80 हजार श्रद्धालुओं ने लगाई डल में डुबकी
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18 दिन और 80 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं की तादाद। आखिर लंबी यात्रा का दौर सोमवार को थम गया। सभी पड़ाव खाली हो गए और मणिमहेश से यात्री एक साल के लिए विदा लेकर लौट आए हैं। इस बार की मणिमहेश यात्रा इतिहास में दर्ज हो गई है। यात्रा में पशु बलि पर प्रतिबंध का पूरा असर दिखा। पूरी यात्रा के दौरान एक भी मवेशी नहीं काटा गया। वर्ष 2014 में हुई मणिमहेश यात्रा के दौरान एक हजार से ज्यादा मेंढे़ बलि चढ़ाए गए थे।
भविष्य में मणिमहेश यात्रा वर्ष 2015 पशुबलि न होने के लिए हमेशा याद रखी जाएगी। 80 हजार से ज्यादा भक्तों ने यात्रा में हिस्सा लिया है। इनमें दो हजार 129 बच्चे और नौ हजार 738 महिलाएं शामिल थीं। 63 हजार 472 पुरुषों ने यात्रा पूरी की। यात्रा करने वालों में अधिकतर की उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच रही। प्रशासन ने बीस सितंबर तक अधिकारिक रूप से 75 हजार 339 लोगों का पंजीकरण किया है। 21 सितंबर को प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों यात्री मणिमहेश पहुंचे थे।
सबसे कम मौतों के लिए जानी जाएगी यात्रा
प्रशासन ने पंजीकरण की व्यवस्था को अलग-अलग केंद्र बनाए थे। कुछ यात्री बिना पंजीकरण के भी मणिमहेश पहुंचे। बिना पंजीकरण के यात्रा करने वालों में स्थानीय लोग, शिव के गूर और उनके साथ चलने वाले अनुयायी समेत वे लोग जिन्होंने बस में यात्रा की शामिल रहे हैं।
प्रशासन ने यात्रा को लेकर पुख्ता प्रबंध किए थे। 850 पुलिस कर्मचारी मणिमहेश की सुरक्षा में तैनात किए गए थे। एसडीएम भरमौर जितेंद्र कंवर ने कहा कि यात्रा के लिए सभी प्रबंध सफल रहे हैं। मौसम का पूरा साथ मिला है। प्रशासन ने बेहतर ढंग से यात्रा को संपन्न करवाया है। स्वयंसेवी संस्थाओं और लोगों का यात्रा के लिए भरपूर सहयोग मिला।
मणिमहेश यात्रा के दौरान इस बार तीन मौतें हुई हैं। इनमें से दो की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। एक युवक की लाश नाले से बरामद हुई थी। इसे बाद में पहचान के लिए चंबा अस्पताल में रखा था। मणिमहेश में पिछली यात्राओं के मुकाबले मौत का यह आंकड़ा सबसे कम है।
मणिमहेश यात्रा से पहली बार ट्रस्ट को सीधा फायदा पहुंच रहा है। ट्रस्ट की हिस्सेदारी न सिर्फ चढ़ावे में है, बल्कि लंगरों और कुछ मंदिरों के बाहर रखे दानपात्रों से भी आय एकत्र हुई है। इससे पूर्व ट्रस्ट को चढ़ावे से किसी तरह की हिस्सेदारी नहीं थी।
शाही स्नान पर 20 हजार पहुंचे भोलेनाथ के द्वार
भरमौर (चंबा)। शाही स्नान पर करीब बीस हजार लोगों ने डल झील में डुबकी लगाई। रविवार दोपहर से डल पर हजारों श्रद्धालु जमा हो चुके थे। दोपहर बाद बर्फबारी की वजह से यात्रा प्रभावित रही, लेकिन सोमवार सुबह से दोपहर बाद तक डल झील में स्नान के लिए यात्री पहुंचते रहे। दोपहर बाद डल झील के आसपास अस्थायी तौर पर यात्रियों के रहने और खाने के लिए बनाए गए टेंट भी कमेटियों ने उखाड़ लिए हैं।
सोमवार तड़के मणिमहेश शाही स्नान पर हजारों शिव भक्तों ने डल झील में डुबकी लगाई तथा चतुर्मुखी लिंग के पास पूजा-अर्चना की। रविवार को डल झील पर तीन इंच ताजा हिमपात के बावजूद अष्टमी स्नान पर अधिकतर श्रद्धालु डल झील और गौरीकुंड में जुटे रहे। सोमवार तड़के जैसे ही स्नान की पर्वी शुरू हुई तो श्रद्धालुओं ने लौटना शुरू कर दिया। अधिकतर श्रद्धालु डल झील में स्नान के बाद वापस लौट चुके हैं। यात्रा के दौरान स्वयंसेवी संस्था के लंगर भी अपना समान समेट चुके हैं।
अस्थायी तौर पर लगे ढाबे संचालकों ने भी सामान समेटना शुरू कर दिया है। उधर, अतिरिक्त दंडाधिकारी भरमौर सतीश चौधरी का कहना है कि मणिमहेश यात्रा शांति पूर्वक संपन्न हुई है। यात्रा में प्रशासन ने सुरक्षा व स्वास्थ्य के सभी प्रबंध किए थे, जो कारगर रहे हैं। मौसम की वजह से रविवार को कुछ समय के लिए दिक्कत हुई थी, लेकिन सोमवार को मौसम साफ रहने से यात्री सकुशल हड़सर और भरमौर तक लौट आए हैं।