जिस उम्र में लोगों को दूसरे के सहारे की जरूरत होती है, उस उम्र में गांव के लिए खड़ी चढ़ाई में सड़क निकालकर 99 साल के इस ‘जवान’ ने मिसाल पेश की है। चढ़ियार की मझेड़ा पंचायत के लुगट गांव के सरदारी लाल बिना सरकारी सहायता के दो किलोमीटर सड़क निकालकर हिमाचली माउंटेन मैन ‘मांझी’ बने हैं।
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सरदारी लाल ने बनाई सड़क
- फोटो : अमर उजाला
गांव के लिए खड़ी चढ़ाई वाली धार में पत्थरों और चट्टानों को काटकर स्वयं करीब एक किलोमीटर सड़क निकाली है। अब सड़क से गांव के 25 परिवार लाभ ले रहे हैं। सरदारी लाल ने डंगों के निर्माण और पत्थर तोड़ने के लिए मजदूरों को पांच लाख रुपये का भुगतान भी अपनी जेब से किया है।
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सरदारी लाल ने बनाई सड़क
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ढाई साल पहले सरदारी लाल ने सड़क का काम शुरू किया, जिसे उन्होंने करीब पांच माह पहले पूरा कर लिया। सरदारी लाल 1940 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे, जबकि 15 साल नौकरी करने के बाद वह सेवानिवृत्त हुए। पहले सरदारी लाल को 15 रुपये पेंशन मिलती थी, जो अब बढ़ गई है।
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सरदारी लाल ने बनाई सड़क
- फोटो : अमर उजाला
सड़क न होने के कारण सरदारी लाल ने अपनी पत्नी और बेटे को खोया है। जब उनकी पत्नी प्यूनगला देवी बीमार हुईं, तो सड़क न होने के कारण उन्हें अस्पताल पहुंचाने में देरी हो गई और उन्होंने अस्पताल पहुंचते ही दम तोड़ दिया। सरदारी लाल ने जब सड़क का काम पूरा किया, तो सरकार और प्रशासन ने सड़क बनाने में आए खर्च का भुगतान करने का आश्वासन दिया था, जो कभी पूरा नहीं हुआ।
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सरदारी लाल
- फोटो : अमर उजाला
सरदारी लाल कहते हैं कि उनका हार्ट का ऑपरेशन हुआ है। ऐसे में अब वे सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काट सकते हैं। सरदारी लाल को हिमाचली माउंटेन मैन का नाम स्थानीय लोगों ने दिया है। सरदारी लाल का जीवन भी बिहार के गेहलौर गांव के दशरथ मांझी के जीवन की तरह है। दशरथ मांझी वही इंसान हैं, जिनके संघर्ष पर हॉलीवुड निर्देशक केतन मेहता ने 2005 में फिल्म भी बनाई थी।