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हिमाचल की 37 बेटियां बनीं पहली बार कमांडो, सात को मिला श्रेष्ठ पुरस्कार
ब्यूरो/अमर उजाला, मैहतपुर (ऊना)
Updated Tue, 24 Jan 2017 01:20 PM IST
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हिमाचल की 37 बेटियां पहली बार कमांडो बनी हैं। 77 दिन की कठिन ट्रेनिंग के बाद अब वे देश की हिफाजत के लिए तैयार हैं। उन्हें किसी भी राज्य, संवेदनशील क्षेत्र या खतरनाक मिशन पर भेजा जा सकता हैं। सूबे की इन बेटियों की भोली सूरत पर न जाएं किसी भी मुश्किल वक्त में हर स्थिति से निपटने में काबिल हैं।
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हिमाचल प्रदेश की इन 37 महिला पुलिस कर्मियों के अलावा 39 पुरुष जवानों ने भी सोमवार को कमांडो की ट्रेनिंग पूरी की। प्रथम भारतीय आरक्षित वाहनी बनगढ़ परिसर में कमांडो के विदाई समारोह में धर्मशाला रेंज के आईजी जीडी भार्गव ने इनका हौसला बढ़ाया। 77 दिन की ट्रेनिंग के लिए कुल एक सौ महिला/पुरुष कर्मियों का चयन हुआ था।
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इनमें 37 महिलाओं, 39 पुरुषों ने हिस्सा लिया। शेष चयनित प्रशिक्षुओं ने किन्हीं कारणों से ट्रेनिंग नहीं ली। आईटीबीपी के खास प्रशिक्षकों की टीम ने इन कमांडोज को तैयार किया। आईआरबी बनगढ़ के साथ द्वितीय वाहनी सकोह, तृतीय वाहनी पंडोह तथा प्रथम एचपीएपी जुन्गा से आए प्रशिक्षुओं ने कड़ी ट्रेनिंग लेकर खुद इस काबिल बनाया कि उनके कंधों पर अब कमांडोज का बिल्ला दिखाई देगा।
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आईटीबीपी के प्रशिक्षकों निरीक्षक रमेशचंद, टेकचंद, मुख्य आरक्षी सुरेंद्र कुमार, गौतम प्रसाद तथा पंकज कुमार ने प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित करने में अहम रोल अदा किया। जीडी भार्गव के साथ समादेशक एसआर राणा, उपसमादेशक सुरेश शर्मा, कुलवंत सिंह, कोर्स प्रभारी अजय राणा, डीएसपी हेडक्वार्टर कुलविंदर सिंह, डाइट देहलां के प्रिसिंपल कमलदीप सिंह, मुख्य आरक्षी दिलदार सिंह तथा देवेंद्र सिंह मौजूद रहे।
हिमाचल की बेटियां किसी से कम नहीं
धर्मशाला रेंज के आईजी जीडी भार्गव ने कमांडोज से कहा कि उनका चयन उनकी मेहनत, लग्न एवं अनुशासन के दम पर हुआ है। कड़ी ट्रेनिंग के बाद प्रदेश में पहली दफा कमांडो बनीं बेटियों को बधाई देते हुए भार्गव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि बेटियां भी किसी बात में पीछे नहीं हैं।
कमांडो को उन बेहद कठिन कार्यों के लिए लगाया जाता है। जहां लक्ष्य तक पहुंचने को कमांडो के बाद कोई भी बहाना नहीं होता। कमांडो बनीं चांदनी ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ट्रेनिंग बेहद कठिन थी, लेकिन जैसे-जैसे हम इसमें जुड़ते गए, सब आसान होता चला गया। अभिषेक जसवाल ने भी अपने ट्रेनिंग के अनुभव साझा किए।
सात कमांडोज को मिला श्रेष्ठ पुरस्कार
ऊना के बनगढ़ स्थित प्रथम भारतीय आरक्षित वाहनी में कमांडोज की विदाई समारोह में धर्मशाला रेंज के आईजी जीडी भार्गव ने कमांडो ट्रेनिंग के दौरान कुल 76 में से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सात पुरुष एवं महिला कमांडोज को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
इन दौरान शूटिंग, पीटी के अलावा उनके अनुशासन दूसरे के प्रति सम्मान के भाव रखना तथा अपने काम को पूरी लगन के साथ करने के लिए संजीदगी दिखाने वाले इन कमांडोज की हौसलाअफजाई तथा दूसरे कमांडोज के लिए प्रेरणा के तौर पर सम्मानित किया गया।
समादेशक एसआर राणा की देखरेख में हुए कमांडो ट्रेनिंग कैंप में विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिन कमांडोज को सम्मानित किया गया, उनमें तृतीय आईआरबी पंडोह से आरक्षी अभिषेक जसवाल, पंडोह से ही आरक्षी तेज सिंह तथा पंडोह से ही महिला आरक्षी प्रेरणा, आरक्षी रीना द्वितीय वाहनी सकोह, रीत सिंह पंडोह, रामचंद, प्रथम एचपीएपी जुन्गा, अमित कुमार आईआरबी सकोह, मनोज कुमार आईआरबी पंडोह, अरुण कटोच आईआरबी सकोह के नाम शामिल हैं।