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शिमला पहुंचा अल्ट्रा वायलेट तकनीक से शुद्ध किया पानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 02 Jul 2018 11:49 AM IST
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हर साल पीलिया जैसी बीमारियों से जूझने वाले शिमला शहर को रविवार से अल्ट्रा वायलेट तकनीक से शुद्ध किए पानी की सप्लाई शुरू हो गई है। नगर निगम ने अश्वनी खड्ड स्थित ट्यूबवेल टू में यूवी ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर ट्रायल शुरू कर दिया है।
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इसकी क्षमता पांच लाख लीटर है। प्लांट से पंप किए गए पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए रोजाना सुबह शाम सैंपल भी लिए जा रहे हैं। करीब दस दिन तक यह प्रक्रिया चलेगी। हालांकि, अभी इस प्लांट का पानी बाकी ट्यूबवेल के पानी के साथ मिलाकर ही शहर के लिए सप्लाई किया जा रहा है, लेकिन जल्द ही ऐसा प्लांट अश्वनी के बाकी तीन ट्यूबवेल में भी लगाया जाएगा। प्रदेश में पहली बार पानी को शुद्ध करने के लिए इस आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। नगर निगम इस साल के अंत तक सभी परियोजनाओं में इस प्लांट को स्थापित कर शहर को शुद्ध पानी की सप्लाई शुरू कर देगा।
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अब लिफ्ट हो सकेगा अश्वनी का पानी
इस प्लांट के सफल ट्रायल के बाद नगर निगम इससे अश्वनी का पानी भी लिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए यहां पांच एमएलडी की क्षमता वाला यूवी प्लांट लगेगा। साल 2015 में पीलिया फैलने के बाद इस खड्ड का पानी बंद कर दिया गया था। निगम का दावा है कि इस तकनीक से अश्वनी का पानी भी पीने लायक बन जाएगा।
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गिरि-गुम्मा में भी लगेगा प्लांट, खर्च होंगे चार करोड़
शहर की सबसे बड़ी परियोजनाओं गिरि और गुम्मा में भी 20-20 एमएलडी की क्षमता वाले यूवी ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। तीनों परियोजनाओं के ये प्लांट लगाने के लिए करीब चार करोड़ रुपये खर्च होंगे। नगर निगम ने इसके टेंडर भी तैयार कर लिए हैं। दो माह के भीतर टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद दो से तीन माह के भीतर सभी परियोजनाओं में इन्हें स्थापित कर लिया जाएगा।
ऐसे शुद्ध होगा नदियों का पानी
मिनरल वाटर बेचने वाली कंपनियां अल्ट्रा वायलेट तकनीक से ही पानी साफ करती हैं। देश के कई शहरों में इसका सफल ट्रायल भी हो चुका है। प्लांट की अल्ट्रा वायलेट किरणों से पानी में मौजूद वायरस और बाकी अशुद्धियां खत्म हो जाएंगी। इससे पानी की क्लोरीनेशन की भी ज्यादा जरूरत नहीं रहेगी। वर्तमान में पानी साफ करने के लिए प्री सेडमेंटेशन, सेडमेंटेशन, फिल्टरेशन, पंपिंग और क्लोरीनेशन जैसी विधियां अपनाई जाती हैं। अब इनमें क्लोरीनेशन से पहले यूवी ट्रीटमेंट की एक नई विधि शामिल हो जाएगी। इसमें खर्चा सिर्फ बिजली के इस्तेमाल का होगा।
जनता को मिलेगा शुद्ध पानी
अश्वनी के एक ट्यूबवेल में यूवी ट्रीटमेंट प्लांट इंस्टॉल किया गया है। इसका ट्रायल चल रहा है। सफल परीक्षण के बाद इसे दूसरी परियोजनाओं में भी लागू करेंगे। जनता को इससे शुद्ध पानी मिलेगा।
राजेश कश्यप, अधिशासी अभियंता, नगर निगम
कर रहे हैं प्रयास
शहरवासियों को शुद्ध पेयजल मुहैया करवाने के लिए प्रयास चल रहे हैं। शहर में पेयजल संकट न रहे और लोगों को शुद्ध पानी मिले, इसके लिए योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इन पर काम भी शुरू हो गया है।
कुसुम सदरेट, नगर निगम महापौर