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हिमाचल में पहली बार होगा प्रयोग: थ्रीडीआई तकनीक देगी बारिश, बाढ़ का संकेत
Thu, 12 May 2022 10:31 AM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 12 May 2022 10:31 AM IST
सार
थ्रीडीआई तकनीक से बारिश, बर्फबारी और ग्लेशियरों के नदी में गिरने से बढ़ने वाले जलस्तर और बाढ़ के संकेत दो से तीन दिन पहले ही मिलेगें।
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बारिश (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
उत्तराखंड के बाद अब प्रदेश में पहली मर्तबा सर्दियों और मानसून के दिनों में भारी बारिश के कारण बदलते हालातों से निपटने में थ्रीडीआई तकनीक कारगर साबित होगी। बारिश, बर्फबारी और ग्लेशियरों के नदी में गिरने से बढ़ने वाले जलस्तर और बाढ़ के संकेत इस तकनीक से दो से तीन दिन पहले ही मिलेगें। वर्ल्ड बैंक प्रपोजल में इसे पायलट आधार पर तैयार किया गया है। नीदरलैंड और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का ये मॉडल है। 31 मई तक इस प्रपोजल को सौंपने का नीदरलैंड को समय दिया गया है।
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होली, भरमौर से लेकर बग्गा तक चमेरा द्वितीय, तृतीय सहित दर्जनों जल विद्युत परियोजनाएं हैं। सर्दियों और मानसून के दौरान भारी बारिश प्रलयकारी रूप धारण कर बड़ी त्रासदी का कारण न बने, इसलिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। मौसम विज्ञान से मिलने वाले आंकड़ों को इस तकनीक में फीड करने पर अनुमान लगाया जाएगा कि आगामी दिनों में जलाशयों में जलस्तर कितना बढ़ेगा और कितनी बारिश होगी। इसमें जलविद्युत परियोजना प्रबंधन का भी इसमें सहयोग लिया जाएगा।
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जलविद्युत परियोजनाओं के डैम में एकत्रित होने वाले पानी का जलस्तर पता लगाकर और कितनी मात्रा में पानी छोड़ा जाएगा। इस बारे में सॉफ्टवेयर में कर्मचारियों की ओर से अंकित किया जाएगा। सॉफ्टवेयर में डाटा अंकित करते ही यह जानकारी प्रशासन, जिला आपातकाल अथॉरिटी सहित अन्य के पास पहुंचेगी।
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इससे नदियों के किनारे रहने वाले लोगों, नदी- नालों से रेत बजरी निकलने वाले लोगों की जिंदगियों को बचाया जा सकेगा। इसी क्रम में नीदरलैंड से दो विशेषज्ञ चंबा पहुंचे हैं। उपायुक्त डीसी राणा ने कहा कि वर्ल्ड बैंक की मदद से यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसमें नीदरलैंड के विशेषज्ञ काम कर रहे हैं।
जलाशयों में जलस्तर बढ़ने पर तुरंत एक मेसेज प्रशासन के पास पहुंचेगा। अलार्म सिस्टम ऑन होगा। जिससे सभी विभाग अलर्ट मोड़ में आ जाएंगे। आपातकालीन अथॉरिटी की ओर से प्रशिक्षित किए गए 15-15 स्वयंसेवियों को लोगों को जागरूक करने का जिम्मा सौंपा जा सकता है।