवन की ऊपरी मंजिलों में विभागों की कक्षाएं और अकादमिक गतिविधियां संचालित होंगी, जबकि बेसमेंट और भूतल को आपदा प्रबंधन अनुसंधान के लिए समर्पित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह केंद्र भविष्य में आपदा अध्ययन, पूर्व चेतावनी तकनीकों और निगरानी प्रणालियों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की पहचान को नई दिशा देगा। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक शोध सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
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पूर्व चेतावनी और निगरानी प्रणालियों पर होगा काम
एक्सक्लूसिव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के नवनिर्मित मल्टी फैकल्टी भवन को आपदा प्रबंधन अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय परिसर में 10.09 करोड़ से निर्मित छह मंजिला भवन के भूतल पर सेंटर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इन प्रयोगशालाओं का मुख्य फोकस प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी, जोखिम आकलन और निगरानी प्रणालियों के विकास पर रहेगा।
विश्वविद्यालय के विज्ञान और आपदा अध्ययन केंद्र के डॉ. महेन ने बताया कि भवन के निचले हिस्से को विशेष रूप से अनुसंधान गतिविधियों के लिए चिन्हित किया गया है। यहां आधुनिक उपकरणों और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस लैब विकसित की जाएंगी, जहां भूस्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटना और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने और विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त आंकड़ों की निगरानी पर भी कार्य होगा।
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हिमालयी क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए इस केंद्र को विश्वविद्यालय की परियोजनाओं में शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि केंद्र का उद्देश्य केवल शैक्षणिक शोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे राज्य की एजेंसियों और शोध संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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हाल ही में तैयार हुए मल्टी फैकल्टी भवन को बढ़ती शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया गया है। भवन की ऊपरी मंजिलों में विभागों की कक्षाएं और अकादमिक गतिविधियां संचालित होंगी, जबकि बेसमेंट और भूतल को आपदा प्रबंधन अनुसंधान के लिए समर्पित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह केंद्र भविष्य में आपदा अध्ययन, पूर्व चेतावनी तकनीकों और निगरानी प्रणालियों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की पहचान को नई दिशा देगा। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक शोध सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।