{"_id":"5a32b1114f1c1bee688c1adc","slug":"81513271569-shimla-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूूजीसी से एचआरडी के लिए ग्रांट जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूूजीसी से एचआरडी के लिए ग्रांट जारी
Updated Thu, 14 Dec 2017 10:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में स्थित यूजीसी के मानव संसाधन विकास केंद्र को यूजीसी की रुकी रूटीन की एक करोड़ की ग्रांट जारी हो चुकी है। केंद्र की निदेशक प्रो. किरण रेखा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी समय से यूजीसी को पिछली जारी ग्रांट का 2016-17 का उपयोगिता प्रमाण पत्र विवि की लेखा परीक्षण विभाग से सत्यापित करने के बाद तीन माह के भीतर भेज दिया गया था।
वर्ष का यूटिलाइजेशन सर्टिफि केट भी विश्वविद्यालय के लेखा-परीक्षण विभाग की ओर से सत्यापन के पश्चात तीन माह के भीतर भेज दिया गया था। केंद्र की निदेशक डॉ. किरण रेखा ने बताया कि मंत्रालय और यूजीसी की ओर से तय की गई बजट की सीमा और रिफ्रेशर तथा ओरिएंटेशन प्रोग्राम के नए नियमों को हटाने और पूर्व की तरह से चलाए जाने के मामले को लेकर 11 से 13 अक्तूबर 2017 तक देश भर के मानव संसाधन विकास केंद्र के निदेशकों की विशेष मूल्यांकन समिति के साथ बैठक हुई थी। अधिकतर निदेशकों के मतानुसार वार्षिक अनुदान मात्र एक करोड़ तक सीमिति न हो कर वास्तविक व्यय के आधार पर जारी किया जाने का मामला प्रमुखता से उठाया गया। पूर्व में इन केंद्रों (अकादमिक स्टॉॅफ कॉलेजों) की स्थापना के समय से निर्धारित था। प्रो. रेखा ने कहा कि यूजीसी वितरित किए गए समस्त कार्यक्रम (ओरिएंटेशन, रिफ्रे शर और अन्य कोर्स) तभी संपन्न किए जा सकते हैं। प्रो. किरण रेखा ने कहा कि नए नियमों से पेश आ रही परेशानियों को मानव संसाधन विकास केंद्र निदेशकों ने एमएचआरडी और यूजीसी के समक्ष उठा दिया है। उम्मीद है कि इस पर जल्द उचित फैसले होंगे।
विज्ञापन
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में स्थित यूजीसी के मानव संसाधन विकास केंद्र को यूजीसी की रुकी रूटीन की एक करोड़ की ग्रांट जारी हो चुकी है। केंद्र की निदेशक प्रो. किरण रेखा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी समय से यूजीसी को पिछली जारी ग्रांट का 2016-17 का उपयोगिता प्रमाण पत्र विवि की लेखा परीक्षण विभाग से सत्यापित करने के बाद तीन माह के भीतर भेज दिया गया था।
वर्ष का यूटिलाइजेशन सर्टिफि केट भी विश्वविद्यालय के लेखा-परीक्षण विभाग की ओर से सत्यापन के पश्चात तीन माह के भीतर भेज दिया गया था। केंद्र की निदेशक डॉ. किरण रेखा ने बताया कि मंत्रालय और यूजीसी की ओर से तय की गई बजट की सीमा और रिफ्रेशर तथा ओरिएंटेशन प्रोग्राम के नए नियमों को हटाने और पूर्व की तरह से चलाए जाने के मामले को लेकर 11 से 13 अक्तूबर 2017 तक देश भर के मानव संसाधन विकास केंद्र के निदेशकों की विशेष मूल्यांकन समिति के साथ बैठक हुई थी। अधिकतर निदेशकों के मतानुसार वार्षिक अनुदान मात्र एक करोड़ तक सीमिति न हो कर वास्तविक व्यय के आधार पर जारी किया जाने का मामला प्रमुखता से उठाया गया। पूर्व में इन केंद्रों (अकादमिक स्टॉॅफ कॉलेजों) की स्थापना के समय से निर्धारित था। प्रो. रेखा ने कहा कि यूजीसी वितरित किए गए समस्त कार्यक्रम (ओरिएंटेशन, रिफ्रे शर और अन्य कोर्स) तभी संपन्न किए जा सकते हैं। प्रो. किरण रेखा ने कहा कि नए नियमों से पेश आ रही परेशानियों को मानव संसाधन विकास केंद्र निदेशकों ने एमएचआरडी और यूजीसी के समक्ष उठा दिया है। उम्मीद है कि इस पर जल्द उचित फैसले होंगे।
विज्ञापन