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Himachal: परवाणू से 98 फीसदी चूल्हा उद्योगों ने किया पलायन, जानें वजह

Mon, 09 Dec 2024 12:39 PM IST
Krishan Singh आदित्य सोफत, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
आदित्य सोफत, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Published by: Krishan Singh Updated Mon, 09 Dec 2024 12:39 PM IST
सार

प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र परवाणू से चूल्हा उद्योगों का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म हो गया है। देश को 60 फीसदी चूल्हा उपलब्ध करवाने वाले क्षेत्र में अब केवल दो उद्योग रह गए हैं।

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98% of stove industries migrated from Parwanoo, know the reason
उद्योग(सांकेतिक) - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र परवाणू से चूल्हा उद्योगों का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म हो गया है। देश को 60 फीसदी चूल्हा उपलब्ध करवाने वाले क्षेत्र में अब केवल दो उद्योग रह गए हैं। कारण यह है कि 2015 के बाद से अब तक प्रदेश को औद्योगिक पैकेज नहीं मिल पाया है। कोरोना के बाद हालात और खराब हो गए। ऐसे में परवाणू में लगे 98 फीसदी चूल्हा उद्योग दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं। आलम यह है कि इस ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया है। ये चूल्हा उद्योग गुजरात, पंजाब समेत अन्य राज्यों में स्थापित हो गए हैं। प्रदेश में बिजली की महंगी दरों के कारण सबसे पहले चूल्हा उद्योगों ने यहां से पलायन करना शुरू किया। जबकि हिमाचल अन्य राज्यों को बिजली उपलब्ध करवाता है।

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लेकिन यहां पर बिजली की बढ़ती दरों के कारण उद्योग मालिकों ने उद्योग शिफ्ट कर दिए। यही नहीं, गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) आने के बाद सभी दरें एक सामान हो गईं। इससे पहले उद्योगों को प्रदेश में टैक्स में काफी रियायत मिलती थी। इसी के साथ लंबे समय से केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की ओर से परवाणू के लिए कोई योजना न तैयार करवाने के कारण चूल्हा उद्योगों के मालिकों ने पलायन करना ठीक समझा। गौर रहे कि वर्ष 2002-03 में परवाणू को बड़ा औद्योगिक पैकेज मिला था। औद्योगिक पैकेज मिलने के बाद सबसे पहले यहां पर दूसरे राज्यों से चूल्हा उद्योग आए। क्षेत्र के कामली समेत अन्य जगहों पर चूल्हा उद्योग लगे। पांच वर्षों में परवाणू में करीब 87 छोटे-बड़े चूल्हा उद्योग स्थापित हो गए। लेकिन वर्तमान में केवल दो चूल्हा उद्योग रह गए हैं।

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कच्चा माल मंगवाने में आती थी अधिक लागत
परवाणू में चूल्हा उद्योगों में उपयोग होने वाला कच्चा माल अन्य राज्यों से आता था। ऐसे में ट्रांसपोर्ट में काफी खर्च आता था। इसी के साथ जब माल तैयार होता था तो भी बेचने के लिए उद्योग मालिकों को अधिक लागत आ रही थी। इस कारण भी चूल्हा उद्योग दूसरी जगह शिफ्ट हो गए। ये उद्योग अधिकतर उन जगहों में शिफ्ट जहां पर कच्चा माल भी कम लागत में उपलब्ध हो रहा है।

एक नहीं, कई कारण रहे पलायन के
परवाणू में बड़ी संख्या में चूल्हा उद्योग थे। लेकिन अब नाममात्र ही रह गए हैं। कारण यह है कि परवाणू में ट्रांसपोर्टेशन की काफी दिक्कतें आती थीं। सामान को लाने और ले-जाने के लिए भी अधिक कीमत अदा करनी पड़ती थी। दूसरी ओर जीएसटी की वजह से भी उद्योगों ने पलायन किया। इसी के साथ परवाणू को मिले पैकेज में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना के दौरान एक दम मांग बढ़ी। इसके बाद जब कोटा पूरा हो गया तो उद्योगों की तरफ मुड़कर नहीं देखा गया।-राकेश भाटिया, अध्यक्ष, लघु उद्योग संघ परवाणू।  इस बारे में प्रधान सचिव उद्योग आरडी नजीम ने बताया कि अभी इसकी जानकारी नहीं है। इस बारे में जानकारी ली जाएगी।

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