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टायफायड बुखार की चपेट में शहरवासी
Updated Tue, 28 Aug 2018 12:28 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासी आजकल टायफायड की चपेट में आने लगे हैं। इस बीमारी की चपेट में आने से मरीज को हाइग्रेड फीवर, पेट में दर्द, लीवर का बढ़ना, सिरदर्द सहित दस्त लगने जैसी समस्या पेश आती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर मरीज अस्पताल नहीं पहुंचते हैं तो यह बीमारी विकराल रूप ले सकती है। जबकि, इस बीमारी की जद्द में आए मरीज की जान को भी खतरा पैदा हो सकता है।
आईजीएमसी मेडिसन के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. प्रेम मच्छान का कहना है कि टायफायड एक तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो दूषित भोजन और पानी के सेवन से फैलता है। आईजीएमसी की मेडिसन ओपीडी में रोजाना टायफाइड फीवर के बाद लंबी लाइनों में खड़े रहकर विभिन्न ओपीडी में बीस से तीस मरीज उपचार करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। जबकि, डॉक्टर इन मरीजों की स्थिति देखने के बाद अस्पताल में दाखिल भी कर रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो यह खतरनाक बुखार है। समय पर उपचार न मिल पाने के कारण मरीज की हालत खराब भी हो सकती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी की चपेट में आने पर व्यक्ति कमजोर और चिड़चिड़ा बन रहा है। वहीं, समय पर नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान और अस्पताल पहुंचने पर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
पेट का अल्सर भी फट सकता है
मेडिसन विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. प्रेम मच्छान कहते हैं कि इस दौरान मरीज ब्रूफिन दवा भी खा लेते हैं, जो खतरनाक है। इससे पेट का अल्सर भी फट सकता है। इसकी जगह मरीज पैरासिटामोल की दवा चिकित्सक की सलाह पर ले सकता है। जबकि सेफ्ट्राइक्सोन, क्वीनानोनस और एजीथ्रोमाइसिन दवा चिकित्सक इस दौरान देते हैं।
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बरसात का पानी न होने दे जमा
इस सीजन में डेंगू और स्क्रब टायफस के केस भी सामने आए हैं। डॉक्टराें का कहना है कि घरों के सामने बरसात का पानी जमा न होने दें, जिसके कारण मच्छर पैदा न हो सकें। इसके अलावा स्क्रब टायफस के मरीजों को अलाइजा टेस्ट करवाना चाहिए जिससे कि समय रहते मरीज बीमारी का उपचार कर सके।
शिमला। शहरवासी आजकल टायफायड की चपेट में आने लगे हैं। इस बीमारी की चपेट में आने से मरीज को हाइग्रेड फीवर, पेट में दर्द, लीवर का बढ़ना, सिरदर्द सहित दस्त लगने जैसी समस्या पेश आती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर मरीज अस्पताल नहीं पहुंचते हैं तो यह बीमारी विकराल रूप ले सकती है। जबकि, इस बीमारी की जद्द में आए मरीज की जान को भी खतरा पैदा हो सकता है।
आईजीएमसी मेडिसन के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. प्रेम मच्छान का कहना है कि टायफायड एक तरह का बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो दूषित भोजन और पानी के सेवन से फैलता है। आईजीएमसी की मेडिसन ओपीडी में रोजाना टायफाइड फीवर के बाद लंबी लाइनों में खड़े रहकर विभिन्न ओपीडी में बीस से तीस मरीज उपचार करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। जबकि, डॉक्टर इन मरीजों की स्थिति देखने के बाद अस्पताल में दाखिल भी कर रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो यह खतरनाक बुखार है। समय पर उपचार न मिल पाने के कारण मरीज की हालत खराब भी हो सकती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी की चपेट में आने पर व्यक्ति कमजोर और चिड़चिड़ा बन रहा है। वहीं, समय पर नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान और अस्पताल पहुंचने पर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
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पेट का अल्सर भी फट सकता है
मेडिसन विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. प्रेम मच्छान कहते हैं कि इस दौरान मरीज ब्रूफिन दवा भी खा लेते हैं, जो खतरनाक है। इससे पेट का अल्सर भी फट सकता है। इसकी जगह मरीज पैरासिटामोल की दवा चिकित्सक की सलाह पर ले सकता है। जबकि सेफ्ट्राइक्सोन, क्वीनानोनस और एजीथ्रोमाइसिन दवा चिकित्सक इस दौरान देते हैं।
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बरसात का पानी न होने दे जमा
इस सीजन में डेंगू और स्क्रब टायफस के केस भी सामने आए हैं। डॉक्टराें का कहना है कि घरों के सामने बरसात का पानी जमा न होने दें, जिसके कारण मच्छर पैदा न हो सकें। इसके अलावा स्क्रब टायफस के मरीजों को अलाइजा टेस्ट करवाना चाहिए जिससे कि समय रहते मरीज बीमारी का उपचार कर सके।