रिकॉर्ड बारिश से 923 सड़कें बंद, सेब को भारी नुकसान, 52 शहरों में नहीं चली बसें
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मूसलाधार बारिश से हिमाचल में एक दर्जन के करीब छोटे बड़े पुल ध्वस्त हो गए हैं। एक ही दिन में लोक निर्माण विभाग को 46050.96 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
लोक निर्माण विभाग की शिमला जोन में सर्वाधिक सड़कें बंद हुई हैं। यहां 353 सड़कों को भारी नुकसान हुआ है और यहां 15472.23 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। इन सड़कों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद है।
कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
इसी तरह हमीरपुर जोन में 164 सड़कें बंद हैं। इस जोन में 7506.05 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। मंडी जोन में 225 सड़कें बंद होने से लोक निर्माण विभाग को 8443.65 लाख का नुकसान हुआ है। कांगड़ा जोन में 151 सड़कें बंद हैं। यहां 12698.21 लाख रुपये नुकसान होने का अनुमान है।
लोक निर्माण विभाग ने कर्मचारियों और अफसरों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। सड़कों को बहाल करने के लिए विभाग ने 624 मशीनरियां सड़कों से मलबा हटाने में लगा दी हैं। इसमें सर्वाधिक मशीनें शिमला जोन 265 डोजर और जेसीबी लगाई हैं।
इसी तरह मंडी जोन में 82, कांगड़ा 82 और हमीरपुर में 178 मशीनरियों से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है। लोक निर्माण विभाग का दावा है कि कुल बंद सड़कों में से आधी सड़कें सोमवार शाम या मंगलवार सुबह तक यातायात के लिए बहाल कर दी जाएंगी।
हिमाचल में फसलों और सेब को भारी नुकसान
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश से फसलों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। कई जगहों पर सेब के पेड़ भूस्खलन की चपेट में आ गए और गिर गए। इसके अलावा कई क्षेत्रों में बागीचों में तोड़ी गई सेब की फसल भी मार्केट तक समय पर नहीं पहुंचाई जा सकी।
बागवान मार्केट में नुकसान होने के लिए भी चिंतित थे। हालांकि, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब के फलों का आकार बढ़वाने के लिए यह बारिश अच्छी भी मानी जा रही है। मक्की की फसल के लिए भी बारिश का होना अच्छा माना जा रहा है।
इससे खाद ठीक से मिट्टी में मिलेगी और इसका लाभ फसल को होगा। हालांकि, कई क्षेत्रों में खेतों में भूस्खलन होने से भी मक्की और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है।
कृषि विभाग के निदेशक देसराज ने कहा कि सभी जिला कृषि अधिकारियों से दो दिन के भीतर फसल के नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि मूसलाधार बारिश से कई जिलों में खेत बहने और सेब के पौधे गिरने की सूचना मिली है।
हिमाचल के 52 शहरों में नहीं चलीं बसें
नदी-नाले उफान पर होने से प्रदेश के 52 शहरों में परिवहन के अलावा निजी बस सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित रहीं। दोपहर तक शहरों में एक भी बस नहीं चली।
परिवहन निगम के कुल 2768 रूटों में से करीब 2000 रूट प्रभावित रहे। बसों को कंट्रोल करने वाला एचआरटीसी ऑपरेशन ग्रुप ठप हो गया। शिकायतों के लगातार अंबार लगने से निगम के अफसरों में अफरातफरी का माहौल रहा। एक ही दिन में निगम को एक करोड़ के आसपास नुकसान हुआ है।
चालकों को जोखिम न उठाने के निर्देश
प्रदेश के सभी लोकल रूट बंद रहे। परिवहन निगम के सीजीएम एचके गुप्ता ने बताया कि मूसलाधार बारिश से शहरों में परिवहन सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित रहीं। लांग रूटों पर गईं बसें भी सड़कों पर फंसी रहीं। दोपहर बाद कई शहरों में सेवाएं शुरू की गईं।
परिवहन निगम ने चालकों को किसी भी तरह का जोखिम न लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कच्ची सड़कें दलदल में बदल गई हैं। ऐेसे में इन सड़कों पर सफर करना खतरे से खाली नहीं है।