यहां मिला दो करोड़ साल पुराने पेड़ का 55 फीट लंबा जीवाश्म
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हिमाचल में दो करोड़ साल पुराने पेड़ का 55 फीट लंबा जीवाश्म मिला है। इसे हिमालयन रेंज में अब तक का सबसे लंबा जीवाश्म होने का दावा किया जा रहा है। साल 1987 से खोज में जुटे स्थानीय वैज्ञानिक रितेश आर्या को यह जीवाश्म दो दिन पूर्व सोलन जिला के कसौली के जगजीत नगर में मिला है। फोरमेशन और वैज्ञानिक आधार से इसकी पुष्टि हो चुकी है।
वैज्ञानिक रितेश ने इसकी सूचना कसौली कैंटोनमेंट बोर्ड, प्रदेश सरकार, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पालियोसाइंसेस लखनऊ को दे दी है। अब यह पता लगाया जाएगा कि यह जीवाश्म किस पेड़ का है। कसौली के अलावा हिमाचल के सोलन, बिलासपुर और मंडी की सीमा में पहाड़ों की फोरमेशन में जीवाश्म की संभावना है। इस रेंज में जीवाश्म होने की पुष्टि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया भी कर चुका है।
सबसे पहले इस रेंज में फूल, पत्तों के जीवाश्म वर्ष 1864 में अंग्रेज मैलिनकोट ने खोजे थे। इसके बाद वर्ष 1988 में कसौली के जगजीत नगर में ही 15 फीट लंबा जीवाश्म मिल चुका है। यहां 1000 के करीब संरक्षित सिलिकाफाइड जीवाश्म पेड़ों के होने की संभावना है। इस खोज से जहां भौगोलिक परिस्थितियों में हुए बदलाव के अध्ययन की जानकारी मिलेगी, वहीं पर्यटन की दृष्टि से इस जीवाश्म को संरक्षित करके आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है।
आर्य के नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
वैज्ञानिक आर्या गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में सर्वाधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में बोरवेल ड्रिल करने वाले वैज्ञानिक हैं। साथ ही वर्किंग ग्रुप नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी आईआईटी रुड़की के सदस्य भी रहे हैं। वे मौजूदा समय में वाटर एंड जियोथर्मल विंग सस्टेनेबल एनर्जी ऑर्गेनाइजेशन जिनेवा के डायरेक्टर हैं।
1994 में जापान में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिमालयन रेंज पर पढ़े शोध पत्र में जिक्र किया गया था कि इस रेंज के जीवाश्म अवशेष महत्वपूर्ण हैं। इनमें गारसीनिया, ग्लुटा, कंस्ट्रेटम सिजिगियम फर्नेस शामिल थे। यहां गैंडा प्रजाति के अवशेष भी मिले हैं।
इन प्रजातियों के अवशेष हिमालय में कसौली को छोड़कर कहीं नहीं मिले हैं। हालांकि अंडमान निकोबार द्वीप इंडो मलयान क्षेत्र में इसके अवशेष मिले हैं। ऐसा मानना है कि हिमाचल अंडमान निकोबार द्वीप की ही तरह था। जिला बिलासपुर में कपि मानव के अवशेष मिल चुके हैं।