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टैक्स और पानी बिल न भरने वालों पर सख् ती की तैयारी
Updated Tue, 06 Mar 2018 10:24 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में प्रॉपर्टी टैक्स, पानी के बिल और नगर निगम की संपत्तियों के बदले लीज मनी न चुकाने वाले डिफॉल्टरों पर सख्त कार्रवाई होने जा रही है। नगर निगम आयुक्त ने संबंधित शाखाओं से डिफॉल्टरों का रिकॉर्ड तलब किया है। सोमवार को इस बारे में टैक्स, जल शाखा और इस्टेट ब्रांच के अधिकारियों के साथ अहम बैठक होने जा रही है। निगम आयुक्त रोहित जमवाल ने तीनों ही शाखाओं के अधिकारियों से डिफॉल्टरों की सूची साथ लाने को कहा है।
निगम आयुक्त का कहना है कि डिफॉल्टरों से अब सख्ती की जाएगी। ये पैसा न चुकाकर निगम को चपत लगा रहे हैं। अकेले टैक्स ब्रांच में ही करीब 1800 ऐसे डिफॉल्टर हैं जिन्हें करीब पांच करोड़ रुपये टैक्स भरना है। इसमें सीपीडब्ल्यूडी समेत कई सरकारी महकमे भी शामिल हैं जो 2014 के बाद से नियमित टैक्स नहीं चुका रहे हैं।
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पानी बिल, किराया न भरने वालों की लिस्ट भी तलब
इसके अलावा कई निजी होटलों समेत कई भवन मालिकों के पानी के बिल भी जमा नहीं हो पाए हैं। निगम इन पर मेहरबान है। बिल जमा न होने पर आम जनता के कनेक्शन तो कटते हैं, लेकिन इन्हें पानी की सप्लाई जारी रहती है। बिल डिफॉल्टरों की भी सूची तलब की गई है। इसके अलावा नगर निगम की दुकानें, जमीनों के इस्तेमाल के बदले कई साल से लीज मनी या किराया न भरने वालों की भी लिस्ट मांगी गई है।
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कहीं इस बार भी हवा न हो जाएं निगम के दावे
शहर में प्रॉपर्टी टैक्स और पानी के बिल न देने वालों के खिलाफ निगम पहले ही नोटिस जारी करता रहा है। लेकिन आज तक न तो किसी की संपत्ति अटैच की गई और न ही किसी रसूखदार का कनेक्शन कटा है। हर बार नोटिस और बैठकों तक ही निगम की कार्रवाई सीमित रह जाती है। इसी के चलते टैक्स, पानी बिल के डिफॉल्टरों की सूची लंबी होती जा रही है। देखना होगा इस बार निगम कितनी वसूली कर पाता है।
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शिमला। शहर में प्रॉपर्टी टैक्स, पानी के बिल और नगर निगम की संपत्तियों के बदले लीज मनी न चुकाने वाले डिफॉल्टरों पर सख्त कार्रवाई होने जा रही है। नगर निगम आयुक्त ने संबंधित शाखाओं से डिफॉल्टरों का रिकॉर्ड तलब किया है। सोमवार को इस बारे में टैक्स, जल शाखा और इस्टेट ब्रांच के अधिकारियों के साथ अहम बैठक होने जा रही है। निगम आयुक्त रोहित जमवाल ने तीनों ही शाखाओं के अधिकारियों से डिफॉल्टरों की सूची साथ लाने को कहा है।
निगम आयुक्त का कहना है कि डिफॉल्टरों से अब सख्ती की जाएगी। ये पैसा न चुकाकर निगम को चपत लगा रहे हैं। अकेले टैक्स ब्रांच में ही करीब 1800 ऐसे डिफॉल्टर हैं जिन्हें करीब पांच करोड़ रुपये टैक्स भरना है। इसमें सीपीडब्ल्यूडी समेत कई सरकारी महकमे भी शामिल हैं जो 2014 के बाद से नियमित टैक्स नहीं चुका रहे हैं।
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पानी बिल, किराया न भरने वालों की लिस्ट भी तलब
इसके अलावा कई निजी होटलों समेत कई भवन मालिकों के पानी के बिल भी जमा नहीं हो पाए हैं। निगम इन पर मेहरबान है। बिल जमा न होने पर आम जनता के कनेक्शन तो कटते हैं, लेकिन इन्हें पानी की सप्लाई जारी रहती है। बिल डिफॉल्टरों की भी सूची तलब की गई है। इसके अलावा नगर निगम की दुकानें, जमीनों के इस्तेमाल के बदले कई साल से लीज मनी या किराया न भरने वालों की भी लिस्ट मांगी गई है।
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कहीं इस बार भी हवा न हो जाएं निगम के दावे
शहर में प्रॉपर्टी टैक्स और पानी के बिल न देने वालों के खिलाफ निगम पहले ही नोटिस जारी करता रहा है। लेकिन आज तक न तो किसी की संपत्ति अटैच की गई और न ही किसी रसूखदार का कनेक्शन कटा है। हर बार नोटिस और बैठकों तक ही निगम की कार्रवाई सीमित रह जाती है। इसी के चलते टैक्स, पानी बिल के डिफॉल्टरों की सूची लंबी होती जा रही है। देखना होगा इस बार निगम कितनी वसूली कर पाता है।