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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   4500 People of Churah Block of Chamba are Still Illiterate.

चौंकाने वाला खुलासा, नाम तक लिखना नहीं जानते इस जिले के हजारों लोग

Thu, 24 Nov 2016 11:04 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, चंबा
राकेश शर्मा/अमर उजाला, चंबा Updated Thu, 24 Nov 2016 11:04 AM IST
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4500 People of Churah Block of Chamba are Still Illiterate.

महिलाओं की साक्षरता दर पर चिंतित केंद्र सरकार करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई है। हिमाचल के चंबा जिले के हजारों लोग अपना नाम लिखना तक नहीं जानते हैं।

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करीब पांच साल पहले शुरू हुए इस अभियान का यह सच जिले के चुराह ब्लॉक में सामने आया है। अकेले इस ब्लॉक में ही 4500 लोग ऐसे हैं, जो अपना नाम तक नहीं लिख पाते। इनकी आयु 15 साल से अधिक है और इनकी गिनती साक्षर भारत अभियान में की गई है।
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वर्ष 2011 में शुरू हुए अभियान में 19,528 लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया था। निरक्षरों को तीसरी श्रेणी तक शिक्षा देने की रूपरेखा बनाई गई। ओपन स्कूल के माध्यम से बाकायदा प्रमाणपत्र दिए जाने थे।

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पांच साल बाद भी हजारों लोग अनपढ़

4500 People of Churah Block of Chamba are Still Illiterate.

चुराह में लक्ष्य पाने के लिए पंचायत में प्रेरकों की मदद ली गई। ब्लॉक की सभी 42 पंचायतों में 84 प्रेरक रखे गए। इनका इस्तेमाल घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने में किया गया। हर छह माह बाद निरक्षरों की परीक्षा करवाने का प्रबंध था।

पास होने वाले निरक्षर को अगली श्रेणी में गिना जाना था, लेकिन पिछले पांच साल में चुराह ब्लॉक में 15081 लोगों को शिक्षा से जोड़ा जा सका है। ये लोग भी अभी दूसरी श्रेणी की परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट की मियाद मार्च 2017 में खत्म होगी।

उम्मीद है आगे चलता रहेगा मिशन : जय सिंह

4500 People of Churah Block of Chamba are Still Illiterate.

चुराह ब्लॉक में साक्षर भारत मिशन के सदस्य सचिव जय सिंह ने बताया कि अब तक 15 हजार से ज्यादा लोगों को साक्षरता से जोड़ा है। कोशिश की जा रही है कि इन लोगों की तीसरी, पांचवीं और आठवीं तक परीक्षा ओपन स्कूल से करवाई जाए। यह मिशन ऐसे ही चलता रहे। जो लोग मिशन से नहीं जुड़े हैं, उनके लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

मार्च 2017 में खत्म होगी मिशन की मियाद
साक्षर भारत मिशन अभियान दो साल के लिए शुरू किया गया था। बाद में लक्ष्य पूरा न होने से इसे आगे बढ़ाया जाता रहा है। मार्च 2017 में इसकी मियाद खत्म होगी। ऐसे में लक्ष्य अधूरा होने से एक बार फिर मिशन को आगे बढ़ाने की मांग जोर पकड़ती नजर आ रही है।

नहीं छपी हैं अभी तीसरी श्रेणी की किताबें
पांच साल बाद तीसरी श्रेणी तक पहुंचे चुराह के 19,528 लोगों को शिक्षित करने के लिए किताबें ही नहीं हैं। इनकी छपाई दिल्ली में होने की बात कही जा रही है। इसके बाद किताबें दिसंबर के बाद चंबा पहुंचेंगी। मार्च में जब प्रोजेक्ट खत्म होने वाला होगा, तब इन्हें मिशन से जुड़े लोगों में बांटा जाएगा।

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